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साधना ग्रुप के चेयरमैन राकेश गुप्ता का ठग नेटवर्क (पार्ट-2): ठगी का शिकार हुए पत्रकार लोकेंद्र राजपूत से जानिए मास्टरमाइंड पूजा अग्रवाल की भूमिका!

News Hour banner with two side-by-side photos: Rakesh Gupta on the left and Puja Agarwal on the right, Hindi headline above

भड़ास4मीडिया इन्वेस्टिगेशन | ईडी ने 168 करोड़ रुपये के मनी लॉन्ड्रिंग मामले में साधना ब्रॉडकास्ट लिमिटेड के चेयरमैन राकेश कुमार गुप्ता को भले ही दबोच लिया हो, लेकिन उसके गुनाहों की परतें अब एक एक कर खुल रही हैं। हालिया गिरफ्तारी में आरोप है कि गुप्ता ने क्रिप्टोकरेंसी और हवाला के जरिए करोड़ों की रकम डकारी है। इसके अलावा उसने चैनल बेचने और उसकी फ्रेंचाइजी देने के नाम पर भी कई राज्यों में लोगों को बड़ा चूना लगाया है। और उसके इस काम में शामिल है उसकी डायरेक्टर पत्नी पूजा अग्रवाल और बेटा गौरव गुप्ता।

लोकेंद्र राजपूत के 26 लाख का प्रकरण

इस पूरे प्रकरण में मध्य प्रदेश के भोपाल निवासी लोकेंद्र राजपूत का मामला भी सामने आया है। उपलब्ध इनपुट के अनुसार, आरोप है कि राकेश कुमार गुप्ता ने मोटी रकम लेकर उन्हें साधना समूह के चैनल ‘न्यूज़ ऑवर’ को चलाने की जिम्मेदारी दी थी।

लोकेंद्र राजपूत का आरोप है कि चैनल चलने के बाद उनसे यह कहते हुए चैनल वापस ले लिया गया कि उन्हें इसके बदले दूसरा चैनल दिया जाएगा। दावा है कि इस व्यवस्था के तहत लोकेंद्र ने जो 26 लाख रुपये दिए थे, वे उन्हें वापस नहीं मिले।

बताया गया है कि लोकेंद्र राजपूत ने इस मामले में केंद्र सरकार के स्तर पर भी शिकायत की है। शिकायत की प्रति, उसकी तारीख, संबंधित विभाग की कार्रवाई और दोनों पक्षों के बीच हुए समझौते की जांच से मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकती है।

यह भी महत्वपूर्ण है कि चैनल के संचालन, प्रबंधन, फ्रेंचाइजी और कानूनी स्वामित्व के बीच अंतर होता है। इसलिए यह पता लगाना जरूरी है कि लोकेंद्र राजपूत को किस हैसियत से चैनल सौंपा गया था, समझौते में क्या शर्तें थीं और बाद में चैनल वापस लेने का आधार क्या बताया गया।

राकेश गुप्ता की पत्नी पूजा अग्रवाल की भूमिका पर भी आरोप

भड़ास4मीडिया को मिले इनपुट में राकेश कुमार गुप्ता की पत्नी पूजा अग्रवाल की भूमिका को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। इनपुट में उन्हें समूह की डायरेक्टर बताया गया है और आरोप है कि कथित लेनदेन में उनकी सक्रिय भूमिका रहती है। कुछ शिकायतकर्ताओं की ओर से उन पर भी गंभीर आरोप लगाए जाने की बात कही गई है।

हालांकि, केवल पद या पारिवारिक संबंध के आधार पर किसी व्यक्ति की कथित धोखाधड़ी में भूमिका तय नहीं की जा सकती। यह स्पष्ट होना चाहिए कि संबंधित समझौतों पर किसके हस्ताक्षर हैं, रकम किन खातों में गई, कारोबारी निर्णय किसने लिए और शिकायतों में किसकी भूमिका का उल्लेख है। इन दस्तावेजों के बिना किसी व्यक्ति को कथित जालसाजी का मास्टरमाइंड कहना उचित नहीं होगा।

शेयर घोटाले के आरोपों से अलग जांच का सवाल

इनपुट में साधना समूह से जुड़े कथित शेयर घोटाले का भी उल्लेख किया गया है। हालांकि, इस मामले के विशिष्ट दस्तावेज, नियामकीय आदेश या जांच का विवरण उपलब्ध नहीं है। इसलिए शेयर संबंधी आरोपों और चैनलों के कथित लेनदेन को अलग-अलग तथ्यों के आधार पर जांचना होगा।

चैनल दिलाने के नाम पर रकम लेने के आरोपों में सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि क्या संबंधित लोगों को लिखित समझौते के तहत चैनल या उसके अधिकार देने का भरोसा दिया गया था? क्या रकम कंपनी के खाते में जमा हुई या किसी व्यक्ति के खाते में? क्या भुगतान की रसीदें मौजूद हैं? क्या चैनल का नियंत्रण किसी दूसरे व्यक्ति को सौंप दिया गया? और रकम वापस मांगने पर क्या जवाब दिया गया?

इन सवालों के जवाब शिकायतकर्ताओं के दस्तावेजों, कंपनी के रिकॉर्ड और संबंधित नियामकीय प्राधिकरणों की जानकारी से ही मिल सकते हैं।

अब जवाब और दस्तावेजों की जरूरत

भड़ास4मीडिया को मिले इनपुट में अलग-अलग लोगों के लाखों और करोड़ों रुपये फंसे होने के दावे सामने आए हैं। लोकेंद्र राजपूत के 26 लाख रुपये और उत्तर प्रदेश के एक ब्यूरो चीफ के 16 लाख रुपये से संबंधित दावे विशेष रूप से जांच की मांग करते हैं। अन्य लोगों के कथित भुगतान और समझौतों की भी अलग-अलग पुष्टि की जानी चाहिए।

यदि शिकायतकर्ताओं के पास भुगतान के प्रमाण, अनुबंध, बैंक रिकॉर्ड, व्हाट्सएप बातचीत, कानूनी नोटिस या सरकारी शिकायतों की प्रतियां हैं, तो वे इन दावों की जांच में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं। संपर्क करें- [email protected]

(पार्ट-1): साधना ग्रुप पर चैनल दिलाने के नाम पर करोड़ों की वसूली के आरोप, पूर्व ब्यूरो चीफ ने खोला राकेश गुप्ता का ठग नेटवर्क!

भड़ास4मीडिया इस प्रकरण के अगले पार्ट में और पीड़ितों के नाम और संबंधित दस्तावेजों का खुलासा करेगा। पढ़ते रहिए…

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