आज का टेलीग्राफ : मां गंगा ने बादशाह को नंगा कर दिया है!

आज का द टेलीग्राफ अखबार फिर सत्ता के शीर्ष नेतृत्व की अक्षमता को उजागर करने वाला है. अखबार ने सोशल मीडिया पर वायरल गुजरात की एक कवियत्री की ‘शव वाहिनी गंगा’ कविता को भी प्रकाशित किया है.

पूरी कविता इस तरह है-

शव वाहिनी गंगा

-गुजराती कवियत्री पारुल खक्कड़ की कविता का हिंदी अनुवाद!

एक साथ सब मुर्दे बोले ‘सब कुछ चंगा-चंगा’

साहेब तुम्हारे रामराज में शव-वाहिनी गंगा

ख़त्म हुए शमशान तुम्हारे, ख़त्म काष्ठ की बोरी

थके हमारे कंधे सारे, आँखें रह गई कोरी

दर-दर जाकर यमदूत खेले

मौत का नाच बेढंगा

साहेब तुम्हारे रामराज में शव-वाहिनी गंगा

नित लगातार जलती चिताएँ

राहत माँगे पलभर

नित लगातार टूटे चूड़ियाँ

कुटती छाती घर घर

देख लपटों को डफली बजाते वाह रे ‘बिल्ला-रंगा’

साहेब तुम्हारे रामराज में शव-वाहिनी गंगा

साहेब तुम्हारे दिव्य वस्त्र, दैदीप्य तुम्हारी ज्योति

काश असलियत लोग समझते, हो तुम पत्थर, ना मोती

हो हिम्मत तो आके बोलो

‘मेरा साहेब नंगा’

साहेब तुम्हारे रामराज में शव-वाहिनी गंगा!

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