Connect with us

Hi, what are you looking for?

दिल्ली

अमित शाह जी, क्या आपने प्रोटेस्ट कवर कर रहे पत्रकारों को डिटेन करने का आदेश दिया है?

भारतीय जनता पार्टी की मोदी सरकार ने देश को गृहयुद्ध जैसे हालातों की तरफ मोड़ दिया है। प्रदर्शन, दमन और हजारों गिरफ्तारियों का संदेश भारत से बाहर निकलकर दूसरे मुल्कों तक पहुंच रहा है। प्रदर्शन में न सिर्फ सामाजिक कार्यकर्ताओं, विपक्ष और स्वतंत्र पत्रकारों को भी निशाना बनाया जा रहा है। नीचे पढ़िए अब तक क्या हुआ…

Front page of a Hindi newspaper with a large bold headline about a court case and protests, showing police and a restrained person in the main image.

नई दिल्ली। मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) में कथित अनियमितताओं को लेकर मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन कर रही कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने आंदोलन जारी रखने का ऐलान किया है। दिल्ली में जंतर-मंतर की ओर जाने से प्रदर्शनकारियों को रोकने और बड़ी संख्या में लोगों को हिरासत में लिए जाने के एक दिन बाद पार्टी ने शांतिपूर्ण प्रदर्शन के लिए दिल्ली पुलिस से तारीख मांगने का फैसला किया है।

CJP के नेता आशुतोष रंका ने रविवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर बताया कि वह सोमवार सुबह 10 बजे सौरव दास, रत्ना सिंह और पार्टी के अन्य नेताओं के साथ पार्लियामेंट स्ट्रीट पुलिस स्टेशन जाएंगे। वहां वे जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन की अनुमति के लिए तारीख मांगेंगे।

रंका ने कहा कि दिल्ली पुलिस 24 घंटे के भीतर प्रदर्शन के लिए तारीख दे सकती है, अन्यथा पार्टी खुद प्रदर्शन का अगला कार्यक्रम घोषित करेगी।

केंद्र सरकार पर साधा निशाना

CJP नेताओं ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर केंद्र सरकार और दिल्ली में सुरक्षा व्यवस्था की आलोचना की। नेताओं ने आरोप लगाया कि शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन को रोकने के लिए राजधानी में युद्ध जैसे हालात बना दिए गए। उन्होंने कहा कि ऐसी स्थिति पैदा होने पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को शर्म आनी चाहिए।

शनिवार को चुनाव आयोग के खिलाफ प्रदर्शन के दौरान दिल्ली में भारी सुरक्षा व्यवस्था की गई थी। प्रदर्शनकारियों को जंतर-मंतर तक पहुंचने से रोक दिया गया। पार्टी के मुताबिक, मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण में कथित अनियमितताओं के विरोध में यह प्रदर्शन आयोजित किया गया था। प्रदर्शनकारियों की मांग मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की थी।

CJP के तीन नेता रिहा

CJP के संस्थापक अभिजीत दिपके, आशुतोष रंका और सौरव दास को रविवार को दिल्ली कैंट पुलिस स्टेशन में कार्यकारी मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया गया। इसके बाद तीनों को रिहा कर दिया गया।

पार्टी की कानूनी मामलों की प्रमुख रत्ना सिंह के मुताबिक, मजिस्ट्रेट ने तीनों को इस शर्त पर रिहा किया कि वे एक साल तक शांति भंग नहीं करेंगे।

इन तीनों नेताओं को शनिवार को मुंबई से दिल्ली पहुंचने पर एयर इंडिया की उड़ान के भीतर ही हिरासत में ले लिया गया था। वे जंतर-मंतर पर प्रस्तावित प्रदर्शन में शामिल होने के लिए दिल्ली आए थे।

CJP के संस्थापक अभिजीत दिपके रविवार को राज्यसभा सांसद और वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल के आवास से भी निकले। उन्होंने बताया कि अपनी दादी के निधन के कारण वह वापस घर जा रहे हैं। इस दौरान उन्होंने प्रदर्शन के दौरान दिल्ली में लगाए गए सुरक्षा प्रतिबंधों पर सवाल उठाए। उन्होंने पूछा कि मुख्य चुनाव आयुक्त की सुरक्षा के नाम पर लाखों लोगों को असुविधा क्यों झेलनी पड़ी।

विपक्षी नेता और सामाजिक कार्यकर्ता भी हिरासत में

शनिवार को प्रदर्शन के दौरान दिल्ली पुलिस ने कई विपक्षी नेताओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया। इनमें अरविंद केजरीवाल, ममता बनर्जी, पिनराई विजयन, नेहा बोरा, योगेंद्र यादव और प्रशांत भूषण सहित कई नाम शामिल हैं। सांसद जॉन ब्रिटास और AISA की अध्यक्ष नेहा बोरा को भी हिरासत में लिए जाने की जानकारी सामने आई।

प्रदर्शनकारियों को जंतर-मंतर तक नहीं पहुंचने दिया गया। उपलब्ध रिपोर्ट के मुताबिक, दिल्ली में करीब 6,000 लोगों को हिरासत में लिया गया। हालांकि, इस आंकड़े की स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है।

सुप्रीम कोर्ट ने सामान्य मेट्रो सेवा और इंटरनेट सुनिश्चित करने को कहा

प्रदर्शन के बीच सुप्रीम कोर्ट ने रविवार को केंद्र सरकार को निर्देश दिया कि दिल्ली मेट्रो की सेवाएं सामान्य समय-सारिणी के अनुसार चलती रहें और इंटरनेट सेवाएं निर्बाध बनी रहें। अदालत ने यह भी कहा कि प्रतिबंध संविधान के अनुच्छेद 19(2) के तहत सार्वजनिक व्यवस्था से जुड़ी शर्तों के अनुरूप होने चाहिए।

CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन और पुलिस की कार्रवाई के बीच अब CJP ने शांतिपूर्ण प्रदर्शन के लिए नई तारीख हासिल करने की पहल की है। पार्टी ने संकेत दिया है कि यदि पुलिस निर्धारित समय में तारीख नहीं देती, तो वह खुद आंदोलन का अगला कार्यक्रम घोषित करेगी।


पत्रकारिता पर दबाव

उधर, वरिष्ठ पत्रकार श्रीनिवासन जैन ने दिल्ली में विरोध प्रदर्शन की कवरेज कर रही एक महिला पत्रकार को पुलिस द्वारा हिरासत में लिए जाने पर हैरानी जताई है। एक डिजिटल प्लेटफार्म से बातचीत में जैन ने बताया कि महिला पत्रकार ने अपनी पहचान बताई थी। उसके पास प्रेस कार्ड था और वह माइक लेकर रिपोर्टिंग कर रही थी। इसके बावजूद पुलिस ने उसे हिरासत में ले लिया।

जैन के मुताबिक, मौके पर मौजूद उन्होंने और दूसरे पत्रकारों ने पुलिस की कार्रवाई पर बार-बार आपत्ति जताई, लेकिन पुलिसकर्मी महिला पत्रकार को अपने साथ ले गए। उन्होंने आरोप लगाया कि यह कार्रवाई एक वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी की निगरानी में हुई। जैन ने इस घटना को बेहद चौंकाने वाला और निंदनीय बताया।

यह घटना 11 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट में हुई सुनवाई के कुछ ही घंटों बाद सामने आई। बताया गया है कि सुनवाई के दौरान अदालत ने इस आश्वासन को रिकॉर्ड किया था कि पत्रकारों, वकीलों और अन्य पेशेवरों को अपने कर्तव्यों का निर्वहन करने से नहीं रोका जाएगा।

इस घटनाक्रम ने प्रदर्शन स्थलों पर पत्रकारों की स्वतंत्रता और रिपोर्टिंग के दौरान उनकी सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े किए हैं।


गृह मंत्री अमित शाह जी,
क्या आपने प्रोटेस्ट कवर कर रहे पत्रकारों को डिटेन करने का आदेश दिया है?
-अजीत अंजुम, वरिष्ठ पत्रकार


इंडियन एक्सप्रेस का ट्वीट-

दिल्ली के कनॉट प्लेस में रिपोर्टिंग कर रहे ‘द इंडियन एक्सप्रेस हिंदी’ के तीन पत्रकारों शाश्वत, सिया और विजय को दिल्ली पुलिस ने हिरासत में ले लिया। तीनों पत्रकारों को छत्रसाल स्टेडियम ले जाया गया। बाद में उन्हें रिहा कर दिया गया।

पत्रकारों को हिरासत में लिए जाने की यह घटना ऐसे समय हुई है, जब दिल्ली में विरोध प्रदर्शनों की कवरेज के दौरान पत्रकारों को रोके जाने और हिरासत में लिए जाने की कई घटनाएं सामने आ रही हैं।

Related News…

CosmoQuick: AI Recruitment For Media Jobs
Click to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

भड़ास लीगल टीम : Bhadas Legal Team

भड़ास मेल: [email protected]

Latest 100 भड़ास

विज्ञापन