पीलीभीत के पत्रकार सुमित सक्सेना पर जिस मामले में सीएमएस ने मुकदमा लिखाया था, अब उसका वीडियो भी सामने आ गया है। इस वीडियो में साफ दिख रहा है कि एक गर्भवती महिला ई-रिक्शा में पड़ी है और अस्पताल प्रबंधन उसे भर्ती करने से मना कर देता है। बाद में महिला और उसे पेट में शिशु की मौत हो गई। इस मामले में अस्पताल प्रबंधन ने उल्टा पत्रकार पर ही मुकदमा कर दिया था। क्योंकि उसने अस्पताल में बिखरी कालिख को बाहर ला दिया था। देखें यह वीडियो…
ममता त्रिपाठी-
पीलीभीत की वो घटना जिसे सरकारी काम में बाधा मानते हुए एक पत्रकार सुमित पर सरकार ने मुक़दमा लिखवा दिया। ये यूपी है।
सरकारी मशीनरी की लापरवाही से एक महिला और उसके पेट में पल रहे बच्चे की मौत हो जाती है मगर ज़ुबान सिली रहनी चाहिए!
अफसर, नेताओं के बच्चे नहीं होते क्या? इनकी आत्मा नहीं रोती ऐसी वीडियो और तस्वीरें देखकर? कलेजा छलनी होता है…हे राम
अभिषेक उपाध्याय-
बिल्कुल। यही वो वीडियो है जिसमें एक गरीब गर्भवती महिला पीलीभीत के सरकारी अस्पताल में एडमिशन के लिए आती है। उसके परिजन उन्हें लौटाए जाने और कहीं और जाने की सलाह देने की दास्ताँ बयान करते हैं।
बाद में इस बेचारी महिला और उसके गर्भस्थ शिशु की मौत हो जाती है और 22 सालों से एक ही पद पर जमा मुख्य चिकित्सा अधीक्षक राजेश कुमार उल्टा खबर लिखने वाले पत्रकार पर ही सरकारी कामकाज में बाधा डालने की एफ़आईआर दर्ज करा देता है।
ये वही अधीक्षक है जो कोरोना में वेंटिलेटर्स को निष्क्रिय रखने के महाअपराध का दोषी पाया गया। लोग मरते रहे। सरकारी जाँच रिपोर्ट है बाक़ायदा। ये फिर भी अपने पद पर जमा हुआ है।
बड़ी बात ये कि डीएम को सब पता है। मगर कार्यवाही की जगह उस पत्रकार पर ही ट्वीट डिलीट करने का दबाव बनाया गया। उम्मीद है कि मुख्यमंत्री और स्वास्थ्य मंत्री संज्ञान लेंगे और अस्पताल से लेकर प्रशासन तक ज़िम्मेदार अफ़सरों पर ऐसी कार्यवाही होगी कि उदाहरण बने।
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