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सियासत

पत्रकार दिलवर हुसैन मजूमदार के साथ नाटकीय घटनाक्रम, जेल से छूटते ही पुलिस ने चोरी के केस में उठाया, असम में हाहाकार

गुवाहाटी के पानबाजार पुलिस ने पत्रकार दिलवर हुसैन मजूमदार को जमानत मिलने के कुछ ही देर बाद फिर से गिरफ्तार कर लिया। उन्हें जेल के बाहर से हिरासत में लेकर पुलिस वाहन में ले जाया गया, जिससे इस मामले की निष्पक्षता को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं।

नया मामला और गंभीर धाराएं

मजूमदार के खिलाफ नया मामला केस नंबर 111/25 के तहत दर्ज किया गया है, जिसमें बीएनएस की धारा 329/324(4)/351(3)/309(4)/115 शामिल की गई हैं। खासतौर पर धारा 309(4) गैर-जमानती है और अगर मजूमदार दोषी पाए जाते हैं, तो उन्हें 10 साल तक की सजा हो सकती है।

बैंक दस्तावेज चोरी का आरोप

पत्रकार पर नया आरोप है कि उन्होंने महत्वपूर्ण बैंक दस्तावेज लूटकर फरार होने की कोशिश की। बताया जा रहा है कि 25 मार्च को बैंक की ओर से दो एफआईआर दर्ज कराई गई थीं, लेकिन अब खुलासा हुआ है कि पानबाजार पुलिस ने सिर्फ एक एफआईआर को आधिकारिक तौर पर स्वीकार किया, जबकि दूसरी एफआईआर को छिपाने का आरोप लग रहा है।

पुलिस की कार्रवाई पर उठे सवाल

मजूमदार को जमानत मिलने के तुरंत बाद दोबारा गिरफ्तारी ने पुलिस की मंशा पर संदेह पैदा कर दिया है। दूसरी एफआईआर छिपाने और त्वरित गिरफ्तारी को लेकर कई सवाल खड़े हो रहे हैं, लेकिन प्रशासन की ओर से अब तक कोई स्पष्ट जवाब नहीं आया है।

फिलहाल, इस मामले में आगे की जांच जारी है और इससे जुड़े नए खुलासों का इंतजार किया जा रहा है।

इस प्रकरण पर दूसरी तरफ पत्रकारों का भारी विरोध शुरू हो गया है। गुवाहाटी प्रेस क्लब ने दिलावर हुसैन को तत्काल रिहा करने की मांग की है। असम के अलावा अन्य जगहों पर प्रदर्शन किए जा रहे हैं। प्रेस क्लब के महासचिव संजय रे ने कहा कि यह बेहद चिंताजनक है कि एक पत्रकार को अपने कर्तव्य का पालन करते हुए हिरासत में लिया गया। हम अधिकारियों से प्रेस की स्वतंत्रता को बनाए रखने का आग्रह करते हैं।


रवीश कुमार-

असम के पत्रकार सड़क पर उतर गए हैं। साथी पत्रकार की गिरफ्तारी के विरोध में। मुख्यमंत्री कहते हैं कि दिलवर हुसैन मज़ूमदार पत्रकार नहीं है। लेकिन कोर्ट ने एक मामले में ज़मानत देते हुए कहा कि गिरफ्तारी के लिए कानून का दुरुपयोग हुआ है।

सरकार को कहां पीछे हटना चाहिए था तो चोरी डकैती के आरोप में जेल में डाल दिया। आप ही बताइये। एक बैंक के बाहर प्रदर्शन हो रहा है। उसे कवर करने पत्रकार गया है। पुलिस केस करती है कि किसी का जातिगत अपमान किया है।

इस केस में बेल मिलती है तो चोरी के आरोप में जेल में डाला जाता है। पहले चोरी का केस दर्ज होगा या अपमान का? क्या ये पुलिस की दादागीरी नहीं है? कब तक चलेगा ऐसा?

रवीश का यह वीडियो देखें…

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मूल खबर…

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