वरिष्ठ पत्रकार और लिविंग इंडिया न्यूज के प्रबंध निदेशक अतुल अग्रवाल समेत पांच पत्रकारों की गिरफ्तारी ने मीडिया जगत में सवाल खड़े कर दिए हैं। अतुल अग्रवाल कहां हैं और उन्हें कहां रखा गया है? क्या उनकी सुरक्षा को लेकर कोई चिंता है? हरियाणा पुलिस को इन सवालों पर स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।
भड़ास4मीडिया की 13 अक्टूबर की रिपोर्ट में पत्रकार प्रज्ञा मिश्रा ने हरियाणा पुलिस से सवाल किया है कि अतुल अग्रवाल पिछले चार दिनों से कहां हैं और उन्हें कहां रखा गया है। उन्होंने मामले में कथित दबाव की आशंका की निष्पक्ष जांच की मांग भी की है। हालांकि, किसी ड्रग माफिया या अन्य व्यक्ति के दबाव में कार्रवाई होने का कोई पुष्ट प्रमाण फिलहाल सार्वजनिक नहीं है।
अतुल अग्रवाल समेत पांच लोग गिरफ्तार
कुरुक्षेत्र पुलिस ने लिविंग इंडिया न्यूज से जुड़े पांच लोगों को गिरफ्तार किया है। इनमें प्रबंध निदेशक अतुल अग्रवाल, संपादक सौरभ, एंकर सुदेश नैन मोर, पत्रकार नीतू और लवप्रीत शामिल हैं।
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, 11 अक्टूबर को पांचों को अदालत में पेश किया गया। अदालत ने अतुल अग्रवाल और नीतू को चार दिन, सौरभ और सुदेश नैन मोर को तीन दिन तथा लवप्रीत को एक दिन की पुलिस रिमांड पर भेजा। इस जानकारी के मुताबिक, अतुल को पुलिस रिमांड पर भेजा गया था, लेकिन उन्हें किस सटीक स्थान पर रखा गया है, इसकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।
नशे के खिलाफ खबर और पुलिस की कार्रवाई के बीच क्या संबंध है?
इस मामले में दो अलग-अलग दावे सामने आए हैं। चैनल की ओर से कार्रवाई को हरियाणा में नशे के कारोबार के खिलाफ खबरें प्रसारित करने से जोड़कर देखा गया है। पत्रकार नवीन रमण ने भी आरोप लगाया है कि कुरुक्षेत्र में भाजपा नेता और पूर्व मंत्री सुभाष सुधा के मॉल में कथित नशेबाजी से जुड़ी खबर दिखाने के बाद पत्रकारों के खिलाफ कार्रवाई हुई। इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
दूसरी ओर, कुरुक्षेत्र पुलिस के मुताबिक, मामला 16 अप्रैल 2026 को रिकॉर्ड किए गए एक पुराने निजी वीडियो को कथित तौर पर फर्जी लाइव स्टिंग ऑपरेशन के रूप में प्रसारित करने से जुड़ा है। शिकायतकर्ता ने वीडियो की सच्चाई उजागर नहीं करने के नाम पर ब्लैकमेल किए जाने का आरोप भी लगाया है। पुलिस ने शिकायत के आधार पर थाना सिटी थानेसर में आईटी एक्ट और भारतीय न्याय संहिता की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है। पुलिस का कहना है कि वीडियो और अन्य तकनीकी साक्ष्यों की जांच की जा रही है।
इसलिए यह कहना कि पत्रकारों की गिरफ्तारी केवल नशे के खिलाफ खबर चलाने के कारण हुई, अभी उपलब्ध तथ्यों से निर्णायक रूप से साबित नहीं होता। इसी तरह, पुलिस की ओर से लगाए गए आरोप भी अदालत में साबित होने बाकी हैं।
पुलिस को इन सवालों का जवाब देना चाहिए
अतुल अग्रवाल इस समय कहां हैं? क्या वह कुरुक्षेत्र पुलिस की हिरासत में हैं और उनकी सुरक्षा सुनिश्चित है? अदालत से मिली रिमांड की अवधि और शर्तें क्या हैं? क्या पुलिस ने स्पष्ट किया है कि पुराने वीडियो से जुड़े मामले और नशे के खिलाफ प्रसारित खबर के बीच कोई संबंध है या नहीं?
ये ऐसे सवाल हैं जिनका जवाब तथ्यों और आधिकारिक जानकारी के आधार पर दिया जाना चाहिए। यदि कार्रवाई शिकायत और उपलब्ध साक्ष्यों पर आधारित है, तो पुलिस को उसका कानूनी आधार स्पष्ट करना चाहिए। यदि पत्रकारों की आशंका है कि खबरों के कारण उन्हें निशाना बनाया गया, तो उस आरोप की भी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
पत्रकारिता कानून से ऊपर नहीं है, लेकिन पत्रकारों के खिलाफ कार्रवाई भी पारदर्शी और कानून के अनुरूप होनी चाहिए। नशे के कारोबार पर खबर चलाना अपने आप में अपराध नहीं है। अगर किसी प्रसारण में कानून का उल्लंघन हुआ है, तो उसका फैसला साक्ष्यों और न्यायिक प्रक्रिया से होना चाहिए, न कि आरोपों को ही अंतिम सत्य मानकर।
अतुल अग्रवाल समेत पांच पत्रकारों की गिरफ्तारी के मामले में अब सबसे जरूरी है कि पुलिस उनकी हिरासत की स्थिति, कानूनी आधार और जांच की प्रगति को लेकर स्पष्ट जानकारी दे। सवाल पूछना पत्रकारिता का काम है और उन सवालों का जवाब देना संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही।
आखिर अतुल अग्रवाल कहां हैं? उन्हें कहां रखा गया है?
नशे के खिलाफ ख़बर चलाना क्या इतना बड़ा अपराध है?
ये तो हद है। जो आपके खिलाफ खबर करेगा, उसे आप नेस्तनाबूद करने पर उतर आएंगे?
क्या पत्रकार ही कानून व्यवस्था के लिए सबसे बड़ा ख़तरा बन चुके हैं?
-अभिषेक उपाध्याय, वरिष्ठ पत्रकार
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