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आयोजन

इस देश के ज्यादातर लिबरल और कांग्रेसी बुद्धिजीवी दोगले और खोखले हैं!

Eight people stand on a stage for a commemorative event, with a large banner announcing '95th Jayanti' in Hindi behind them.

समरेंद्र सिंह-

इस देश के ज्यादातर लिबरल और कांग्रेसी बुद्धिजीवी दोगले और खोखले हैं। ये हिंदी कवि श्रीकांत वर्मा के नाम पर उनके बेटे के द्वारा शुरू किए गए सम्मान पर दो टके की बहस कर रहे हैं।

श्रीकांत वर्मा कांग्रेस के नेता थे। सांसद थे। और उस दौर में कांग्रेस के सांसद थे जब इंदिरा गांधी ने इमरजेंसी थोपी थी और दमनचक्र चलाया था। ऐसे कवि की नैतिकता कितनी दमदार, वजनदार रही होगी, ये अंदाजा लगाया जा सकता है। बेटे को क्या दोष देना, वो तो अपने माता-पिता की छद्म नैतिकता, पाखंड और नाम के सहारे अपने दागदार दामन को धुलने की कोशिश कर रहा है। नया वजूद तलाश रहा है।

श्रीकांत वर्मा 1986 में चल बसे तो कांग्रेस ने इनकी पत्नी को राज्यसभा भेजा। तब राजीव गांधी प्रधानमंत्री थे। वो तीन बार राज्यसभा में रहीं। राजीव गांधी पर हथियार सौदे में दलाली खाने का आरोप लगा, साबित नहीं हुआ। अभिषेक वर्मा पर भी आरोप है।

श्रीकांत वर्मा की तरह अशोक वाजपेयी भी सत्ता के साथ रहे हैं। और सत्ता का हित साधते हुए अपना हित साधने के हुनर में उस्ताद हैं। ये जमाने से यही करते आए हैं और अब भी यही कर रहे हैं।

ये अवार्ड उन्होंने सोच समझ कर लिया है। वो श्रीकांत वर्मा के ‘अछूत’ बेटे का शुद्धिकरण कर रहे हैं। इसके लिए डील बड़ी हुई होगी। 21 लाख से अधिक बड़ी। इसके साथ सत्ता का एक समानांतर चैनल, एक चोर दरवाजा भी खुला रहेगा। सत्ता किसी की हो राज ‘वाजपेयी’ करेगा!
ये महीन राजनीति है। अब अपूर्वानंद जैसे छुटभैये लोग छद्म नैतिकता के शिखर पर चढ़ कर बिलबिला रहे हैं तो इसकी वजह उनकी निजी पीड़ा है। सेवा में तो इन्होंने भी कोई कसर नहीं छोड़ी है, लेकिन मेवा अशोक वाजपेयी और पुरुषोत्तम अग्रवाल जैसे माहिर खिलाड़ी खा रहे हैं। अपूर्वानंद जैसों के ‘विरोध’ पर इठलाने, इतराने वाले दरअसल कमअक्ल हैं।

खैर, कोई सम्मान ऐसे किसी कवि को जिंदा नहीं रख सकता, जिसके शब्दों में कोई वजन नहीं हो। ये बात श्रीकांत वर्मा और अशोक वाजपेयी दोनों पर लागू होती है। अशोक वाजपेयी की कविताएं तो रद्दी की टोकरी में ही जाने योग्य हैं। वही जाएंगी भी। और ये कवि चंद वर्षों में अपने समूचे कचरे के साथ मिट्टी में मिल जाएगा।

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