शेयर बाज़ार में सूचीबद्ध डिजिटल मीडिया कंपनी क्विंट डिजिटल लिमिटेड पिछले साल के मुनाफ़े से इस साल घाटे में आ गई है। 19 अक्टूबर को कंपनी ने अप्रैल–सितंबर 2026 की छमाही के नतीजे दाखिल किए।
कंसोलिडेटेड आधार पर छमाही में कंपनी की ऑपरेशंस से कमाई ₹71.57 करोड़ रही, जो पिछले साल इसी अवधि में ₹15.78 करोड़ थी। लेकिन इसी दौरान कंपनी ₹5.83 करोड़ के शुद्ध घाटे में रही, जबकि पिछले साल की पहली छमाही में उसने ₹4.45 करोड़ का मुनाफ़ा कमाया था। छमाही का कुल खर्च ₹87.29 करोड़ रहा, जो पिछले साल ₹24.12 करोड़ था।
सिर्फ़ जुलाई–सितंबर तिमाही देखें तो कमाई ₹7.79 करोड़ से बढ़कर ₹36.78 करोड़ हुई, पर शुद्ध घाटा ₹2.86 करोड़ रहा। सबसे तेज़ उछाल खर्चों में है: कर्मचारियों पर खर्च ₹5.70 करोड़ से बढ़कर ₹18.26 करोड़, ब्याज यानी फ़ाइनेंस कॉस्ट ₹56.90 लाख से बढ़कर ₹5.12 करोड़, और डेप्रिसिएशन ₹1.25 करोड़ से बढ़कर ₹3.96 करोड़ हो गया।
स्टैंडअलोन यानी सिर्फ़ मूल कंपनी के आंकड़े और कमज़ोर हैं। तिमाही में स्टैंडअलोन कमाई ₹1.76 करोड़ से घटकर ₹1.33 करोड़ रह गई और ₹6.51 करोड़ का घाटा हुआ, जबकि पिछले साल इसी तिमाही में ₹80.86 लाख का मुनाफ़ा था। छमाही में स्टैंडअलोन घाटा ₹10.42 करोड़ रहा।
नतीजों से दो दिन पहले, 17 अक्टूबर को, कंपनी ने BSE को यह भी बताया था कि वह Quintype Solutions LLC के दो सर्विस एग्रीमेंट के लिए कुल 50 लाख डॉलर तक की कॉरपोरेट गारंटी देगी, जबकि Quintype में उसकी हिस्सेदारी 10 फ़ीसदी है। कंपनी के मुताबिक इस गारंटी पर फ़िलहाल कोई नकद भुगतान नहीं करना है।
आंकड़े बताते हैं कि क्विंट डिजिटल का कारोबार फैला ज़रूर है, पर साथ में कर्ज़ और स्टाफ़ का बोझ भी कई गुना हुआ है। ब्याज खर्च में करीब नौ गुना बढ़ोतरी किस कर्ज़ से आई और कर्मचारी खर्च में तिगुने से ज़्यादा उछाल किस विस्तार की वजह से है — रिपोर्ट इन सवालों का जवाब नहीं देती।


