रोहित रमण पांडे-
शराब और दिल की कहानी एक ऐसी प्रेम कहानी है जिसका अंत अक्सर बुरा ही होता है।
बहुत से लोग यह तर्क देते हैं कि “थोड़ी सी शराब दिल के लिए अच्छी है।” लेकिन एक डॉक्टर के तौर पर मैं आपको इसकी कड़वी हकीकत बताता हूँ—शराब आपके दिल के लिए वह ‘लुब्रिकेंट’ है जो धीरे-धीरे इंजन को ही जाम कर देता है।
- दिल पर सीधा हमला (Alcoholic Cardiomyopathy):
भारी मात्रा में पीने से दिल की मांसपेशियां कमज़ोर होकर खिंचने लगती हैं। दिल का आकार बढ़ जाता है, दीवारें पतली हो जाती हैं और उसकी पंप करने की ताकत खत्म होने लगती है। शराब में मौजूद टॉक्सिन्स दिल की कोशिकाओं को तबाह कर देते हैं, जिससे हार्ट फेलियर का असली खतरा पैदा होता है।
- धड़कनों का विद्रोह और ब्लड प्रेशर:
शराब दिल के इलेक्ट्रिकल सिस्टम को बिगाड़ देती है, जिससे धड़कनें अचानक बेकाबू (Atrial Fibrillation) हो जाती हैं। इसके साथ ही, शराब नसों को उत्तेजित करती है, जिससे आपका बीपी (BP) लगातार बढ़ा रहता है।
- सबसे बड़ा सच: ‘कैंसर’ का खतरा (WHO की चेतावनी):
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) अब साफ़ कहता है—शराब की कोई भी मात्रा सेहत के लिए पूरी तरह सुरक्षित नहीं है। शराब (एथेनॉल) को उसी श्रेणी (Group 1 Carcinogen) में रखा गया है जिसमें तंबाकू और एस्बेस्टस हैं।
यह शरीर में जाकर एसीटैल्डिहाइड (Acetaldehyde) जैसा ज़हरीला तत्व बनाती है, जो हमारे DNA को नुकसान पहुँचाता है। यह कम से कम 7 तरह के कैंसर का कारण बनती है, जिसमें ब्रेस्ट कैंसर, लिवर, मुँह, गले और पेट का कैंसर शामिल है।
बड़ा सवाल: क्या ‘थोड़ी’ शराब वाकई फायदेमंद है?
कुछ स्टडीज़ कम मात्रा में फायदे की बात करती हैं, लेकिन वह फायदा इतना छोटा है कि कैंसर और लिवर की बीमारी के बड़े जोखिमों के सामने उसकी कोई कीमत नहीं है। मेडिकल डेटा कभी भी दिल की सेहत के लिए शराब पीना ‘शुरू’ करने की सलाह नहीं देता।
आपका दिल और शरीर शराब को कुछ समय तक तो झेल सकते हैं, लेकिन फिर वे जवाब देने लगते हैं। अगर शुरुआती स्टेज में ही शराब छोड़ दी जाए, तो शरीर रिकवर कर सकता है। लेकिन एक बार कोशिकाएं बुरी तरह ज़ख्मी हो गईं, तो वापसी मुश्किल है।
गाड़ी का इंजन बदल सकता है, लेकिन यह कुदरती पंप और शरीर दोबारा नहीं मिलेगा। इसे ज़हर से बचाकर रखिए। बाकी सब प्रभु की माया है।

