उत्तर प्रदेश में योगीराज में अगर आपने अपने पत्रकारिता के दायित्व का निर्वहन कर जनहित में अव्यवस्थाओं को उजागर किया तो इसे सिस्टम की खिलाफत माना जाएगा। इसका खामियाजा भुगतना पड़ेगा, ऐसा ही जनपद पीलीभीत में हुआ।
स्वशासी राज्य चिकित्सा महाविद्यालय से सम्बद्ध महिला अस्पताल (एमसीएच विंग) की बरेली से प्रकाशित सांध्य दैनिक 2 टूक में 5 मई रविवार को ” 6 दिन से खराब मोटर को बदलवाने के लिए 6 घंटे खड़े रहे अधिकारी” शीर्षक से एक खबर छपी तो चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग की खासी फजीहत हुई। मामला शासन के संज्ञान में आया तो अधिकारियों को जवाब देते नहीं बना। मगर जनहित की इस खबर को छापना पत्रकार को महंगा पड़ गया।
जिला महिला चिकित्सालय पीलीभीत के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. राजेश कुमार ने गुरुवार को सदर कोतवाली में पत्रकार सुमित सक्सेना के विरुद्ध अस्पताल की प्रतिबंधित क्षेत्र में जाकर सरकारी कार्य में व्यवधान उत्पन्न करने की एक तहरीर दी।
इस तहरीर पर कोतवाली पुलिस ने शुक्रवार को सुमित सक्सेना के विरुद्ध भारतीय दंड संहिता की धारा 353 के अंतर्गत मुकदमा दर्ज कर लिया। दर्ज एफआईआर में सीएमएस ने कहा कि अस्पताल परिसर में वर्जित क्षेत्र में बाहरी व्यक्तियों का आना-जाना प्रतिबंधित है उनको एमसीएच विंग के ड्यूटी रूम व लेबर रूम के समस्त चिकित्सक एवं स्टाफ में अवगत कराया है कि 7 मई को सुमित सक्सेना नाम का व्यक्ति चिकित्सालय के प्रतिबंधित क्षेत्र में अनावश्यक रूप से आया जोकि अपने को पत्रकार बता रहा था और ड्यूटी पर मौजूद स्टाफ से अभद्रता की, चूंकि महिला चिकित्सालय में प्रतिबंधित क्षेत्र (लेबर रूम व ओटी) में पिछले तीन-चार दिनों से सुमित सक्सेना का आना-जाना हर ड्यूटी शिफ्ट में लगा हुआ है, जिसमें पत्रकार सुमित द्वारा सबसे ज्यादा स्टाफ डॉक्टर को परेशान किया जा रहा है।
7 मई को लगभग रात्रि 11 से 12 बजे के बीच दो बार बगैर अनुमति के अवैध रूप से सुमित लेबर रूम में घुस आए। सुमित के द्वारा शासकीय कार्य में बाधा उत्पन्न की जा रही है। समस्त चिकित्सक एवं स्टाफ द्वारा अवगत कराया गया है कि इस तरह का माहौल रहा तो हम अपनी सेवाओं को पूर्णतया देने में असमर्थ हैं।
सुमित ने पहले ही डीएम को बता दिया
सुमित सक्सेना ने शुक्रवार को सुबह ही जिलाधिकारी को लिखित रूप से अवगत कराया था कि मेडिकल कॉलेज के कुछ अधिकारियों व कर्मचारियों द्वारा षडयंत्र रचकर उसको झूठे आरोपों में फंसाने का प्रयास किया जा रहा है। उसके साथ अस्पताल परिसर में रेकी, कवरेज के दौरान स्टाफ द्वारा विरोध किया जाना, मरीजों की आवाज उठाने से रोकना व लापरवाही उजागर करने पर कुत्सित मानसिकता के साथ मिथ्या आरोप लगाकर षड्यंत्र करना गलत है। भविष्य में उसके साथ किसी भी अनहोनी घटना की आशंका बनी हुई है।
जिले भर के पत्रकारों में आक्रोश
पत्रकार सुमित सक्सेना पर एफआईआर दर्ज होने के बाद जिले भर के पत्रकारों में भारी आक्रोश है। नेशनल यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट उत्तर प्रदेश के जिलाध्यक्ष निर्मल कांत शुक्ल ने पूरे मामले में आक्रोश जताते हुए कहा कि यह लोकतंत्र के चौथे स्तंभ पर हमला है। सुमित ने पत्रकारिता के दायित्व का निर्वहन किया तो सच को दबाने के लिए चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग के भ्रष्ट अधिकारियों ने षडयंत्र पूर्वक पत्रकार पर मुकदमा दर्ज कराया, जोकि सहन नहीं किया जाएगा। शासन को तत्काल इस मामले को संज्ञान लेना चाहिए अन्यथा पत्रकार आंदोलनात्मक कदम उठाने के लिए मजबूर होंगे। उन्होंने मांग की कि तत्काल पत्रकार सुमित सक्सेना पर दर्ज कथित एफआईआर को एक्सपंज किया जाए।
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