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उत्तर प्रदेश

हाथरस कांड में सीएम योगी और उनका प्रशासनिक सिस्टम पूरी तरह फेल साबित हुआ है!

पूर्व आईपीएस दारापुरी ने महिला राज्यपाल को भेजा पत्र, हाथरस में हुई प्रशासनिक लापरवाही के दोषी हो दण्डित, महिला सुरक्षा की बनी संस्थाओं की बर्बादी महिला हिंसा की जिम्मेदार

लखनऊ, 30 सितम्बर 2020 : हाथरस में गैंगरेप की पीड़िता दलित युवती की दिल्ली की सफदरगंज अस्पताल में पंद्रह दिनों तक जिंदगी और मौत से जूझने के बाद हुई मृत्यु की दर्दनाक घटना पर आज आल इंडिया पीपुल्स फ्रंट के राष्ट्रीय प्रवक्ता व पूर्व आईजी एस. आर. दारापुरी ने संवैधानिक प्रमुख व महिला होने के नाते राज्यपाल को पत्र भेजकर प्रदेश में लगातार बढ़ रही महिला हिंसा की घटनाओं में तत्काल हस्तक्षेप कर प्रदेश सरकार को निर्देश देने का अनुरोध किया है। उन्होंने पत्र में हाथरस की अमानवीय व बर्बर घटना में लापरवाही बरतने और समय से एफआईआर दर्ज कर कार्यवाही न करने और उसे समुचित इलाज न दिलाने वाले दोषी पुलिस व प्रशासनिक अधिकारियों को दण्डित करने, महिलाओं पर हो रही हिंसा की घटनाओं के लिए जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक को जवाबदेह बनाने और महिलाओं के साथ हिंसा, बलात्कार, हत्या की घटनाओं में तत्काल राहत पहुंचाने वाली 181 वूमेन हेल्पलाइन और महिला समाख्या जैसी महिलाओं के लिए हितकारी योजनाओं को पूरी क्षमता से चलाने की मांग की। पत्र की प्रति आवश्यक कार्यवाही के लिए अपर मुख्य सचिव गृह और महानिदेशक उत्तर प्रदेश पुलिस को भी भेजी गयी है।

पत्र में दारापुरी ने कहा कि हाथरस में दलित युवती के साथ 14 सितम्बर 2020 को गैंगरेप की घटना हुई थी और भारी जनदबाव के बाद 19 सितम्बर 2020 को उसकी एफआईआर पंजीकृत हो पायी। उसे काफी लम्बे समय तक अलीगढ़ के अस्पताल में इलाज हेतु रखा गया और वहां समुचित इलाज न मिलने पर ही उसे दिल्ली एम्स भेजा गया। उसके पिता के कथनानुसार दिल्ली में एम्स में भी उसे भर्ती नहीं किया गया और आखिरकार उसे सफदरगंज अस्पताल में भर्ती करना पड़ा। यह साफ तौर पर इतने बर्बर तरीके से पीड़ित हुई युवती के प्रति पुलिस और स्थानीय प्रशासन द्वारा लापरवाही और असंवेदनशीलता को प्रदर्शित करता है। हद तो यह हो गयी कि युवती के परिवारजनों की मांग के बावजूद उसकी लाश भारी पुलिस फोर्स लगाकर रात के अंधेरे में जला दी गयी और उसके परिजनों को उसकी लाश तक नहीं दी गयी।

पत्र में उन्होंने क्षोभ व्यक्त करते हुए कहा है कि संवैधानिक प्रमुख और एक महिला होने के नाते विगत माह हमने आपको ईमेल से और आपके कार्यालय जाकर उत्तर प्रदेश में महिलाओं की सुरक्षा के लिए पत्रक दिया था। जिसमें हमने आपको माननीय मुख्यमंत्री जी के क्षेत्र गोरखपुर के गोला इलाके में 17 साल की लड़की के साथ इंसानियत को दहला देने वाले सामूहिक दुष्कर्म, जिसमें उसके शरीर को सिगरेट से दाग दिया गया था, को लाया था। इसी प्रकार लखीमपुर खीरी में 13 साल की बच्ची के साथ दुष्कर्म करके उसकी जबान तक काट डालने, हापुड़ में 6 साल से कम उम्र की बच्ची के साथ हुए बलात्कार और देश की प्रतिभा अमेरिका के कैलिफोनिर्या में पढ़ने वाली 20 वर्षीय सुदीक्षा की दादरी, ग्रेटर नोएडा में छेड़खानी के कारण सड़क दुधर्टना में मृत्यु की घटनाओं को लाया था।

पत्र में हमने आपको यह भी अवगत कराया था कि इन भयावह स्थितियों में भी सरकार का रूख बेहद दुखद है। महिला हिंसा को रोकने के नाम पर बयानबाजी ज्यादा हो रही है लेकिन वास्तविकता में निर्भया काण्ड़ के बाद महिलाओं की सुरक्षा के लिए चलायी जा रही 181 वूमेन हेल्पलाइन और महिला समाख्या कार्यक्रम को सरकार ने बंद कर दिया है। यह सब कुछ तब हो रहा है जब भारत सरकार के राष्ट्रीय अपराध अनुसंधान ब्यूरो की रिपोर्ट के अनुसार उत्तर प्रदेश महिला उत्पीड़न के मामले में देश में सबसे ऊंचे पायदान पर है। लेकिन दुखद स्थिति यह है कि आपके द्वारा हमारे पत्र पर कोई कार्रवाही नहीं की गयी। इसलिए महिला हिंसा की ऐसी भयावह स्थिति में पुनः निवेदन किया गया है कि महिलाओं के जीवन की सुरक्षा के लिए तत्काल हस्तक्षेप करें और सरकार को इसे रोकने के लिए कार्यवाही करने का निर्देश दें।

(एस. आर. दारापुरी)
पूर्व आई0 जी0
राष्ट्रीय प्रवक्ता, आल इंडिया पीपुल्स फ्रंट (रेडिकल)


इसी प्रकरण में वरिष्ठ पत्रकार शीतल पी सिंह के कुछ ट्वीट देखें-

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1 Comment

1 Comment

  1. विजय सिंह

    September 30, 2020 at 8:51 pm

    सरकारी मशीनरी पूरी तरह फेल साबित हुई है।
    पुलिस ने देर रात अँधेरे में बिना परिवार को बताये या सौंपें पीड़िता की लाश जला कर गजब “मानवीयता” का परिचय दिया है !!!!!!!
    है कहीं मानवाधिकार , कहीं है बची हुई इंसानियत ????????????
    बेहद शर्मनाक ,बेहद शर्मनाक।
    कड़ी त्वरित सजा दी जाये सभी दोषियों को।

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