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पीलीभीत के पत्रकार पर FIR से पीसीआई नाराज, डीएम-एसएसपी समेत 7 को भेजा नोटिस

पीलीभीत के पत्रकार सुमित सक्सेना पर खबरों के चलते मुकदमा दर्ज किए जाने का मामला प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया ने बेहद गंभीरता से लिया है. चेयरमैन जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई ने जिला संवाददाता की शिकायत पर विचार करने के उपरांत टिप्पणी करते हुए कहा कि प्रकरण प्रेस की स्वतंत्रता पर अतिक्रमण/कुठाराघात का प्रतीत होता है.

न्यायमूर्ति के निर्देश पर उत्तर प्रदेश सरकार के गृह सचिव, जिलाधिकारी संजय कुमार सिंह व पुलिस अधीक्षक अविनाश पांडेय सहित सात लोगों को नोटिस जारी किया गया है. प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया का नोटिस मिलते ही फर्जी मुकदमा लिखने वाले पुलिस व प्रशासन में हड़कंप मचा हुआ है.

प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया की चेयरमैन जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई के निर्देश पर पीसीआई के सचिव डॉ धीरज काकड़िया ने उत्तर प्रदेश शासन के गृह सचिव, जिलाधिकारी संजय कुमार सिंह, पुलिस अधीक्षक अविनाश पांडेय, स्वशासी राज्य चिकित्सा महाविद्यालय की प्राचार्या डॉ संगीता अनेजा, जिला महिला चिकित्सालय (संबद्ध स्वशासी राज्य चिकित्सा महाविद्यालय) के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ राजेश कुमार, कोतवाली के प्रभारी निरीक्षक नरेश त्यागी, कोतवाली के उप निरीक्षक/विवेचक रमेश चंद्र शर्मा को भेजे नोटिस में दो सप्ताह के भीतर अपना लिखित वक्तव्य प्रस्तुत करने का आदेश दिया है.

नोटिस में कहा गया है कि प्रेस परिषद अधिनियम 1978 की धारा 13(1) के साथ पठित अधिनियम की धारा 15(4) के अंतर्गत इस मामले में परिषद द्वारा कार्रवाई क्यों नहीं की जाए. नोटिस में यह भी निर्देश दिए गए हैं कि प्रतिपक्षी अपने लिखित वक्तव्य की प्रतिलिपि शिकायतकर्ता दैनिक 2 टूक के संवाददाता सुमित सक्सेना को भी प्रेषित करें. पूरे मामले में सुमित सक्सेना की ओर से प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया के समक्ष वाद दायर किया गया था जिसकी सुनवाई करते हुए काउंसिल की अध्यक्षा की ओर से सभी अधिकारियों को नोटिस जारी किए गए हैं.

पूरा मामला क्या है?
स्वशासी राज्य चिकित्सा महाविद्यालय पीलीभीत से सम्बद्ध महिला अस्पताल (एमसीएच विंग) की बरेली से प्रकाशित सांध्य दैनिक 2 टूक में 5 मई रविवार को “6 दिन से खराब मोटर को बदलवाने के लिए 6 घंटे खड़े रहे अधिकारी” शीर्षक से एक खबर छपी तो चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग की खासी फजीहत हुई.

इसके बाद सुमित ने 6 मई को “मेडिकल कॉलेज में डीएम-एडीएम का छापा, निरीक्षण में मिली कई खामियां”, 7 मई को “डीएम के आदेश बेअसर, प्राचार्या समेत मेडिकल कॉलेज का स्टाफ मिला नदारद”, 8 मई को “डीएम ने मेडिकल कॉलेज प्राचार्या को माना दोषी, शासन को भेजी रिपोर्ट”, 8 मई को “संवेदनहीन मेडिकल कॉलेज… गर्भस्थ शिशु के साथ जली पूनम की चिता” शीर्षक से खबरें अपने समाचार पत्र में प्रकाशित की.

मामला शासन के संज्ञान में आया तो अधिकारियों को जवाब देते नहीं बना. मगर जनहित की इस खबर को छापना पत्रकार को महंगा पड़ गया. जिला महिला चिकित्सालय, पीलीभीत के विरुद्ध आलोचनात्मक खबरों से स्वशासी राज्य चिकित्सा महाविद्यालय, पीलीभीत की प्राचार्या डॉ. संगीता अनेजा व जिला महिला अस्पताल के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. राजेश कुमार क्षुब्ध हो गए। प्राचार्या व मुख्य चिकित्सा अधीक्षक द्वारा उसे जान माल के नुकसान की धमकियां दी जाने लगीं. प्रार्थी इन धमकियों को नजरअंदाज कर कर्तव्य पथ पर आगे बढ़ता रहा.

इसी बीच जिला संवाददाता सुमित सक्सेना ने 10 मई को सुबह ही जिलाधिकारी को पत्र देकर तमाम आशंकाओं को व्यक्त करते हुए अवगत कराया था कि चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी कुत्सित आरोप लगाकर षडयंत्रपूर्वक उसे किसी भी मामले में फंसा सकते हैं. उसके साथ अप्रिय घटना की आशंका बनी हुई है. लेकिन जिलाधिकारी ने इस मामले में कोई कार्रवाई नहीं की बल्कि उनके इशारे पर प्रार्थी के विरुद्ध कथित/मिथ्या आरोप लगाकर खबरों के प्रकाशन से क्षुब्ध डॉ. राजेश कुमार, मुख्य चिकित्सा अधीक्षक जिला महिला चिकित्सालय पीलीभीत ने दुर्भावनावश लोक सेवक के पद का दुरुपयोग करते हुए दिनांक- 9 मई 2024 को कथित प्रार्थना पत्र सदर कोतवाली पीलीभीत में दिया. दुर्भावनावश बिना किसी प्रारंभिक जांच को कराए प्रार्थी के विरुद्ध 10 मई की रात को एफआईआर दर्ज कर ली गई.

जिला महिला चिकित्सालय पीलीभीत के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. राजेश कुमार ने सदर कोतवाली में पत्रकार सुमित सक्सेना के विरुद्ध अस्पताल की प्रतिबंधित क्षेत्र में जाकर सरकारी कार्य में व्यवधान उत्पन्न करने की एक तहरीर दी. इस तहरीर पर कोतवाली पुलिस ने शुक्रवार को सुमित सक्सेना के विरुद्ध भारतीय दंड संहिता की धारा 353 के अंतर्गत मुकदमा दर्ज कर लिया. दर्ज एफआईआर में सीएमएस ने कहा कि अस्पताल परिसर में वर्जित क्षेत्र में बाहरी व्यक्तियों का आना-जाना प्रतिबंधित है उनको एमसीएच विंग के ड्यूटी रूम व लेबर रूम के समस्त चिकित्सक एवं स्टाफ में अवगत कराया है कि 7 मई को सुमित सक्सेना नाम का व्यक्ति चिकित्सालय के प्रतिबंधित क्षेत्र में अनावश्यक रूप से आया जोकि अपने को पत्रकार बता रहा था और ड्यूटी पर मौजूद स्टाफ से अभद्रता की, चूंकि महिला चिकित्सालय में प्रतिबंधित क्षेत्र (लेबर रूम व ओटी) में पिछले तीन-चार दिनों से सुमित सक्सेना का आना-जाना हर ड्यूटी शिफ्ट में लगा हुआ है, जिसमें पत्रकार सुमित द्वारा सबसे ज्यादा स्टाफ डॉक्टर को परेशान किया जा रहा है.

पीड़ित ने भी मानवाधिकार आयोग में लगाई गुहार
पीलीभीत के महिला अस्पताल के बदहाल सिस्टम से हारकर मौत के मुंह में समाई गर्भवती पूनम देवी के पति देवेंद्र ने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग का दरवाजा खटखटाया है. पीड़ित ने सीएमएस व लापरवाह स्टाफ के विरुद्ध कार्यवाही के साथ ही मुआवजा दिलाने की मांग की है. राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने पूरे मामले में जिलाधिकारी से रिपोर्ट तलब की है.

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