बिहार के अररिया जिले में खाद की कथित तौर पर अधिक कीमत वसूले जाने का मामला उठाने वाले डिजिटल पत्रकार मोईद आलम को जेल भेजे जाने का मामला सामने आया है। जोकीहाट में 266 रुपये निर्धारित कीमत वाली खाद कथित तौर पर 400 रुपये में बेचे जाने का मुद्दा उठाने के बाद पत्रकार कानूनी विवाद में घिर गए हैं। दूसरी ओर, फोर्ब्सगंज के एक खाद कारोबारी ने उन पर 12 लाख रुपये की जबरन वसूली और धमकी देने का आरोप लगाया है।
द ऑब्जर्वर पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक, फोर्ब्सगंज में बीज और खाद का कारोबार करने वाली गणेश ट्रेडिंग के संचालक पीयूष अग्रवाल ने मोईद आलम के खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है। कारोबारी का आरोप है कि 12 अक्टूबर को पत्रकार उनकी दुकान पर पहुंचे थे। इस दौरान उन्होंने खाद की बिक्री में इस्तेमाल होने वाली पीओएस मशीन के बारे में जानकारी मांगी और दुकान का वीडियो बनाया। बाद में यह वीडियो सोशल मीडिया पर प्रसारित किया गया।
शिकायत में पीयूष अग्रवाल ने दावा किया कि वीडियो प्रसारित होने से उनके कारोबार की छवि को नुकसान पहुंचा। उन्होंने आरोप लगाया कि मोईद आलम बाद में दोबारा दुकान पर आए और 12 लाख रुपये की मांग की। कारोबारी के मुताबिक, रकम नहीं देने पर उन्हें जान से मारने की धमकी भी दी गई।
फोर्ब्सगंज थाने के प्रभारी मनोज कुमार के मुताबिक, कारोबारी की शिकायत के आधार पर प्राथमिकी दर्ज की गई है और मामले की जांच की जा रही है। पुलिस का कहना है कि जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
266 रुपये की खाद 400 रुपये में बेचने का आरोप
इस पूरे मामले का दूसरा पहलू जोकीहाट में खाद की कथित अधिक कीमत वसूले जाने से जुड़ा है। रिपोर्ट के मुताबिक, मोईद आलम ने क्षेत्र में निर्धारित कीमत से अधिक दाम पर खाद बेचे जाने का मुद्दा उठाया था। आरोप है कि 266 रुपये की कीमत वाली खाद किसानों को 400 रुपये में बेची जा रही थी।
इस मुद्दे ने खाद की बिक्री में कथित अनियमितताओं और किसानों से अधिक पैसे वसूले जाने को लेकर सवाल खड़े किए हैं। हालांकि, निर्धारित कीमत से अधिक वसूली के आरोपों पर प्रशासन की कार्रवाई और जांच के निष्कर्षों की विस्तृत जानकारी सामने आना बाकी है।
मोईद आलम को जेल भेजे जाने की खबर के बाद सोशल मीडिया पर भी प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। कुछ लोगों ने पत्रकार के समर्थन में आवाज उठाते हुए उनकी रिहाई की मांग की है।
फिलहाल, कारोबारी की ओर से लगाए गए जबरन वसूली और धमकी के आरोपों की जांच जारी है। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। ऐसे में मामले के दोनों पहलुओं की निष्पक्ष जांच जरूरी है—एक तरफ पत्रकार पर लगाए गए आरोप और दूसरी तरफ खाद की कथित अधिक कीमत वसूले जाने का मुद्दा, जिसे उन्होंने अपनी रिपोर्टिंग के जरिए उठाया था।

