प्रभात खबर अखबार के ब्लॉक से लेकर जिला तक के रिपोर्टर, तमाम संपादक सिर्फ एक ही काम में लगे है वो है एप डाउनलोडिंग।
कंपनी ने इस काम में स्ट्रिंगर, स्टेट हेड, नेशनल हेड सहित तमाम खबरों के वीरों को युद्ध स्तर पर लगा दिया है।
एक दिन में एक रिपोर्टर को कम से कम 5 एप डाउनलोड करने का निर्देश प्राप्त है। रोज रात को लिस्ट आ रही है कि किसने कितना एप आज डाउनलोड किया। जो नहीं कर रहे उसे संस्थान से निकालने की रोज धमकी मिल रही है।
धमकी उस रिपोर्टर को भी मिल रही है जो दो -चार हजार कि तनख्वाह में ब्लाक रिपोर्टिंग कर रहे हैं और दिनरात मेहनत कर संस्थान पर पहले से ही उपकार कर रहे हैं।
अभी बड़ी खबर छूटने पर, स्टोरी प्लान, खबरों में तथ्य व साइड एंगल कम होने पर कोई सवाल नहीं है बस एक ही सवाल है आज कितना एप डाउनलोड हुआ।
रिपोर्टर की ऐसी स्थिति है कि वो जिसे प्रभातखबर का एप डाउनलोड करने कहते वो व्यक्ति अगले दिन से रिपोर्टर का फोन तक नहीं उठाते हैं। इस चक्कर में अच्छे रिश्ते खराब हो रहे हैं। पत्रकारों को एप डाउनलोड कराने व करने कहने में भारी बेइज्जती हो रही है।
कई लोगों का तो मोबाइल जबर्दस्ती हाथ में लेकर खुद से डाउनलोड करना पड़ रहा है ताकि आकड़ा कमजोर न पड़े।
जिस दिन आंकडा कमजोर पड़ता है तुरंत भगाने का डर दिखा दिया जाता है। रिपोर्टर का मुल्यांकन खबरों से नहीं, विज्ञापन से भी नहीं अब एप डाउनलोड से की जा रही हैं।
इस चक्कर में कई रिपोर्टर ने संस्थान छोड़ दिया, कई हटा दिए गए तो कई छोड़ने के चक्कर में है।
हालांकि आजकल पत्रकार मिलता कहाँ है, जहां जगह खाली हुआ है वहां नये यूट्यूबरों, जिसे खबरों का कोई ज्ञान व समझ नहीं है, अच्छी शिक्षा दीक्षा, संस्कार नहीं है, उसे पकड़कर लाया जा रहा है और भर्ती किया जा रहा है।
हालांकि वो भी एप डाउनलोड में तो फेल हो ही रहे हैं, खबरों व विज्ञापनों में भी अत्यंत पिछड़ रहे हैं। इस चक्कर में अच्छे पत्रकारों को संस्थान आएदिन खो रहा है।
(एक पत्रकार द्वारा भेजे गए मेल पर आधारित)


