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इंडियन एक्सप्रेस का खुलासा : ट्रंप के करीबियों की लॉबिंग फर्म के ज़रिए व्हाइट हाउस तक पहुंच रही थी मोदी सरकार! मई-जून में 8 कॉल्स अरेंज हुईं

हर महीने 1.5 लाख डॉलर की फीस, रुबियो के भारत दौरे से पहले और बाद में बातचीत — अमेरिकी FARA फाइलिंग्स में दर्ज है पूरा ब्यौरा

Front page of The Indian Express reporting eight calls between Delhi and Washington in May–June on US lobbying.

हर महीने 1.5 लाख डॉलर की फीस, रुबियो के भारत दौरे से पहले और बाद में बातचीत — अमेरिकी FARA फाइलिंग्स में दर्ज है पूरा ब्यौरा

दिवाली से ठीक पहले Indian Express ने एक बड़ी खबर छापी है। अखबार की ‘Express Special’ रिपोर्ट (दिव्या ए, नई दिल्ली) के मुताबिक, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सहयोगी जेसन मिलर की अमेरिकी लॉबिंग फर्म SHW Partners LLC ने अपनी ताज़ा फाइलिंग्स में बताया है कि उसने मई-जून 2026 में भारत सरकार और व्हाइट हाउस के वरिष्ठ अधिकारियों के बीच आठ फोन कॉल्स अरेंज कराईं।

ये जानकारी अमेरिका के Foreign Agents Registration Act (FARA) के तहत दी गई है। इस कानून के मुताबिक विदेशी सरकारों के लिए ‘राजनीतिक गतिविधियां’ करने वाले एजेंटों को अपने संबंध, गतिविधियों और मिलने वाले पैसे का समय-समय पर सार्वजनिक खुलासा करना होता है।

अप्रैल 2025 में हायर हुई थी फर्म

भारत ने मिलर की फर्म को अप्रैल 2025 में हायर किया था — यह वही महीना था जब पहलगाम आतंकी हमला हुआ। इसके कुछ ही हफ्तों बाद ऑपरेशन सिंदूर हुआ और ट्रंप भारत-पाकिस्तान संघर्ष पर लगातार बयान देते रहे। अप्रैल 2026 में कॉन्ट्रैक्ट एक साल के लिए रिन्यू भी हुआ, लेकिन 23 जून 2026 को इसे खत्म कर दिया गया, क्योंकि मिलर ट्रंप प्रशासन में ‘स्पेशल गवर्नमेंट एम्प्लॉयी’ बन गए थे।

वॉशिंगटन स्थित भारतीय दूतावास के साथ हुए इस कॉन्ट्रैक्ट में हर महीने 1,50,000 डॉलर की फीस तय थी — यानी साल भर में करीब 18 लाख डॉलर (लगभग 15-16 करोड़ रुपये)। काम के दायरे में अमेरिकी सरकार, कांग्रेस, राज्य सरकारों, थिंक टैंक और शैक्षणिक संस्थानों के सामने नीतिगत मामलों पर रणनीतिक सलाह और ‘गवर्नमेंट रिलेशंस’ मदद शामिल थी।

किन-किन से हुई बात

फाइलिंग्स के मुताबिक मई में विदेश मंत्री मार्को रुबियो के भारत दौरे से पहले भारतीय पक्ष और ट्रेज़री सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट, डिप्टी NSA माइकल नीडहम और आतंकवाद व वित्तीय खुफिया मामलों के अंडर सेक्रेटरी जीन लैंग सहित व्हाइट हाउस के वरिष्ठ अधिकारियों के बीच कॉल्स हुईं। जून में, रुबियो के दौरे के बाद, अमेरिकी ट्रेड रिप्रेजेंटेटिव जेमीसन ग्रीयर, राष्ट्रपति के सहायक (पॉलिसी) वॉकर बैरेट और व्हाइट हाउस कम्युनिकेशंस डायरेक्टर स्टीवन च्युंग से बातचीत हुई।

कंपनी ने 23 और 24 मई को रुबियो के साथ दो ‘एम्बेसी इवेंट्स’ भी दर्ज किए हैं। रुबियो 23 से 26 मई तक भारत में थे और मिलर भी उस समय नई दिल्ली में मौजूद थे।

दूसरी फर्म में भी ट्रंप के करीबी

रिपोर्ट के मुताबिक ट्रंप की दोबारा जीत के बाद भारतीय दूतावास ने ट्रंप के करीबी दायरे से जुड़ी दो बड़ी लॉबिंग फर्में हायर कीं। दूसरी फर्म Mercury Public Affairs है, जिसे 75,000 डॉलर प्रति माह पर रखा गया। इसकी कोर टीम में ट्रंप की ट्रांज़िशन टीम के कम्युनिकेशंस डायरेक्टर ब्रायन लैंज़ा हैं। ट्रंप की मौजूदा चीफ ऑफ स्टाफ सूज़ी वाइल्स भी 2024 के आखिर तक इस फर्म में रजिस्टर्ड लॉबिस्ट थीं। Mercury ने अपनी फाइलिंग्स में ट्रंप की वह X पोस्ट भी गिनाई है, जिसमें उन्होंने इस साल जून में नरेंद्र मोदी को भारत के सबसे लंबे समय तक प्रधानमंत्री रहने पर बधाई दी थी।

(स्रोत: The Indian Express, 7 नवंबर 2026)

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