दिग्गज पत्रकार योगेंद्र बाली और वयोवृद्ध पत्रकार काशीनाथ चतुर्वेदी नहीं रहे

नई दिल्ली / ग्वालियर । वरिष्ठ पत्रकार व लेखक योगेंद्र बाली का गुरुवार सुबह निधन हो गया। वह 86 वर्ष के थे और पिछले कुछ समय से बीमार थे। योगेंद्र के पारिवारिक सूत्रों ने उनके निधन की जानकारी दी। उनके परिवार में पत्नी विजय और बेटियां- कलिका तथा पूर्वा हैं। उनका अंतिम संस्कार यहां लोधी रोड स्थित इलेक्ट्रिॉनिक शवदाह गृह में शाम सात बजे किया जाएगा। अपने लंबे करियर में योगेंद्र ने ‘टाइम्स ऑफ इंडिया’ में बतौर संवाददाता भी सेवा दी। वह ‘द ट्रिब्यून’, ‘करंट वीकली’, ‘प्रोब’, ‘संडे मेल’, ‘द डे आफ्टर’, ‘एशिया डिफेंस न्यूज इंटरनेशनल’ से भी जुड़े रहे। वह ललित कला अकादमी की जनरल काउंसिल के सदस्य थे और इसकी कला, शिक्षा, प्रकाशन तथा अंतर्राष्ट्रीय प्रदर्शनियों से संबद्ध समितियों के भी सदस्य रहे। योगेंद्र द्वारा लिखित पुस्तकों में ‘द कम्यूनल बोगी’, ‘चंद्र शेखर : ए पॉलिटिकल बायोग्रॉफी’, ‘पवन चैमलिंग : डेयरिंग टू बी डिफरेंट’ और ‘श्री सतगुरु राम सिंह जी एंड फ्रीडम मूवमेंट ऑफ इंडिया’ शामिल हैं।

उधर ग्वालियर से सूचना है कि वयोवृद्ध पत्रकार काशीनाथ चतुर्वेदी का बुधवार की रात निधन हो गया। वे 92 वर्ष के थे और लंबे समय से बीमार चल रहे थे। कलम के माध्यम से समाजसेवा की राह पर चलने का संकल्प लेने वाले श्री चतुर्वेदी ने जीवन के अंतिम समय में भी इस संकल्प को ध्यान में रखा। इसी के चलते उन्होंने जीते जी अपनी देह जीआर मेडिकल कॉलेज को दान देने का संकल्प लिया था। उनके छोटे बेटे अश्विनी चतुर्वेदी के मुताबिक गुरुवार की सुबह 11 बजे उनकी देह मेडिकल कॉलेज के डॉक्टरों को सौंपी गई। मूल रूप से भिंड जिले के अटेर के गांव तरसोखा में जन्मे श्री चतुर्वेदी की आरंभिक शिक्षा ग्वालियर में ही हुई। उन्होंने बनारस हिंदू विश्वविद्यालय से स्नातक की उपाधि हासिल की। इसके बाद लखनऊ से पत्रकारिता की शुरूआत की। कुछ बरसों तक वहां पत्रकारिता करने के बाद वे ग्वालियर आ गए। यहां शहर के सभी प्रमुख समाचार पत्रों में महत्वपूर्ण पदों पर अपनी सेवाएं दीं। इसके साथ ही समाचार एजेंसी यूएनआई आैर आकाशवाणी के संवाददाता भी रहे। जीवन के अंतिम दौर में स्वास्थ्य ठीक न रहने से उन्होंने सक्रिय पत्रकारिता से खुद को अलग कर लिया था। पत्रकारिता में शुभिता, शुचिता आैर सादगी को अपना आदर्श मानने वाले श्री चतुर्वेदी का शहर की पत्रकारिता में महत्वपूर्ण योगदान है, जो सदैव अविस्मरणीय रहेगा। पूर्व मंत्री भगवान सिंह यादव, जिनसे मुलाकात के कुछ देर बाद ही श्री चतुर्वेदी ने अंतिम सांस ली, ने उनके निधन पर शोक व्यक्त किया है।

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