Connect with us

Hi, what are you looking for?

सुख-दुख

सवाल पूछने पर महिला पत्रकारों को हिरासत! लोकतंत्र में पुलिसिया दबंगई बर्दाश्त नहीं : डॉ राजेश त्रिवेदी

साकेत थानाध्यक्ष और संबंधित महिला पुलिस अधिकारी के निलंबन व गिरफ्तारी की मांग — कार्रवाई नहीं हुई तो सड़क पर उतरेगा पत्रकार समाज

Woman in a yellow hijab comforts a crying child who is being hugged by another woman in a clinic waiting room as a staff member approaches.

लखनऊ। लोकतंत्र में सत्ता से सवाल पूछना क्या अपराध हो गया है? दिल्ली में मुख्यमंत्री से सवाल पूछने वाली महिला पत्रकारों नफीसा खान और शाहीन खान को पुलिस द्वारा हिरासत में लिए जाने और उनके साथ कथित मारपीट के मामले ने पत्रकार समाज में आक्रोश पैदा कर दिया है। उत्तर प्रदेश श्रमजीवी पत्रकार यूनियन ने इसे पत्रकारिता की स्वतंत्रता और लोकतांत्रिक अधिकारों पर गंभीर हमला बताते हुए दोषी पुलिस अधिकारियों एवं कर्मचारियों के विरुद्ध तत्काल कठोर कार्रवाई की मांग की है।

यूनियन के प्रदेश कार्यालय में आयोजित बैठक में घटना को लेकर तीखा आक्रोश व्यक्त किया गया। बैठक की अध्यक्षता करते हुए प्रदेश अध्यक्ष डॉ. राजेश त्रिवेदी ने दो टूक कहा कि पत्रकार का काम सत्ता से सवाल पूछना है, सत्ता की चापलूसी करना नहीं। सवाल पूछने वाले पत्रकारों को पुलिस की ताकत से डराने अथवा दबाने का कोई भी प्रयास लोकतंत्र के लिए खतरनाक संकेत है।

डॉ. त्रिवेदी ने कहा कि यदि किसी पत्रकार को उसके सवालों के कारण हिरासत में लिया जाता है और उसके साथ कथित मारपीट की जाती है तो यह केवल एक पत्रकार के अधिकारों का मामला नहीं रह जाता, बल्कि सीधे तौर पर अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और लोकतांत्रिक व्यवस्था की गरिमा से जुड़ जाता है।

उन्होंने मांग की कि पूरे प्रकरण की निष्पक्ष एवं उच्चस्तरीय जांच कराई जाए तथा प्रथमदृष्टया दोषी पाए जाने वाले साकेत थाने के थानाध्यक्ष और संबंधित महिला पुलिस अधिकारी को तत्काल निलंबित कर उनके विरुद्ध आपराधिक कार्रवाई की जाए। उन्होंने कहा कि पुलिस वर्दी कानून लागू करने का अधिकार देती है, कानून से ऊपर होने का नहीं।

‘पत्रकारों को डराने की कोशिश का जवाब आंदोलन से देंगे’

यूनियन के प्रांतीय महासचिव रमेश शंकर पाण्डेय ने घटना की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि पत्रकार समाज इस तरह की कार्रवाई को मूकदर्शक बनकर स्वीकार नहीं करेगा। उन्होंने कहा कि पत्रकार जनता की आवाज को शासन और प्रशासन तक पहुंचाने का काम करते हैं। यदि पत्रकारों को ही सवाल पूछने पर पुलिसिया कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा तो आम नागरिक अपने सवाल किससे पूछेगा?

उन्होंने दिल्ली सरकार से तत्काल हस्तक्षेप कर दोषी पुलिसकर्मियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई सुनिश्चित करने की मांग की। पाण्डेय ने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि मामले में शीघ्र कार्रवाई नहीं हुई तो उत्तर प्रदेश श्रमजीवी पत्रकार यूनियन आंदोलन का रास्ता अपनाएगी और पत्रकारों के सम्मान एवं अधिकारों की लड़ाई सड़क तक ले जाएगी।

उन्होंने कहा कि पत्रकारिता को दबाने की कोशिश के सामने पत्रकार समाज झुकने वाला नहीं है।

महिला पत्रकारों की सुरक्षा पर भी उठे सवाल

प्रांतीय पदाधिकारी लक्ष्मीकान्त पाठक ने कहा कि महिला पत्रकारों के साथ कथित मारपीट और पुलिसिया दुर्व्यवहार की घटना विशेष रूप से गंभीर है। उन्होंने कहा कि महिला पत्रकारों को कार्यस्थल पर सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराना शासन और प्रशासन की जिम्मेदारी है। पत्रकारों की सुरक्षा से किसी भी स्तर पर समझौता नहीं किया जा सकता।

उन्होंने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच और दोषी अधिकारियों-कर्मचारियों के विरुद्ध कठोर दंडात्मक कार्रवाई की मांग की।

एकजुट हुआ पत्रकार समाज

बैठक में प्रांतीय पदाधिकारी रीना दीक्षित, रवि कश्यप, भूपेंद्र मणि त्रिपाठी, शशिकांत पाण्डेय, रविंदर सिंह और चंद्रगुप्त श्रीवास्तव सहित बड़ी संख्या में पत्रकार उपस्थित रहे। सभी ने घटना की एक स्वर में निंदा करते हुए दोषियों के विरुद्ध तत्काल कार्रवाई की मांग की।

बैठक में यह स्पष्ट संदेश दिया गया कि पत्रकारों को सवाल पूछने से रोकना लोकतंत्र की आवाज को रोकने के समान है। यूनियन पदाधिकारियों ने कहा कि पत्रकारों के अधिकार, सम्मान और सुरक्षा के साथ खिलवाड़ किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जाएगा।

यूनियन ने चेताया कि यदि सरकार और पुलिस प्रशासन ने मामले में शीघ्र निष्पक्ष कार्रवाई नहीं की तो आंदोलन की अगली रणनीति तय कर पत्रकार समाज को लामबंद किया जाएगा।

ये भी पढ़ें…

Pahad Ki Dada: Hill Mail Uttarakhand
CosmoQuick: AI Recruitment For Media Jobs
Click to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

भड़ास लीगल टीम : Bhadas Legal Team

भड़ास मेल: [email protected]

Latest 100 भड़ास

विज्ञापन