नई दिल्ली। मीडिया कंपनी जागरण प्रकाशन लिमिटेड (Jagran Prakashan) के प्रमोटर गुप्ता परिवार के बीच चल रहे विवाद में अब 27 जुलाई को अहम सुनवाई होगी। राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण (NCLT) की इलाहाबाद पीठ ने कंपनी की ओर से दलीलें सुनने के लिए 27 जुलाई दोपहर 2:30 बजे की तारीख तय की है। यह मामला कंपनी में मतदान अधिकार (Voting Rights), प्रतिनिधित्व (Representation) और प्रबंधन नियंत्रण (Management Control) से जुड़ा हुआ है।
8 जुलाई की सुनवाई में क्या हुआ?
8 जुलाई को हुई सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता जयंत मेहता ने शैलेंद्र मोहन गुप्ता, समीर गुप्ता और सिद्धार्थ गुप्ता की ओर से अपनी दलीलें पूरी कर दीं। यह याचिका महेंद्र मोहन गुप्ता, शैलेश गुप्ता और VRSM Enterprises LLP की ओर से दायर की गई है।
इसके बाद कंपनी की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मल्होत्रा को अपनी दलीलें शुरू करनी थीं, लेकिन उन्होंने कुछ समय की मांग की। इस पर NCLT ने मामले की अगली सुनवाई 27 जुलाई के लिए स्थगित कर दी।
2023 से चल रहा है विवाद
यह विवाद पहली बार जुलाई 2023 में सार्वजनिक हुआ था, जब कंपनी के नॉन-एग्जीक्यूटिव चेयरमैन और प्रमोटर महेंद्र मोहन गुप्ता तथा होल-टाइम डायरेक्टर शैलेश गुप्ता ने NCLT की इलाहाबाद पीठ में अन्य प्रमोटरों और प्रमोटर समूह के सदस्यों के खिलाफ याचिका दायर की थी।
बाद में सितंबर 2025 तिमाही के दौरान शैलेंद्र मोहन गुप्ता, जो कंपनी के नॉन-एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर और प्रमोटर समूह के सदस्य हैं, ने भी व्यक्तिगत रूप से इसी तरह की याचिका दाखिल की।
विवाद का केंद्र जागरण मीडिया नेटवर्क इन्वेस्टमेंट प्राइवेट लिमिटेड (JMNIPL) के माध्यम से जागरण प्रकाशन में मतदान अधिकारों के इस्तेमाल को लेकर है।
आठ निदेशकों को हटाने का फैसला फिलहाल लागू नहीं
इस विवाद के बीच 29 मई को आयोजित कंपनी की असाधारण आम बैठक (EGM) में शेयरधारकों ने सात स्वतंत्र निदेशकों (Independent Directors) और होल-टाइम डायरेक्टर सतीश चंद्र मिश्रा को हटाने के प्रस्तावों को मंजूरी दे दी थी।
हटाए जाने वाले स्वतंत्र निदेशकों में दिव्या करानी, शैलेंद्र स्वरूप, अनीता नैय्यर, केमिशा सोनी, प्रमोद अग्रवाल, शालीन टंडन और अरुण अनंत शामिल हैं।
इन सभी आठ प्रस्तावों को लगभग 89.4 प्रतिशत से 89.84 प्रतिशत वोटों का समर्थन मिला। प्रमोटर समूह ने इन प्रस्तावों के पक्ष में मतदान किया, जबकि अधिकांश सार्वजनिक संस्थागत निवेशकों ने इसका विरोध किया।
हालांकि, इन प्रस्तावों को अब तक लागू नहीं किया गया है। राष्ट्रीय कंपनी विधि अपीलीय न्यायाधिकरण (NCLAT) ने आदेश दिया था कि जब तक NCLT कंपनी याचिका संख्या 64/2023 पर अंतिम फैसला नहीं दे देता, तब तक इन प्रस्तावों के क्रियान्वयन पर रोक रहेगी।
स्वतंत्र निदेशकों ने उठाए सवाल
EGM से पहले सातों स्वतंत्र निदेशकों ने लिखित जवाब देकर कहा था कि उन्हें हटाने का मुख्य आधार केवल यह आरोप है कि उनकी नियुक्ति के समय JMNIPL के जरिए डाले गए वोट वैध नहीं थे।
उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर पहले से ही NCLT में सुनवाई चल रही है और उनके कामकाज, ईमानदारी, प्रदर्शन या जिम्मेदारियों के निर्वहन को लेकर कोई ठोस आरोप नहीं लगाया गया है।
उनका यह भी कहना था कि वे प्रमोटर समूह के आपसी सत्ता संघर्ष का हिस्सा बना दिए गए हैं और उन्हें किसी पेशेवर विफलता के कारण नहीं हटाया जा रहा।
स्वतंत्र निदेशकों ने यह भी दावा किया कि उन्होंने वरिष्ठ अधिकारियों के मूल्यांकन और बोर्ड बैठकों से पहले नियमित परिचालन समीक्षा जैसी बेहतर कॉरपोरेट गवर्नेंस व्यवस्था लागू करने की पहल की थी। शुरुआत में प्रमोटर समूह के कुछ निदेशकों ने इन सुझावों का समर्थन किया, लेकिन बाद में कुछ प्रमोटरों ने उनकी वैधता पर सवाल उठाते हुए उन्हें हटाने की मांग शुरू कर दी।
27 जुलाई की सुनवाई होगी अहम
NCLT का ताजा आदेश केवल प्रक्रिया से जुड़ा है और इसमें मतदान अधिकार, बोर्ड नियुक्तियों, प्रबंधन नियंत्रण या निदेशकों को हटाने की वैधता पर कोई अंतिम फैसला नहीं दिया गया है।
अब 27 जुलाई को जागरण प्रकाशन की ओर से कंपनी के वकील अपनी दलीलें पेश करेंगे। इस मामले में NCLT का अंतिम फैसला यह तय करेगा कि EGM में पारित बोर्ड पुनर्गठन संबंधी प्रस्ताव लागू होंगे या नहीं। साथ ही प्रमोटर समूह के भीतर मतदान अधिकार और प्रतिनिधित्व को लेकर भी स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।



