विश्व तम्बाकू निषेध दिवस आज : ऐसे पदार्थ तो विष से भी बदतर

तम्बाकू और इससे जनित पदार्थ इंसान के लिए विष से भी बदतर हैं ,पर न जाने क्यों इंसान इसको छोड़ने को तैयार नहीं है ? और फिर हमारी सरकार इस के इस्तेमाल पर पूरी तरह से रोक क्यों नहीं लगाती है। साथ ही इसके उत्पादन को बढ़ावा क्यों देती है ?

सरकार की दुहरी नीति मेरी समझ से परे है । यह नीति ठीक उसी तरह है जैसे कोई शिक्षित अभिभावक अपने घर में बिजली के तारों को जगह-जगह नंगा छोड़ कर घर से बाहर काम पर निकल जाये और यह सोचे कि छोटे बच्चे खुद– खुद होशियार हैं और इन तारों को नहीं छुएंगे और शाम को आने पर पता लगे कि बच्चे तो उन तारों को छूकर अल्लाह के प्यारे हो चुके हैं।

आय के स्रोतों को बढ़ाने के लिए प्रजा की जान को इतना जोखिम में डालना क्या खिलवाड़ नहीं है ? सरकार को अपनी इस नीति पर एक बार जनहित को ध्यान में रखकर फिर से सुसंगत निर्णय लेना चाहिए।

महेश स्वरूप सक्सेना से संपर्क : 9412424524



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