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टीवी पर ब्रेकिंग न्यूज़ देखने कौन आता है? प्रसार भारती CEO गौरव द्विवेदी ने बदलते न्यूज़ कारोबार का खोल दिया राज

बोले- दर्शक को अब सिर्फ खबर नहीं, उसका संदर्भ चाहिए; सुधीर चौधरी का शो ‘सैलरी’ पर नहीं, प्रोडक्शन एंगेजमेंट मॉडल पर

टेलीविजन न्यूज का वह दौर, जब किसी बड़ी घटना की “ब्रेकिंग” सबसे बड़ी खबर हुआ करती थी, तेजी से पीछे छूट रहा है। मोबाइल फोन, सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म ने दर्शक तक खबर पहुंचने की रफ्तार इतनी बढ़ा दी है कि टीवी चैनल पर वही खबर दोबारा ब्रेक करने का आकर्षण पहले जैसा नहीं रहा।

प्रसार भारती के CEO गौरव द्विवेदी ने FICCI Frames 2026 में न्यूज मीडिया के बदलते मिजाज पर बात करते हुए इसी बदलाव की ओर इशारा किया। उनका कहना है कि आज दर्शक ब्रेकिंग न्यूज जानने के लिए जरूरी नहीं कि टीवी की तरफ आए। वह खबर उसे पहले ही मोबाइल और डिजिटल प्लेटफॉर्म पर मिल चुकी होती है। टीवी के लिए अब ज्यादा महत्वपूर्ण भूमिका खबर के context, explanation और ground reporting की बनती जा रही है। 

यह टिप्पणी इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि भारत का टेलीविजन न्यूज कारोबार लंबे समय से “सबसे पहले खबर” और “सबसे तेज ब्रेकिंग” की प्रतिस्पर्धा पर टिका रहा है। लेकिन अब जब सोशल मीडिया पर घटना होते ही वीडियो, पोस्ट और अपडेट सामने आने लगते हैं, तब टीवी चैनल के सामने सवाल सिर्फ यह नहीं है कि खबर सबसे पहले कौन बताएगा, बल्कि यह है कि खबर को समझाएगा कौन?

यही वह जगह है जहां प्रसार भारती अपने लिए एक अलग भूमिका तलाश रहा है।

ब्रेकिंग से आगे क्यों जाना चाहता है DD News?

द्विवेदी के मुताबिक टीवी न्यूज की उपयोगिता अब केवल तत्काल सूचना देने तक सीमित नहीं रह सकती। देश के अलग-अलग हिस्सों में एक ही दिन में सैकड़ों घटनाएं होती हैं। राष्ट्रीय मीडिया का काम सिर्फ उस एक घटना के इर्द-गिर्द पूरा न्यूज साइकल खड़ा करना नहीं, बल्कि देश के विभिन्न हिस्सों की तस्वीर सामने लाना भी है। 

प्रसार भारती के पास इस मामले में एक बड़ा संस्थागत नेटवर्क है।

DD News के देशभर में 31 Regional News Units/Bureaus हैं। इनके जरिए 22 से ज्यादा भाषाओं और बोलियों में प्रतिदिन 145 से अधिक बुलेटिन तैयार किए जाते हैं। प्रसार भारती के मुताबिक नेटवर्क में 900 से ज्यादा stringers भी काम कर रहे हैं। 

यानी प्रसार भारती के पास एक ऐसा रिपोर्टिंग नेटवर्क है जिसकी पहुंच दिल्ली-मुंबई जैसे बड़े मीडिया केंद्रों से कहीं आगे गांव, जिले और छोटे शहरों तक जाती है।

अब चुनौती इस नेटवर्क से निकलने वाली सामग्री को सिर्फ DD News और Akashvani तक सीमित रखने की नहीं, बल्कि दूसरे मीडिया संस्थानों तक पहुंचाने की भी है।

यहीं से PB-SHABD की कहानी शुरू होती है।

PB-SHABD: प्रसार भारती का मुफ्त न्यूज़ वायर

PB-SHABD यानी Prasar Bharati – Shared Audio-Visuals for Broadcast and Dissemination को मार्च 2024 में लॉन्च किया गया था।

यह मूल रूप से प्रसार भारती की अपनी समाचार-संग्रहण क्षमता को दूसरे मीडिया संगठनों के लिए उपलब्ध कराने की व्यवस्था है। इसके जरिए समाचार संस्थानों को टेक्स्ट, वीडियो, ऑडियो, फोटो और इन्फोग्राफिक्स के रूप में खबरें मिलती हैं। 

सबसे महत्वपूर्ण बात—यह सेवा फिलहाल मुफ्त है।

PB-SHABD की आधिकारिक FAQ के मुताबिक भारत में RNI प्रमाणपत्र वाले अखबार, वैध uplink/downlink certificate वाले टीवी और रेडियो संस्थान तथा PAN के जरिए पंजीकृत डिजिटल पब्लिशर इसका इस्तेमाल कर सकते हैं। प्रत्येक पंजीकृत संगठन को एक लॉगिन मिलता है, जिसे उसके न्यूज़रूम में काम करने वाले पत्रकारों के बीच साझा किया जा सकता है। इसके लिए कोई subscription fee नहीं है। 

मार्च 2026 में सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने भी घोषणा की थी कि PB-SHABD की मुफ्त सुविधा मार्च 2027 तक जारी रहेगी। 

कितनी बड़ी है PB-SHABD की पहुंच?

सितंबर 2026 की DD India की रिपोर्ट के मुताबिक PB-SHABD का इस्तेमाल लगभग 3,600 मीडिया संगठनों तक पहुंच चुका है। FICCI Frames में गौरव द्विवेदी ने यह संख्या लगभग 4,000 मीडिया संगठनों के आसपास बताई। इसलिए खबर में सुरक्षित भाषा होगी—“करीब 3,600 से 4,000 मीडिया संगठन।” 

यहां एक महत्वपूर्ण बात समझने की है।

PB-SHABD केवल बड़ी मीडिया कंपनियों के लिए नहीं है। इसका एक बड़ा उद्देश्य छोटे और क्षेत्रीय मीडिया संस्थानों को ऐसी खबर और विजुअल सामग्री उपलब्ध कराना है जिसके लिए उन्हें खुद दिल्ली, मुंबई या देश के दूसरे हिस्सों में अलग-अलग रिपोर्टर रखने पड़ सकते हैं।

मसलन किसी छोटे शहर का डिजिटल न्यूज पोर्टल दिल्ली की किसी प्रेस कॉन्फ्रेंस की खबर, किसी राष्ट्रीय घटना का वीडियो या किसी सरकारी कार्यक्रम की तस्वीर अपने न्यूज़रूम से तैयार नहीं कर सकता। PB-SHABD उसे यह सामग्री उपलब्ध करा सकता है।

और वह भी बिना लोगो और बिना अनिवार्य credit line के। PIB के अनुसार PB-SHABD की सामग्री logo-free है और उसके इस्तेमाल पर credit देना आवश्यक नहीं है। 

यह छोटी बात नहीं है। इसका अर्थ है कि कोई छोटा प्रकाशन या डिजिटल प्लेटफॉर्म प्रसार भारती के व्यापक नेटवर्क से मिली सामग्री को अपने प्लेटफॉर्म पर अपने समाचार उत्पाद का हिस्सा बना सकता है।

1,500 से ज्यादा रिपोर्टर, 60 एडिट डेस्क और रोजाना 1,000 से ज्यादा स्टोरी

PB-SHABD की ताकत सिर्फ तकनीकी प्लेटफॉर्म नहीं है। उसके पीछे प्रसार भारती का विशाल न्यूज नेटवर्क है।

PIB के अनुसार इसके पीछे 1,500 से ज्यादा reporters, correspondents और stringers हैं तथा 60 dedicated edit desks चौबीसों घंटे काम करते हैं। रोजाना करीब 1,000 समाचार सामग्री विभिन्न भाषाओं और formats में उपलब्ध कराई जाती है। 

PB-SHABD में राष्ट्रीय खबरों के साथ कृषि, टेक्नोलॉजी, विदेश, राजनीति और विभिन्न क्षेत्रीय विषयों की सामग्री उपलब्ध होती है। इसके अलावा live feeds, archive, interviews, special packages और मौसम जैसी सामग्री भी उपलब्ध कराई जाती है। 

इस मॉडल को अगर व्यापक मीडिया कारोबार की भाषा में देखें तो प्रसार भारती एक तरह से अपनी विशाल editorial infrastructure को shared news resource में बदल रहा है।

टीवी बनाम मोबाइल नहीं, टीवी की भूमिका बदल रही है

गौरव द्विवेदी की बात का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा शायद यही है।

यह कहना कि “लोग टीवी देखना छोड़ चुके हैं” इस बदलाव को बहुत सरल बना देना होगा। टीवी अभी भी बड़े राष्ट्रीय घटनाक्रम, लाइव कवरेज और prime-time programming का महत्वपूर्ण माध्यम है। लेकिन breaking news का monopoly टीवी के पास नहीं रहा।

मोबाइल ने सूचना की पहली खिड़की छीन ली है।

अब टीवी को दूसरी भूमिका तलाशनी पड़ रही है।

पहली सूचना से ज्यादा संदर्भ।
सबसे पहले खबर से ज्यादा विश्वसनीय खबर।
वीडियो दोहराने से ज्यादा ground report।
शोर से ज्यादा explanation।

प्रसार भारती की रणनीति में PB-SHABD और उसका विशाल regional reporting network इसी दिशा में उपयोगी साबित हो सकता है।

AI भी आएगा, लेकिन खबर की जिम्मेदारी इंसान की

FICCI Frames की चर्चा में AI का मुद्दा भी आया। प्रसार भारती AI को translation और graphics जैसे कामों में इस्तेमाल कर रहा है, लेकिन AI-generated content को स्पष्ट रूप से label करने पर जोर दिया गया। 

यह आने वाले समय के लिए महत्वपूर्ण संकेत है।

क्योंकि AI के कारण news production की लागत कम हो सकती है, कई भाषाओं में सामग्री तेजी से तैयार हो सकती है और वीडियो-ग्राफिक्स भी तेजी से बन सकते हैं। लेकिन यदि मूल सूचना ही गलत हो तो AI उसकी गति बढ़ा देगा, सत्यता नहीं।

इसलिए प्रसार भारती का मॉडल फिलहाल एक दिलचस्प त्रिकोण बनाता दिखाई देता है—

मैदान में रिपोर्टर → न्यूज़रूम में संपादन/सत्यापन → AI और डिजिटल तकनीक से तेज वितरण।

असली मुकाबला अब “सबसे पहले” का नहीं, “सबसे भरोसेमंद और उपयोगी” का?

यही इस पूरी कहानी का सबसे बड़ा मीडिया-business angle है। दर्शक को खबर अब हर जगह मिल रही है। Google, YouTube, Instagram, X, WhatsApp, न्यूज वेबसाइट और टीवी—हर जगह सूचना का प्रवाह है।

इस स्थिति में किसी मीडिया संस्थान की असली संपत्ति केवल “खबर देने की गति” नहीं रह जाती।

उसकी संपत्ति बनती है—

रिपोर्टिंग नेटवर्क, विश्वसनीयता, संदर्भ देने की क्षमता, एक्सप्लेनर पत्रकारिता और अपनी ऑडियंस।

प्रसार भारती के पास इनमें से सबसे बड़ी चीजों में से एक—देशव्यापी रिपोर्टिंग नेटवर्क—पहले से मौजूद है।

PB-SHABD उस नेटवर्क को हजारों दूसरे मीडिया संस्थानों तक पहुंचाने का माध्यम बन चुका है।

और अगर गौरव द्विवेदी की बात को भविष्य के संकेत के तौर पर पढ़ें तो प्रसार भारती अब सिर्फ यह नहीं पूछ रहा कि “ब्रेकिंग खबर कौन देगा?”

सवाल शायद यह बन रहा है—

“जब खबर हर मोबाइल स्क्रीन पर पहले से मौजूद है, तब दर्शक टीवी पर वापस किसलिए आएगा?”

इसका जवाब प्रसार भारती context, ground reporting, credibility और deeper programming में तलाश रहा है।

और PB-SHABD इस रणनीति का शायद सबसे कम चर्चित लेकिन सबसे बड़ा हिस्सा है।

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