देहरादून/गोपेश्वर। उत्तराखंड के प्रसिद्ध बदरीनाथ धाम में वीआईपी दर्शन के लिए श्रद्धालुओं से 1100 रुपये प्रति व्यक्ति लिए जाने का मामला विवादों में घिर गया है। इस बीच बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (बीकेटीसी) का एक कार्यालय आदेश और स्थानीय मीडिया में प्रकाशित खबर सामने आने के बाद इस व्यवस्था को लेकर कई सवाल उठ खड़े हुए हैं।
28 मई 2026 को जारी बीकेटीसी के कार्यालय आदेश के अनुसार, चारधाम यात्रा के दौरान सामान्य श्रद्धालुओं के दर्शन पर न्यूनतम प्रभाव बनाए रखने और प्रोटोकॉल श्रेणी के दर्शन को सुव्यवस्थित करने के लिए SOP में आंशिक संशोधन किया गया था। आदेश में कहा गया है कि जिला प्रशासन या राज्य सरकार से प्राप्त प्रोटोकॉल सूचना के आधार पर जारी पर्ची के माध्यम से प्राथमिकता से दर्शन कराए जाएंगे और इसके लिए प्रति व्यक्ति 1100 रुपये की “सहयोग राशि” लेकर रसीद जारी की जाएगी।
हालांकि आदेश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि राज्य अतिथियों और उनके परिवारों को इस सहयोग राशि से छूट रहेगी।
इसी बीच स्थानीय अखबार में प्रकाशित खबर में दावा किया गया है कि बिना बीकेटीसी बोर्ड की औपचारिक मंजूरी के श्रद्धालुओं से 1100 रुपये लेकर वीआईपी दर्शन कराए गए। रिपोर्ट के अनुसार, जून महीने के अंतिम सप्ताह से यह व्यवस्था लागू की गई थी।
खबर में बीकेटीसी के मुख्य कार्याधिकारी (CEO) का हवाला देते हुए कहा गया है कि यात्रियों की बढ़ती भीड़ को देखते हुए यह व्यवस्था की गई थी और इसके बदले रसीद भी जारी की जाती थी। वहीं, बीकेटीसी के उपाध्यक्ष ने कथित तौर पर कहा है कि वीआईपी दर्शन के लिए शुल्क लगाने संबंधी कोई प्रस्ताव समिति की बैठक में पारित नहीं हुआ था। वरिष्ठ अधिकारियों का भी कहना है कि बिना बोर्ड की स्वीकृति शुल्क संबंधी व्यवस्था करना बोर्ड की भावना के अनुरूप नहीं माना जाएगा।
रिपोर्ट के अनुसार, अब इस पूरी व्यवस्था में एकत्र की गई राशि के ऑडिट की भी मांग उठ रही है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि कुल कितनी धनराशि प्राप्त हुई और उसका उपयोग किस उद्देश्य से किया गया।
इस मामले में फिलहाल अलग-अलग पक्षों के दावों के बीच स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं है। हालांकि सामने आए कार्यालय आदेश से यह पुष्टि होती है कि 1100 रुपये की सहयोग राशि का प्रावधान प्रशासनिक स्तर पर जारी किया गया था, जबकि शुल्क लागू करने की प्रक्रिया और बोर्ड की मंजूरी को लेकर विवाद बना हुआ है।

बद्रीनाथ मंदिर चोरी का विवाद सुलझा नहीं, अब वीआईपी दर्शन कराने को 1100 ₹ की पर्ची काटने का विवाद सामने आ गया। ये पर्ची भी BKTC अध्यक्ष का निजी सचिव/प्रोटोकॉल अधिकारी प्रमोद नौटियाल ही काटता था जिस पर दान पेटिका से चोरी करने के आरोप में FIR हुई है।
बद्री केदार मंदिर समिति के उपाध्यक्ष का कहना है कि यह व्यवस्था बोर्ड से स्वीकृत नहीं है, CEO सोहनलाल रांघड़ का कहना है कि यात्रियों की भीड़ के मद्देनजर यह तात्कालिक व्यवस्था की गई थी।
मतलब जब जब श्रद्धालुओं की भीड़ बढ़ेगी तब पर्ची कटेगी? कमाल की व्यवस्था है।
-अजीत सिंह राठी, वरिष्ठ पत्रकार



