शीतल पी सिंह-
सारे नोएडा के मीडिया चैनलों ने और असंख्य यूट्यूबर्स ने अयोध्या चढ़ावा चोरी का मास्टरमाइंड/ मुख्य अभियुक्त टिन्नू यादव को घोषित कर रक्खा था।
अब FIR के बाद जो पुलिस जांच चल रही है और कल जो कोर्ट में मुख्य अभियुक्त बताकर रिमांड माँगी गई और मिली वह अविनाश शुक्ला की है।
कैश बरामदगी की हर खबर में पंद्रह से बीस लाख रुपये की बरामदगी, डालर की बरामदगी और सोने चाँदी की बरामदगी जिनके यहाँ हुई वे यादव नहीं थे। टिन्नू के घर से कुल एक लाख रुपये बरामद करने की बात इसी दुष्प्रचार वाहिनी को स्वीकार करनी पड़ी (यह एक लाख रुपये भी मंदिर चढ़ावे के हैं कि निजी हैं यह भी स्पष्ट नहीं है)।
टिन्नू यादव के लखनऊ में फ्लैट और फार्चूनर का भी अब कहीं कोई ज़िक्र नहीं है। प्रसार भारती से सोलह करोड़ रुपये सालाना इनाम पाने वाले सुधीर चौधरी भी आरोप लगाकर अब ग़ायब हैं!
हम कितने जातिवादी लोग हैं और हमेशा पिछड़े दलित आदिवासी, स्त्री, व गरीब लोगों को ही टार्गेट करने के दोषी हैं?
विनय कटियार भी भारतीय समाज के अन्ना हजारे हैं. अंतर केवल इतना है कि अन्ना हजारे महाराष्ट्र के मराठा कुर्मी हैं और विनय कटियार कानपुर के कटियार कुर्मी हैं.
दोनों को भाजपा ने यूज करके फेंक दिया है. अपनी औकात नहीं समझ रहे हैं ये लोग. पूरे समाज को इन्होंने बर्बादी के कगार पर खड़ा कर दिया.
-सत्येंद्र पीएस

भारत में भ्रष्टाचार की निरंतरता अयोध्या में खंडित नहीं हो पाई। यह बड़ी बात नहीं है। बड़ी बात है कि यह सब बाहर आने के बाद भी ढँक दिया जाएगा। जल्दी ही वहाँ की सीट किसी तरह से (आप जानते हैं) जीत ली जाएगा और कह दिया जाएगा कि अयोध्या की जनता ने भी लगाई मुहर, चंपत राय सा ईमानदार कोई नहीं।
-रवीश कुमार
भारत समाचार का ट्वीट-
बिग ब्रेकिंग | अयोध्या। सिर्फ रामधन ही नहीं लूटा। हर काम में कमीशन भी लूटा। 40% तक कमीशन वसूला गया। लूटमार की हर सीमा पार की ट्रस्टियों ने। चंपत राय को सब पता था। वसूली टिन्नु यादव के माध्यम से होती थी।
राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में अब नया और बेहद गंभीर एंगल सामने आया है। आरोप है कि राम मंदिर परिसर में सिर्फ चढ़ावा चोरी ही नहीं, बल्कि काम कराने वालों से भुगतान के नाम पर कमीशनखोरी और पैसे वापस लेने का भी खेल चल रहा था।

मंदिर परिसर में काम कर चुके लोगों ने आरोप लगाया है कि कागजों पर ज्यादा भुगतान दिखाया जाता था, लेकिन पेमेंट कराने के बाद उनसे रकम वापस ले ली जाती थी। पैसे नहीं देने पर काम करने वालों को परेशान किया जाता था और मानसिक दबाव बनाया जाता था।
आरोप है कि इस पूरे खेल में रामशंकर यादव टिन्नू और उसके साथियों के साथ ट्रस्ट से जुड़े लोगों की भी भूमिका रही। पीड़ितों का दावा है कि मंदिर के कई कामों में भारी कमीशन वसूला गया और कई लोगों को मजबूरी में काम बीच में छोड़ना पड़ा।
सबसे बड़ा सवाल अब यही है क्या राम मंदिर परिसर में चढ़ावे के साथ-साथ कामकाज। और भुगतान की व्यवस्था में भी संगठित वसूली का सिंडिकेट चल रहा था?



