अजित अंजुम-
मैं भी मानता हूं कि NSA लगाना गलत है . कानून की तमाम धाराएं काफी हैं .

वैसे बीते सालों में दर्जनों प्रोफेसर, डॉक्टर, पत्रकार और एक्टिविस्ट को बीजेपी सरकारों ने NSA, UAPA और राजद्रोह के मामलों में फंसाकर महीनों तक जेल में बंद रखा है . ऐसे नामों की लिस्ट बहुत लंबी है. आंकड़े गवाह हैं कि पौने नौ सालों के मोदी राज में इन कानूनों का सबसे बेजा इस्तेमाल हुआ है.
मनीष कश्यप ने ज़हर फैलाया है . क़ायदे -क़ानून और संविधान को ठेंगे पर रखते हुए दर्जनों वीडियो बनाए हैं . कट्टरता उसकी पहचान है . इसलिए उससे कोई सहानुभूति नहीं है मुझे . उसने जिस ढंग से बिहारी मज़दूरों के मामले में फर्जीवाड़ा करके तनाव पैदा करने की कोशिश की , वो अपने आपमें जघन्य अपराध है . उसे उसकी सज़ा मिलनी चाहिए .
मैं सिर्फ़ एनएसए , यूएपीए या राजद्रोह जैसे क़ानूनों के इस्तेमाल की बात कर रहा हूँ . चाहे जिसके लिए हो रहा हो .
मैंने ये भी कहा है कि बीते आठ सालों में सिद्दीक़ कप्पन से लेकर डॉक्टर कफ़ील खान तक इसके शिकार हुए हैं . अभी भी बहुत से लोग जेलों में बंद हैं . बीजेपी सरकारों ने इस मामले में रिकार्ड बनाया है .
श्याम मीरा सिंह-
तमिलनाडु पुलिस ने मनीष कश्यप पर NSA क़ानून लगा दिया है। मनीष कश्यप को उनके अपराध की मात्रा के अनुसार सजा ज़रूर दी जानी चाहिए। लेकिन NSA, UAPA, राजद्रोह जैसे क़ानून सामान्य नागरिकों पर नहीं ठोके जाने चाहिए। अब ये राजनीतिक दुर्भावना का केस लग रहा है। जिसे सराहा नहीं जा सकता।
अक्सर NSA, UAPA, राजद्रोह जैसे क़ानूनों का इस्तेमाल केंद्र और राज्य सरकारें अपने राजनीतिक विरोधियों से निपटने के लिए करती हैं। किसी के अपराध की प्रकृति और मात्रा के अनुसार उसे सजा देने के लिए IPC में पहले से तमाम धाराएँ उपलब्ध हैं। NSA का दुरुपयोग नहीं होना चाहिए।
प्रियांशु कुशवाहा-
मनीष कश्यप के समर्थन में अब वो लोग भी उतरने लगे हैं जो कल तक क्रांति के नाम पर यूट्यूब चलाने के लिए आपसे चंदा माँग रहे थे। धीरे-धीरे वो सभी लिबरल बुद्धिजीवी अपनी छलनी में छान के मनीष कश्यप के अपराध का मुआयना करेंगे। यूट्यूबर पर UAPA लगाना क़ानून का दुरुपयोग करना बतायेंगे।
भले ही मनीष के फर्जी वीडियो से दो राज्यों में भगदड़ मच जाए, हज़ारों-हज़ार लोगों की ज़िंदगी दाव पर लग जाए, दो राज्यों के बीच के अन्तर्सम्बन्ध ख़राब हो जाए, लोगों को जान गंवानी पड़े, UAPA नहीं लगना चाहिए।
मनीष कश्यप का इतिहास दंगा भड़काने का रहा है, वो कोर्ट में घोषित आदतन अपराधी है। समाज के लिए ख़तरा है, वीडियो बना के गांधी को गाली देता है, कश्मीरियों को बिहार से भगाने का आह्वान करता है। लेकिन UAPA नहीं लगना चाहिए।
मनीष कश्यप के समर्थन में बोलने वालों का बैकग्राउंड देख आइए। फिर तय कीजिए क्रांति का जिम्मा उठाने वाला प्रबुद्ध बुद्धिजीवी वर्ग कितना बड़ा जातिवादी है।


