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सुख-दुख

डायबिटीज रोगियों से ठगी करने वाले डिजिटल मार्केटियरों के खिलाफ लिखने पर वीरेंद्र सेंगर जी को मिल रही थी धमकियां!

अनिल जैन-

अभी-अभी वरिष्ठ पत्रकार क़मर वहीद नक़वी जी Qamar Waheed Naqvi की पोस्ट से सदमा देने वाली सूचना मिली कि वरिष्ठ पत्रकार वीरेंद्र सेंगर जी Virendra Sengar नहीं रहे।

पिछले कुछ समय से नैनीताल में रह रहे सेंगर जी पूरी तरह स्वस्थ थे और सोशल मीडिया लगातार सक्रिय रहते थे। आज दोपहर तक भी वे सोशल मीडिया पर सक्रिय थे लेकिन कुछ देर पहले अचानक उनका निधन हो गया। अभी यह जानकारी नहीं मिली है कि उनका निधन कैसे हुआ लेकिन सच यही है कि वे अब नहीं रहे।

सेंगर जी खांटी ईमानदार और पत्रकारीय मूल्यों के प्रति निष्ठावान पत्रकार थे। उन्होंने अमर उजाला, चौथी दुनिया, संडे मेल आदि अखबारों में विशेष संवाददाता और राजनीतिक संपादक के रूप में काम किया।

सेंगर जी ने कल ही डिजिटल मार्केटिंग के जरिये डायबिटीज के करोडों रोगियों से की जा रही देशव्यापी ठगी पर एक लंबी पोस्ट लिखी थी। इस पोस्ट को लेकर सेंगर जी ने आज दोपहर में फेसबुक पर लिखा था कि कल रात से उनके पास अनजान नंबरों से फोन आ रहे हैं और कुछ ले-देकर इस मामले में मुंह बंद रखने को कहा जा रहा है।

सेंगर जी के मुताबिक फोन करने वालों ने उनसे यह भी कहा कि इस उम्र में शांति से बैठ कर भजन करो, हमारी बात नहीं मानोगे तब भी हमारा कुछ नहीं बिगाड़ पाओगे।

गौरतलब है कि टेलीविजन चैनलों के कई एंकर भी टीवी और यूट्यूब पर इन दवाओं के विज्ञापन अपने चिर-परिचित अंदाज में करते देखे जा सकते हैं।

बहरहाल सेंगर जी को हार्दिक श्रद्धांजलि और उनकी स्मृति को सादर प्रणाम।


उदय प्रकाश-

दिनमान के दिनों से भी पहले से वीरेंद्र सेंगर जी से परिचय और आत्मीयता थी। शहडोल जिले के संदर्भ से वे हमारे संबंधी भी होते थे। बाद में ” संडे मेल” के दौर में वे सहकर्मी रहे। उनकी निर्भीक और तथ्यपरक पत्रकारिता का सम्मान हर कोई करता था। वसुंधरा में वे और उनका परिवार हमारा पड़ोसी था। कुछ साल पहले वे नोएडा शिफ़्ट कर गये थे और निकट के कुछ समय से मनाली में अपने शांत जीवन के साथ रह रहे थे । फेसबुक आदि सोशल मीडिया के माध्यम से संपर्क तब भी बना हुआ था ।

उनके अचानक निधन की सूचना स्तब्ध करने वाली है। पता लगा वे कुछ समय पहले अपने दो तीन पुराने सहकर्मियों दोस्तों से, जो मेरे भी पुराने मित्र सहकर्मी पत्रकार थे, फोन पर बातचीत कर रहे थे।
और अचानक यह आघात हुआ । ईश्वर उनके परिवार और परिजनों को यह दुख सहने का सामर्थ्य दे। नमन !


रामदत्त त्रिपाठी-

यह तो बिलकुल अप्रत्याशित आघात है. फ़ोन पर कुछ देख रहा था, अचानक फ़्लैश दिखा , वीरेंद्र सेंगर नहीं रहे . इधर-उधर बहुत खोजने पर पता चला नैनीताल के पास नौकुचियाताल में घर पर ही हार्ट अटैक हुआ. संभवतः घर पर अकेले ही थे . और वहीं अंतिम सॉंस ली.

कई दशक का साथ था . मुझे अमृत प्रभात से खींचकर वही संडे मेल ले गये . उनसे और रीता जी से एक तरह का पारिवारिक संबंध था.

शानदार और शालीन पत्रकार थे . बहुत अच्छे कॉंटैक्ट थे . राजनीति और समाज की गहरी समझ थी . होली से अब तक दो तीन बार फ़ोन पर बात हुई. आग्रह कर रहे थे कि कुछ दिन आकर उनके साथ रहूँ . जाने का प्लान बन रहा था , उससे पहले ही वह चले गये . ईश्वर उनकी आत्मा को शॉति और सद्गति दे. उनकी पत्नी और बेटी पर क्या गुजर रही होगी सोचकर कॉंप जाता हूँ.


उत्कर्ष सिन्हा-

अलविदा दादा Virendra Sengar! इस खबर ने हिला कर रख दिया है यकीन नहीं हो रहा कि आज सुबह तक सक्रिय रहे हमारे अग्रज वरिष्ठ पत्रकार वीरेंद्र सेंगर दादा का हार्ट अटैक से देहांत हो गया.

सेंगर दादा के साथ कभी अख़बार में काम तो नहीं किया लेकिन नेपाल और भूटान की रोमाचक यात्रा में हमने कई दिन साथ बिताये. खतरा मोल ले कर नेपाल के क्रांति के दिनों में रिपोर्टिंग और फिर भूटान के लोकतान्त्रिक आन्दोलन के छुपे हुए नेताओं का इंटरव्यू …

हफ्ते भर की उस यात्रा में मैंने Virendra Sengar और विनोद अग्निहोत्री जैसे वरिष्ठो से बहुत कुछ सीखा … मुलाकात लम्बे अरसे से नहीं हो सकी थी लेकिन मेरी हर पोस्ट पर उत्साहवर्धक टिप्पणियां लिखने के जरिये वे जीवंत बने हुए थे…


अरुणा सिंह-

दिल दहलाने वाली बुरी खबर मिली है जिसपर यकीन नहीं कर पा रही हूं कि पत्रकार वीरेंद्र सेंगर की हार्ट अटैक से देहांत हो गया । खबर सुनकर यकीन नहीं हुआ तो सेंगर जी के फोन नबर पर फोन किया दुखद सूचना की पुष्टि हुई और पैरों तले जमीन निकल गई। पांच घंटे पहले तो पोस्ट लिखा था अभी सोच रही थी कि उस पोस्ट पर जरूर लिखूंगी जब लिखने के लिए फेसबुक खोला तो ये बुरी खबर मिली। हार्ट अटैक के तार उनकी पोस्ट से जुड़े लग रहे हैं। मुझे शक है उनकी अचानक जाने की वजह भी यही है और इस पर संदेह हो रहा है।

सेंगर जी से वॉट्सएप पर लगभग रोजाना बात होती थी मैं किसान न्यूज का लिंक शेयर करती थी जिस पर वो अपनी टिप्पणी देते थे आज सेंगर ने एक किस्सा भेजा जिसका जवाब देती उससे पहले मनहूस खबर आ गई। आज की पोस्ट का स्क्रीन शॉट शेयर कर रही हूं।

सेंगर जी आजकल नैनीताल रहते थे और सोशल मीडिया पर काफी एक्टिव थे। कई हिंदी अखबार में सीनियर पोस्ट पर रहे सेंगर जी अपने सौम्य व्यवहार और बहुत ही अच्छे पत्रकार के रूप में याद किए जाएंगे। फोन पर अक्सर बात होती थी मैंने बड़ा भाई सामान एक दोस्त खो दिया आ। हमने संडे मेल में छह साल एक साथ काम किया। ये घटना बहुत ही दुखद है। समझ नहीं आ रहा कैसे अपनी भावना व्यक्त करूं। बस इतना ही कहूंगी , सेंगर जी इतनी जल्दी क्या थी जाने की।


राजीव नयन बहुगुणा-

मौत आई, हमें ख़बर न हुई
ऐसी गफ़लत तो उम्र भर न हुई

अग्रज पत्रकार Virendra Sengar का अचानक मर जाना, एक पुराने लेकिन फलदार, छायादार और हरे भरे वृक्ष का टूट गिरना है.
उनके मुख मंडल से ही स्वाभिमान, खरा पन और देशज चरित्र झलकता था. यह सब उनके व्यक्तित्व में निहित था. हम दोनों एक दूसरे के नियमित पाठक थे.

नर संहार के बाद हो रहे विधानसभा चुनावों को कवर करने हम दोनों एक साथ गुजरात में थे. वह अमर उजाला के विशेष प्रतिनिधि के तौर पर गये थे, और मैं स्वतंत्र रूप से उसी अख़बार से यह वादा लेकर और देकर गया था, कि उनके लिए गुजरात से आँखों देखी रपटें भेजूंगा, न कि कानो सुनी

यध्यपि सेंगर साहब मुझसे अधिक मेहनती और आँखों देखी वाले थे, पर उन्होंने मुझसे कहा – मेरा लिखा सब कुछ यह उसी रूप में नहीं छापेंगे . तुम खुल कर लिखो. इसी बीच गुजरात में वह भीषण सड़क दुर्घटना का शिकार हो गये, तथा अमुक अख़बार ने मेरा लिखा एक भी शब्द नहीं छापा.

तभी पत्रकारिता के अच्छे अथवा बुरे दिनों का आभास हो गया था. उनकी ताज़ा लिखी एक टीप पढ़ ही रहा था कि उनके मरने की ख़बर चली आई. अब ज़्यादातर लोग बगैर बताये अकस्मात ही मरेंगे, अथवा मार डाले जायेंगे . सेंगर साहब का बीज बचेगा या नहीं, और कैसे फल देगा, कैसे पत्ते होंगे. उनकी तरह मजबूत और सीधा तना होगा या नहीं, बता नहीं सकता.


श्यामलाल यादव-

बड़ी दुःखद खबर है. श्री वीरेन्द्र सेंगर नहीं रहे. वे क़रीब तीन साल हमारे ब्यूरो चीफ थे अमर उजाला के राष्ट्रीय ब्यूरो में. वर्ष 2000 की शुरुआत में हम लोगों ने जॉइन किया था जब श्री उदयन शर्मा जी वहाँ जॉइन किए थे. सेंगर साहब बेहद सौम्य और सज्जन व्यक्ति थे, और साथ में स्पष्टवादी. कुछ महीने पहले घर आए तो जल्दी चले गये ये कहकर कि दोबारा आना है, हालाँकि आ नहीं पाए, पर फ़ोन और संदेशों से संपर्क में थे. दो हफ़्ते पहले भी फ़ोन आया था. अजीब बात है, आज ये खबर देखी और पता किया तो खबर सही निकली. विनम्र श्रद्धांजलि.


जयशंकर गुप्त-

ओह अत्यंत दुखद और मर्माहत करनेवाली सूचना। वीरेंद्र के साथ 45 वर्ष पुराना याराना इस सूचना के साथ एक झटके में टूट गया। हमारी पहली मुलाकात 1980 में जयपुर में राष्ट्रदूत अखबार के लिए टेस्ट- साक्षात्कार के समय हुई थी। तब से जो याराना बना, अब तक जारी रहा। हम तकरीबन एक ही वैचारिक धरातल, सच को सही और गलत को गलत कहनेवाली पत्रकारिता के साथ बने रहे। इधर लगातार फेसबुक पर उनकी सक्रियता ढाढ़स बढ़ाती थी। अचानक इस तरह की सूचना! विनम्र श्रद्धांजलि मित्र। आप हमारी यादों में सदैव बने रहेंगे, एक जिंदा दिल इन्सान, पारिवारिक मित्र और एक बेबाक, बखौफ पत्रकार के रूप में।


वीरेंद्र सेंगर जी का पुराना इंटरव्यू देखें-

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