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हैलो मेटा, आप मोदीजी के आगे झुक गए, लेकिन मेरा अकाउंट क्यों बंद कर दिया?- केजरीवाल

Account Status screen showing an avatar with the Indian flag, and a list of status items: Content and messages, Reach, Features, Monetisation, Unavailable in some locations, each with a green check or warning icon.

प्रकाश के रे-

टेक्नो-फ़्यूडलिज़्म के बारे में.

दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने मेटा/फ़ेसबुक से शिकायत की है कि उसने उनके अकाउंट को क्यों रेस्ट्रिक्ट कर दिया है. पीएम मोदी के एक वीडियो को कुछ क्षण के लिए रोकने पर फ़ेसबुक ने माफ़ी माँगा है.

ऐसी शिकायतें मेटा यानी फ़ेसबुक/इंस्टाग्राम/थ्रेड/व्हाट्सएप समेत एक्स और दूसरे प्लेटफ़ॉर्म पर भी आती रहती हैं- हमारे देश में भी और दूसरे देशों में भी.

यह खेल केवल सोशल मीडिया पर ही नहीं हो रहा है, बैंक खाते में, क्रेडिट कार्ड में, मीडिया में आने में, आदि-इत्यादि- हर जगह हो रहा है. दुनिया भर में हो रहा है.

टेक्नो-फ़्यूडिल्ज़्म ठीक उसी तरह से काम करता है, जैसे फ़्यूडिलिज़्म काम करता था, जैसे उसके उत्तराधिकारी किराया और मज़दूरी की लेन-देन में करते हैं.

संक्षेप में, जो सच में सत्ता चला रहा है, वह निर्धारित करता है. छोटे स्तर से लेकर दुनिया के स्तर पर.

जो लोग यह कहते हैं कि हमारा सोशल मीडिया होता, तो ऐसा नहीं होता. उनको यही कहना है कि लोकल पार्षद, गुंडे, सूदख़ोर आदि से पंगा लेना जानलेवा है, तो केजरीवाल कैसे नेतन्याहू जैसे वैश्विक बाहुबलियों के पट्ठों से पंगा ले सकते हैं! इस देश का सबसे ताक़तवर नहीं ले सकता है.


केजरीवाल का मूल ट्वीट (हिंदी में)-

हैलो Meta, metaindia,

आपने मेरा अकाउंट प्रतिबंधित क्यों किया है? आपकी भारत स्थित ऑफिस में मौखिक पूछताछ से पता चला कि भारत में मेरा अकाउंट प्रतिबंधित कर दिया गया है और यहां उपलब्ध नहीं है। लेकिन क्यों?

आपके ऑफिस में कोई भी यह बताने को तैयार नहीं है कि प्रतिबंध क्यों लगाया गया है। न ही कोई यह बता रहा है कि इसे हटाने का तरीका क्या है। मैंने कई ईमेल किए, लेकिन हर बार सिर्फ औपचारिक जवाब मिला—मेरी शिकायत प्राप्त होने की पुष्टि। उसके बाद कोई समाधान या जवाब नहीं।

यह बेहद खराब सेवा है।

और हां, हमारे प्रधानमंत्री के सामने इतना मत झुकिए कि आखिर में वे आपको भारत में सिर्फ अपना अकाउंट चलाने की अनुमति दें।


टेक्नो-फ़्यूडलिज़्म (Techno-feudalism) एक विचार/अवधारणा है, जिसका इस्तेमाल यह समझाने के लिए किया जाता है कि डिजिटल युग की बड़ी टेक कंपनियां किस तरह सामंती व्यवस्था जैसी ताकत हासिल कर रही हैं।

आसान भाषा में समझें:

टेक्नो-फ़्यूडलिज़्म = टेक्नोलॉजी + सामंतवाद

पुराने सामंती दौर में राजा या सामंत के पास जमीन होती थी और आम लोग उस जमीन पर निर्भर रहते थे। सामंत के पास संसाधन और सत्ता का नियंत्रण होता था।

आज के डिजिटल दौर में आलोचकों के मुताबिक:

  • Google, Meta, Amazon, Apple जैसी बड़ी टेक कंपनियां डिजिटल प्लेटफॉर्म और इंफ्रास्ट्रक्चर पर नियंत्रण रखती हैं।
  • लोगों और कारोबारों को इन प्लेटफॉर्म पर निर्भर रहना पड़ता है।
  • कंपनियां तय करती हैं कि किसे प्लेटफॉर्म पर जगह मिलेगी, किसका कंटेंट दिखेगा और किसका अकाउंट बंद या प्रतिबंधित किया जा सकता है।
  • यूजर्स का डेटा और उनकी ऑनलाइन गतिविधियां इन कंपनियों के लिए एक बड़ा आर्थिक संसाधन बन जाती हैं।
  • छोटे कारोबारी, क्रिएटर और मीडिया संस्थान इन प्लेटफॉर्म के एल्गोरिद्म और नियमों पर निर्भर हो जाते हैं।

इसलिए आलोचक कहते हैं कि जमीन के मालिक सामंतों की जगह डिजिटल प्लेटफॉर्म के मालिक और टेक कंपनियां एक नई तरह की सत्ता हासिल कर रही हैं।

एक उदाहरण- मान लीजिए किसी पत्रकार का पूरा डिजिटल काम Facebook/Instagram या YouTube पर निर्भर है। अचानक प्लेटफॉर्म उसका अकाउंट प्रतिबंधित कर देता है।

पत्रकार पूछता है—“क्यों?”

लेकिन कंपनी के पास अपने नियम, एल्गोरिद्म और अपील सिस्टम हैं और पत्रकार के पास प्लेटफॉर्म छोड़ने के अलावा बहुत सीमित विकल्प हैं।

यही स्थिति टेक्नो-फ़्यूडलिज़्म की बहस में एक उदाहरण के तौर पर इस्तेमाल की जाती है।

यह शब्द किसने लोकप्रिय किया?

इस अवधारणा को हाल के वर्षों में सबसे ज्यादा ग्रीक अर्थशास्त्री और राजनीतिक विचारक यानिस वरुफाकिस (Yanis Varoufakis) ने लोकप्रिय बनाया। उनका तर्क है कि आज की डिजिटल अर्थव्यवस्था सिर्फ पारंपरिक पूंजीवाद नहीं रह गई है, बल्कि कुछ बड़ी टेक कंपनियों के पास “डिजिटल सामंती सत्ता” जैसी शक्ति आ गई है।

हालांकि यह कोई सर्वमान्य आर्थिक सिद्धांत नहीं है। टेक्नो-फ़्यूडलिज़्म एक विवादित राजनीतिक-आर्थिक अवधारणा है और कई अर्थशास्त्री इसे पूंजीवाद के नए रूप को समझाने के लिए पर्याप्त या सही नहीं मानते।

एक लाइन में: जिस तरह पुराने सामंत जमीन को नियंत्रित करके सत्ता चलाते थे, उसी तरह टेक्नो-फ़्यूडलिज़्म की अवधारणा में बड़ी टेक कंपनियों को डिजिटल प्लेटफॉर्म, डेटा और एल्गोरिद्म के नियंत्रण के जरिए नई तरह की आर्थिक-सामाजिक सत्ता हासिल करने वाला माना जाता है।

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