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उत्तर प्रदेश

पीलीभीत में पत्रकार के खिलाफ की गई FIR में अब चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं!

अभिषेक उपाध्याय-

यूपी के पीलीभीत में एक स्थानीय पत्रकार के ख़िलाफ़ की गई एफ़आईआर में अब चौंकाने वाले तथ्य सामने आ रहे हैं।

ये मामला पीलीभीत के मेडिकल कॉलेज के महिला अस्पताल में भर्ती किए जाने से इनकार करने पर हुई एक महिला और उसके गर्भस्थ शिशु की मौत का है।

दैनिक जागरण की रिपोर्ट कहती है कि उस रात ये मामला न सिर्फ़ डीएम पीलीभीत बल्कि मुख्यमंत्री सचिवालय तक भी पहुँचा।

आनन फ़ानन में डीएम महिला अस्पताल पहुँचे। निरीक्षण किया। लापरवाही मिली। निर्देश दिए। फिर लौट गए।

बात आयी गई हो गई। और फिर जिस स्थानीय पत्रकार सुमित ने इस मामले को मौक़े से रिपोर्ट किया था और उच्चाधिकारियों को उसकी जानकारी दी थी, उसी के ख़िलाफ़ सरकारी कामकाज में बाधा की एफ़आईआर दर्ज कर दी गई।

बड़ी बात ये है कि जिस मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ राजेश कुमार ने ये एफ़आईआर दर्ज करवाई है, उसके बारे में आरोप है कि वो पिछले 22 सालों से एक ही जगह पर जमा हुआ है जबकि उस पर गंभीर आरोपों की बाढ़ है।

कोरोना काल में वेंटिलेटर्स की कमी के चलते जाने गयीं। ये व्यक्ति उन्हें Inactive रखने के महाअपराध का दोषी पाया गया था। पीलीभीत के पत्रकारों के पास वो रिपोर्ट भी मौजूद है।

फिर भी एक ही जगह पर 22 साल से जमे इस व्यक्ति का बाल भी बाँका नहीं हुआ। शायद इसी को कहते हैं सिस्टम!

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