सुंदर चंद ठाकुर-
सीखना, जुड़ना और नया बनाना, मेरी तीसरी पारी शुरू
रिटायरमेंट के बाद अब सारा ध्यान Alto Mind पर। लगातार कुछ ख़ास लोगों से मुलाक़ातें हुई हैं और उनसे बहुत सीखने को मिल रहा है। बिज़नेस का field मेरे लिए नया नहीं है। मैंने एक प्राइवेट लिमिटेड कंपनी 1999 में बनायी थी। Great four security Pvt Ltd। पर तब किन्हीं वजहों से कंपनी छोड़नी पड़ी थी। इस बार इरादा पक्का है।
रिटायरमेंट के सिर्फ दो दिनों के भीतर दो ऐसे शानदार बिज़नेस लीडर्स से मिलने का अवसर मिला, जिनसे मिलकर मुझे लगा कि मेरी नई यात्रा की शुरुआत इससे बेहतर शायद हो ही नहीं सकती थी। यह वह समय है जब मैं Alto Mind के साथ अपनी entrepreneurship की नई यात्रा के पहले कदम बढ़ा रहा हूँ।
पहले हैं राज भट्ट जी, Chairman & CEO, Elara Capital — जो अब मेरे लिए एक बड़े भाई जैसे हो गए हैं। इन दो दिनों में उनसे दो बार मिलने का अवसर मिला और हर मुलाकात ने मुझे कुछ नया सीखने का मौका दिया।
राज भट्ट जी मूल रूप से उत्तराखंड से हैं और उनकी पूरी यात्रा अपने आप में कई दिलचस्प कहानियों, अनुभवों और सीखों से भरी हुई है। मुझे सबसे ज्यादा प्रभावित करता है उत्तराखंड के प्रति उनका जुड़ाव और राज्य के लिए लगातार कुछ करने की उनकी प्रतिबद्धता।
मुंबई के Grand Hyatt में उनका Ashwamedh कार्यक्रम हो रहा है, जिसमें 200 से अधिक कंपनियां भाग ले रही हैं।


दूसरी मुलाकात हुई राजदीप गुप्ता जी से — Route Mobile के Founder, Sanraj Group के मालिक और Mumbai Cricket League के President। एक और बेहद प्रेरणादायक उद्यमी, जिनकी यात्रा से बहुत कुछ सीखा जा सकता है।
दिलचस्प बात यह है कि मेरे भतीजे उन्मुक्त चंद और मेरी पत्नी डॉ. शशिकला को भी इनसे मिलने और बातचीत करने का अवसर मिला। ये बातचीत हमारे लिए बेहद समृद्ध और सीखने वाली रहीं।

शायद कुछ नया शुरू करने का सबसे बड़ा फायदा यही है कि आप एक बार फिर विद्यार्थी बन जाते हैं। आप ज्यादा सुनते हैं, ज्यादा देखते हैं, ज्यादा सवाल पूछते हैं और शायद पहले से कहीं तेजी से सीखते हैं।
Times Group के साथ 29 वर्षों की मेरी यात्रा अभी-अभी पूरी हुई है, लेकिन मैं इसे अंत नहीं मानता।
मैं इसे अपनी तीसरी पारी की शुरुआत मानता हूँ – एक ऐसी पारी, जिसमें मेरा सपना है कि Alto Mind को एक अंतरराष्ट्रीय ब्रांड बनाया जाए, जो Powerful Bodies, Stronger Minds और Peaceful Beings की दिशा में काम करे।
मुझे पता है कि इसके लिए बहुत मेहनत, धैर्य, अनुशासन और लगातार सीखते रहने की जरूरत होगी। लेकिन जिंदगी का नाम ही तो यही है।
मेरे लिए उम्र हमेशा सिर्फ एक संख्या रही है। सीखने, आगे बढ़ने और कुछ सार्थक बनाने की इच्छा की कोई उम्र नहीं होती।
यात्रा शुरू हो चुकी है। और मैं इसके हर पल का आनंद ले रहा हूँ। आप सबकी शुभकामनाएँ चाहिए।


