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सुख-दुख

हे विक्रम राव, फ्रांस की बातें बाद में कर लेना, पहले आत्महत्या करने वाले बुजुर्ग पत्रकार त्रिपाठी जी की सुध तो ले लो

पता चला है कि मई दिवस पर IFWJ की रैली में जुटेंगे 1200 श्रमजीवी पत्रकार और के. विक्रम राव होंगे मुख्य वक्ता…. इनसे मेरा कहना है कि पहले मलिहाबाद तो जाओ, फिर कर लेना फ्रांस की बातें… लखनऊ में नाका थाना क्षेत्र में आर्थिक तंगी के चलते वरिष्ठ पत्रकार चंद्र शेखर त्रिपाठी (74) ने ट्रेन के आगे कूदकर जान दे दी. श्री त्रिपाठी नव जीवन अख़बार में काम करते थे उसके बंद होने के बाद से इनका परिवार आर्थिक तंगी से जूझ रहा था. लेकिन इन पत्रकार नेताओं को कभी फुर्सत नहीं मिली कि वे ऐसे पीड़ित और गरीब पत्रकारों की सुध लेते.

पता चला है कि मई दिवस पर IFWJ की रैली में जुटेंगे 1200 श्रमजीवी पत्रकार और के. विक्रम राव होंगे मुख्य वक्ता…. इनसे मेरा कहना है कि पहले मलिहाबाद तो जाओ, फिर कर लेना फ्रांस की बातें… लखनऊ में नाका थाना क्षेत्र में आर्थिक तंगी के चलते वरिष्ठ पत्रकार चंद्र शेखर त्रिपाठी (74) ने ट्रेन के आगे कूदकर जान दे दी. श्री त्रिपाठी नव जीवन अख़बार में काम करते थे उसके बंद होने के बाद से इनका परिवार आर्थिक तंगी से जूझ रहा था. लेकिन इन पत्रकार नेताओं को कभी फुर्सत नहीं मिली कि वे ऐसे पीड़ित और गरीब पत्रकारों की सुध लेते.

दिवंगत बुजुर्ग / वरिष्ठ पत्रकार के घर या घाट पर पांच पत्रकार भी नजर नहीं आये. कहने को लखनऊ में अंतर्राष्ट्रीय स्तर के पत्रकार संगठन और पत्रकार नेता खूब सक्रिय हैं. पत्रकारों के हितों की आवाज उठाने के लिये दुनियाभर में भव्य कार्यक्रम कराते हैं. अब एक मई को सुनिएगा बड़ी-बड़ी बातें. इन दिनों सत्ताधारियों को इकट्ठा करने का कार्य प्रगति पर है. कोई पत्रकार आर्थिक तंगी से मरे या भूखा मर जाये, हमारी बला से. हम तो अंतर्राष्ट्रीय स्तर के नेता हैं. खुदा ना खास्ता किसी बड़े न्यूज चैनल / अखबार के नामी गिरामी / संपन्न पत्रकार का देहांत होता तो लाइन लग जाती. क्योंकि वहाँ बड़े नेताओं / अधिकारियों के पहुँचने की उम्मीद होती, इनसे मिलन हो जाता, चेहरा दिखा देते, हाथ मिला लेते. लेकिन त्रिपाठी जी जैसे गरीब पत्रकार के आत्महत्या करने पर कोई पत्रकार घर या घाट पर नहीं जाएगा… लखनऊ के पत्रकार भाई लोग बहुत आगे की सोचते हो… यही है लखनऊ की दलाल पत्रकारिता का सच…

त्रिपाठी जी जैसे पत्रकारों को आत्महत्या इसलिए करना पड़ता है क्योंकि उनको दी जाने वाली सुविधाओं का हक पत्रकार नेता लोग हजम कर जाते हैं… जिस लखनऊ के पत्रकार संगठन / पत्रकार नेता दुनियाभर मे पत्रकारों के हितों के लिये भव्य आयोजन / सम्मेलन कर रहे हैं, बतौर पत्रकार नेता प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्रियो से मिलने की होड है, आपस में मारामारी हो रही है, उसी शहर के असली / वरिष्ठ / बुजुर्ग पत्रकार भूखों मर रहे हैं, आर्थिक तंगी और तमाम परेशानियों से परेशान होकर आत्महत्या करने पर मजबूर हो रहे हैं लेकिन कोई पत्रकार नेता / पत्रकार संगठन इसका संज्ञान नहीं ले रहा है… ऐसे दर्जनों मामले सामने आ चुके हैं।

नवेद शिकोह 
वाट्सअप- 8090180256
मोबाइल- 9369670660 
[email protected]

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2 Comments

2 Comments

  1. adbhut samachar rakesh

    April 26, 2016 at 5:18 pm

    GOOD naved bhai sachchai

  2. Khalid

    April 26, 2016 at 6:07 pm

    Naved bhai bat solah ana sach hai apki lekin yeh gap khatam kab hoga aur iske liye ptrakar neta mia kadam utha rae hai sawal unse bhi hai jo nichle istar ke ptrakaro ki awaz buland kar rae hai

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