विजय चावला-
अब पुलिस को बेझिझक खरी-खरी सुनाई जा रही है
“कहाँ फंस गया!” “इनसे पीछा कैसे छुड़ाऊँ?” – मेरे ख्याल से ये विचार संलग्न फोटो में नज़र आ रहे दिल्ली पुलिस अधिकारी के दिमाग में चल रहें होंगे जब वरिष्ठ पत्रकार अजित अंजुम इनकी वर्दी से गायब बैज पर तीखे सवाल कर रहे थे।
यह वाकया कल जंतर मंतर पर हुआ, जहां मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का इस्तीफ़ा मांगने के लिए एकत्र हुए लोगों के खिलाफ दिल्ली पुलिस सख्ती से पेश आ रही थी। पुलिस अधिकारी से अंजुम के सवालों का कोई जवाब देते नहीं बन रहा था, इसलिए वे झेंपते हुए नज़र आए। झेंप मिटाने के लिए वे कभी मुंह पर हाथ फेरते हैं, कभी आँख पर।
इस वाकया के यूट्यूब शॉर्ट में मुख्यतः अंजुम बोल रहें हैं। इक्का-दुक्का वाक्य पुलिस अधिकारियों के हैं। प्रस्तुत है शॉर्ट के औडियो के संपादित अंश:
अजित अंजुम: … आपका बैज मैंने रिकॉर्ड किया आधा घंटा पहले। आपने बैज क्यों उतार दिया?…
पुलिस अधिकारी: दूर खड़े अपने साथी की ओर हाथ बढ़ाते हुए पूछते हैं, “बैज है मेरा…”
(इसके बाद पुलिस अधिकारी इधर-उधर घूमते हैं; अंजुम एवं दूसरे पत्रकार उनका साथ नहीं छोड़ते।)
अजित अंजुम: “… भाई साहब, आधे घंटे पहले इनका बैज था, मैंने देखा है… सर, आप अपना नाम खुद ही बता दो।… सबसे अधिक घसीट कर लोगों को यहाँ ले जा रहे हैं… मेरे वीडियो के शुरू में इनका बैज था, नाम लिखा हुआ था। इन्होंने बाद में हटा दिया। तो सबको घसीटने की जिम्मेदारी ऐसे लोगों को दी गई है… नाम बताने में क्या दिक्कत है?… बैज नहीं है, ज़ुबान तो है… नाम बता दीजिए… यहाँ लाठी-डंडे चला रहे हो, इसलिए बैज उतार रहे हो? नाम क्या है?…
इसी बीच पुलिस अधिकारी बैज लगा लेते हैं, परंतु वह टूटा हुआ है, इसलिए नाम स्पष्ट नहीं है। संभवतः हल्की आवाज में उनका नाम बताया जाता है जो सबको सुनाई नहीं देता. जब एक पत्रकार दोबारा नाम पूछता है तो एक पुलिसकर्मी कहता है: “सबको थोड़ी बताएंगे… नाम बता दिया, उनसे सुन लीजिए।”
मोदी काल में सरकार, जनप्रतिनिधियों, प्रशासन, पुलिस एवं स्वायत्त संस्थाओं को कुछ भी करने और जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ने की जो सहूलियत मिली है, यह वाकया उसका पूख्ता प्रमाण है।
एक अन्य वीडियो में अजित अंजुम एक दूसरे पुलिस अधिकारी को फ्रीडम का पाठ पढ़ाते हैं जब वह अपनी खुद की फ्रीडम की आड़ में पत्रकारों को डांट लगाता है।
पुलिस अधिकारी: हमारी भी कोई फ्रीडम होती होगी ना, मुंह के ऊपर (माइक) कैसे लगा देते हो यार?… (क्या) हमने बोला है आपको कि हमारे मुंह पे (माइक) लगाओ?
अजित अंजुम: … आप जबरन धक्का देकर लोगों को उठा के ले गए… (क्या) ये फ्रीडम होता है पुलिस का?… चलिए, लेकिन हां, यह मैं कहूंगा कि आपको यही निर्देश होगा अमित शाह से। जो निर्देश है, वही आप कर रहे हो, लेकिन फ्रीडम की दुहाई मत दो…


