नई दिल्ली। 9 अगस्त के अमर उजाला के एक पेज पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी से जुड़ी खबरें एक साथ प्रकाशित हुई हैं। दोनों नेताओं ने एक दिन पहले युवाओं और छात्रों से जुड़े कार्यक्रमों में हिस्सा लिया था, लेकिन अखबार के पेज पर दोनों खबरों को दी गई जगह और प्रस्तुति में स्पष्ट अंतर दिखाई देता है।
पेज की प्रमुख खबर आईआईटी दिल्ली के 57वें दीक्षांत समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संबोधन पर है। इसका शीर्षक है— “सवाल ही न पूछें, समाधान भी दें”। खबर में प्रधानमंत्री के युवाओं से सवाल पूछने के साथ समाधान तलाशने, सीखते रहने और देश के अगले 35 वर्षों के विकास में युवाओं की भूमिका से जुड़े संदेश को प्रमुखता दी गई है। खबर के साथ प्रधानमंत्री की तस्वीर भी प्रकाशित की गई है।
इसी पेज पर प्रयागराज में राहुल गांधी के छात्रों से संवाद की खबर भी प्रकाशित है। इसका शीर्षक है— “सिस्टम ने युवाओं को चक्रव्यूह में फंसाया”। खबर में राहुल गांधी के उस बयान को प्रमुखता दी गई है, जिसमें उन्होंने शिक्षा के नाम पर परिवारों से बड़ी रकम वसूले जाने और युवाओं को रोजगार न मिलने का मुद्दा उठाया।
हालांकि, प्रस्तुति के स्तर पर दोनों खबरों में अंतर साफ दिखाई देता है। मोदी की खबर को पेज पर बड़ी और प्रमुख जगह मिली है, जबकि राहुल गांधी की खबर अपेक्षाकृत छोटे बॉक्स में प्रकाशित हुई है। तस्वीर के आकार और खबर के लिए उपलब्ध स्थान में भी अंतर है।
यह तुलना इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि दोनों कार्यक्रमों का केंद्र युवा और छात्र थे। एक तरफ प्रधानमंत्री ने आईआईटी दिल्ली के छात्रों को संबोधित किया, वहीं राहुल गांधी ने प्रयागराज में छात्रों के साथ संवाद किया। अन्य अखबारों की समीक्षा में भी दोनों कार्यक्रमों को प्रमुखता से दर्ज किया गया है।
हालांकि, सिर्फ खबर का आकार देखकर संपादकीय पक्षपात का निश्चित निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा। किसी खबर की जगह तय करने में कार्यक्रम की प्रकृति, समाचार-मूल्य, उपलब्ध सामग्री, फोटो और उस दिन के दूसरे समाचारों जैसे कई संपादकीय कारण हो सकते हैं। लेकिन एक ही पेज पर दोनों नेताओं के कार्यक्रम होने के कारण स्पेस और प्रस्तुति का यह अंतर चर्चा का विषय जरूर बनता है।
सवाल यही है कि जब दोनों खबरें युवाओं से जुड़ी थीं, तो क्या उन्हें समान संपादकीय महत्व मिलना चाहिए था? इसका जवाब पाठक और मीडिया की संपादकीय कसौटियां तय करेंगी।

अख़बार में राहुल गांधी के कार्यक्रम की कवरेज…
ठीक भी है। जब कार्यक्रम में कोई आया ही नहीं तो ज़्यादा स्पेस देने का क्या मतलब?
कोई आया होता तो मंत्रियों, सांसदों, विधायकों को RaGaFlopShow का हैशटैग चलाकर बताना थोड़ी पड़ता।
और अख़बार की सूचना का भी स्रोत शायद ये हैशटैग और उसके चलाने वाले हों।
वैसे भी कहाँ IIT का कार्यक्रम और कहाँ Inter College!
संपादक को संपादकीय ‘दायित्व’ और ‘क्षमता’ का भी परिचय देना होता है!
-समीरात्मज मिश्रा, वरिष्ठ पत्रकार


