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मनी लॉन्ड्रिंग के आरोपों से बढ़ी वीरभद्र सिंह की मुशिकलें

शिमला। हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह की मुशिकलें बढ़ गईं हैं। जब उनके खिलाफ प्रथम दृष्टया मनी लॉन्ड्रिंग का मामला बनता नजर आ रहा है। इस मामले में केंद्र सरकार ने आज दिल्ली हाईकोर्ट को यह जानकारी दी है। हाईकोर्ट ने आयकर विभाग से कहा कि वह उसके समक्ष मुख्यमंत्री का कर आंकलन रिकॉर्ड तथा अन्य दस्तावेज प्रस्तुत करे।

शिमला। हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह की मुशिकलें बढ़ गईं हैं। जब उनके खिलाफ प्रथम दृष्टया मनी लॉन्ड्रिंग का मामला बनता नजर आ रहा है। इस मामले में केंद्र सरकार ने आज दिल्ली हाईकोर्ट को यह जानकारी दी है। हाईकोर्ट ने आयकर विभाग से कहा कि वह उसके समक्ष मुख्यमंत्री का कर आंकलन रिकॉर्ड तथा अन्य दस्तावेज प्रस्तुत करे।

मामला उनके केन्द्रीय इस्पात मंत्री के कार्यकाल का है। अब इस पर सीबीआई को फैसला लेना है। सीबीआई ने इस मसले में कोर्ट को दो सीलबंद रिपोर्ट भेजी हैं और कोर्ट रिपोर्ट का अध्ययन करने के बाद अगले हफ्ते फैसला देगा। इस फैसले पर आज पूरे हिमाचल की नजरें थीं। यही वजह है कि हर कोई इस संबंध में जानने को तत्पर था। हिमाचल में आज ही मानसून सत्र का आगाज भी हो गया इस कारण आने वाले दिनों में वीरभद्र सिंह की मुशिकलें ओर बढ़ेंगी।

एक ओर उन्हें, अगले हफ्ते आने वाले कोर्ट के फैसले का इंतजार करना होगा। वहीं तब तक विपक्ष के हमलों के साथ-साथ पार्टी में अपने विरोधियों से भी निपटना होगा। लेकिन यह तय है कि धनशोधन का यह मामला वीरभद्र सिंह के गले की फांस बन गया है। उनका राजनैतिक भविष्य ही दांव पर लग गया है। हालांकि माना जा रहा था कि सीबीआई की रिर्पोट आज ही कोर्ट में सार्वजनिक हो जायेगी, लेकिन ऐसा हो नहीं पाया।

इससे वीरभद्र सिंह को कुछ दिन के लिये भले ही राहत मिल गई हो। परंतु लगता नहीं कि वह इस मामले पर कोई बचाव कर पायेंगे। क्योंकि उन्हें प्रथम दृष्टया दोषी माना गया है। लगता है हिमाचल के सीएम पर लटकी संकट की तलवार आसानी से नहीं हटेगी। उनके खिलाफ दिल्ली हाईकोर्ट में एक याचिका दायर कर वीरभद्र सिंह के वर्तमान कार्यकाल में उनके खिलाफ भ्रष्टाचार और रिश्वतखोरी के आरोपों की सीबीआई जांच की मांग की गई थी।

‘कॉमन कॉज’ नाम के एक गैर-सरकारी संगठन ने यह याचिका दायर की थी। याचिका में मांग की गई है कि केंद्रीय इस्पात मंत्री के तौर पर वीरभद्र सिंह के कार्यकाल में उन पर लगे धनशोधन, आय से अधिक संपत्ति जमा करने और आपराधिक दुर्व्यवहार के आरोपों की अदालत की निगरानी में सीबीआई जांच कराई जाए।

जानेमाने वकील प्रशांत भूषण की ओर से दायर याचिका में कहा गया है कि जनहित याचिका लंबित रहने के दौरान यह सामने आया है कि हिमाचल प्रदेश सरकार ने साई कोठी में 14 जून 2002 को एक पनबिजली परियोजना मेसर्स वेंचर एनर्जी एंड टेक्नोलॉजी प्राइवेट लिमिटेड को आवंटित कर दी थी। इस बीच मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप पर वीरभद्र सिंह ने सफाई देते हुये कहा कि मैंने कुछ गलत नहीं किया, मेरे खिलाफ लगाए गए आरोप राजनीति से प्रेरित है।
 
विजयेन्दर शर्मा
Press Correspondent,
Bohan Dehra Road, JAWALAMUKHI-176031,
Kangra, HP(INDIA)
Contact Number: 09736276343

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