मायावती से तीखा सवाल पूछने वाली उस लड़की का पत्रकारीय करियर शुरू होने से पहले ही ख़त्म हो गया!

Zaigham Murtaza : अप्रैल 2002 की बात है। उत्तर प्रदेश में राष्ट्रपति शासन लगा था। मायावती की सत्ता में वापसी की आहट के बीच माल एवेन्यु में एक प्रेस वार्ता हुई। जोश से लबरेज़ मैदान में नई-नई पत्रकार बनी एक लड़की ने टिकट के बदले पैसे पर सवाल दाग़ दिया। ठीक से याद नहीं लेकिन वो शायद लार क़स्बे की थी और ख़ुद को किसी विजय ज्वाला साप्ताहिक का प्रतिनिधि बता रही थी। सवाल से रंग में भंग पड़ गया। वहां मौजूद क़रीब ढाई सौ कथित पत्रकार सन्न।

यूपी के मुख्यमंत्री निवास पर संवाददाता सम्मेलन की यह तस्वीर हो रही वायरल

Dilip Mandal : यह बीजेपी कार्यकर्ताओं का सम्मेलन नहीं है. यूपी के मुख्यमंत्री निवास पर हुए संवाददाता सम्मेलन की ताजा तस्वीर है. ये सब निष्पक्ष पत्रकार हैं. इनका बताया हुआ जानकर हम अपने विचार बनाते हैं. आपके प्रिय चैनल का रिपोर्टर भी यहीं है. भारतीय मीडिया एक पोंगापंथी सवर्ण पुरुष है. यूपी के मुख्यमंत्री निवास पर संवाददाता सम्मेलन की वायरल हो रही तस्वीर. पहचानिए अपने प्रिय चैनल और अखबार के पत्रकार को. वह यहीं कहीं है. गौर से देखिए. यूपी के सीएम निवास पर संवाददाता सम्मेलन की तस्वीर.

जाम लड़ाने के बदले अभियुक्त बाप-बेटों की साजिशों में भागीदार रहता है अंग्रेजी दैनिक का रिपोर्टर

अब नहीं जलता ‘शरद’ ऋतु का ‘दीप’…

लखनऊ। देश को लगातार गौरवान्वित करने वाले, ओलंपिक और अन्य अंतराष्ट्रीय स्पर्धाओं में मेडल दिलाने वाले और लगातार ऊंचाइयां छू रहे बैडमिंटन खेल को कुछ स्वार्थी तत्व और बिकाऊ कलमें प्रायोजित स्टोरियों के सहारे बदनाम करने की साजिश रच रही हैं। दुर्भाग्यपूर्ण बात यह है कि स्वार्थी-साजिशकर्ताओं का शिकार देश का एक प्रतिष्ठित अंग्रेजी समाचार पत्र भी हो रहा है।

सन स्‍टार लखनऊ में सैलरी को लेकर घमासान, तालाबंदी के आसार

लखनऊ से कुछ महीने पहले शुरू हुए दैनिक अखबार सन स्‍टार के सितारे गर्दिश में चल रहे हैं. यह अखबार बंद होने के कगार पर जा पहुंचा है. बताया जा रहा है कि सैलरी संकट के चलते यहां दो-तीन दिन के लिए तालाबंदी कर दी गई. अखबार का प्रकाशन भी नहीं हुआ. पैसे को लेकर यहां मारपीट और हाथापाई की नौबत कई बार उत्‍पन्‍न हो गई. अभी भी सभी लोगों की सैलरी नहीं मिल पाई है.

”इस इस्‍तीफे की कहानी का मुख्‍य किरदार यूपी कांग्रेस का एक नेता है”

मित्रों आप फेसबुक के मित्र हैं और भी मित्र हैं, फेसबुक के अस्तित्‍व में आने के पहले वाले भी हैं। अब मैं बताने वाला हूं वह कथा जिसके चलते मैंने विश्व में सबसे ज्यादा पढ़े जाने वाले अखबार से बीते नौ अप्रैल को रिजाइन किया था। दूसरी बार। पहली कहानी अलग है। वह आठ साल …

अमिताभ ठाकुर आईजी बन कर पूरी ठसक के साथ अपने आफिस में बैठे हैं

लखनऊ : मुजफ्फरनगर दंगे के दौरान केवल सात दिन की तैनाती पाये वरिष्‍ठ पुलिस अधीक्षक सुभाष चंद्र दुबे को दंगा न सम्‍भाल पाने को लेकर शासन ने दोषी ठहराया। दुबे को इस आरोप में मुजफ्फरनगर से हटाकर लखनऊ में पुलिस महानिदेशक कार्यालय में सम्‍बद्ध कर दिया गया और इसके 15 दिन बाद उन्‍हें निलम्बित भी कर दिया गया। अब हकीकत यह देखिये। सुभाष च्रंद्र दुबे की कार्यशैली बेदाग रही है। दुबे जहां भी रहे, अपनी कुशलता के झंडे गाड़ दिया। दंगा शुरू होने पर दुबे को शासन ने खासतौर पर सहारनपुर भेजा था। तब तक मुजफ्फरनगर में अपर महानिदेशक कानून-व्‍यवस्‍था, आर्इजी, डीआईजी समेत कई अधिकारी भी तैनात थे, ताकि वे अपनी निगरानी में दंगा सम्‍भालने की कोशिश करें। लेकिन प्रमुख गृह सचिव ने इसी बीच सात दिन की तैनाती के बाद ही दुबे को डीजीपी कार्यालय में अटैच कर दिया था।

बिना सेलरी और बिना नौकरी वाले ये लखनऊ के पत्रकार कहां से गाड़ियां, कोठियां, स्कॉच हासिल कर लेते हैं!

Zafar Irshad : मुख्यमंत्री जी को घेरे है चाटुकार पत्रकारों की टीम..प्रदेश में कुछ कर गुजरने की ख्वाहिश रखने वाले युवा मुख्य्मंत्री अखिलेश जी भी चाटुकार पत्रकारों के चक्कर में पड़ गए लगते है..उनके इर्द गिर्द वही पत्रकार चक्कर लगा रहे है,जो इससे पहले वाली सरकारों के दरबार में दण्डवत हाज़िरी लगाते थे..यकीन न हो इनका रिकॉर्ड देख लें की यह महानुभाव बड़का पत्रकार 4 साल पहले और उससे पहले कहाँ हाज़िरी लगाते थे..

हे विक्रम राव, फ्रांस की बातें बाद में कर लेना, पहले आत्महत्या करने वाले बुजुर्ग पत्रकार त्रिपाठी जी की सुध तो ले लो

पता चला है कि मई दिवस पर IFWJ की रैली में जुटेंगे 1200 श्रमजीवी पत्रकार और के. विक्रम राव होंगे मुख्य वक्ता…. इनसे मेरा कहना है कि पहले मलिहाबाद तो जाओ, फिर कर लेना फ्रांस की बातें… लखनऊ में नाका थाना क्षेत्र में आर्थिक तंगी के चलते वरिष्ठ पत्रकार चंद्र शेखर त्रिपाठी (74) ने ट्रेन के आगे कूदकर जान दे दी. श्री त्रिपाठी नव जीवन अख़बार में काम करते थे उसके बंद होने के बाद से इनका परिवार आर्थिक तंगी से जूझ रहा था. लेकिन इन पत्रकार नेताओं को कभी फुर्सत नहीं मिली कि वे ऐसे पीड़ित और गरीब पत्रकारों की सुध लेते.

दलाल पीआर और फ्रॉड बिल्डर के फेर में फंसे लखनऊ के पत्रकार

लखनऊ की पत्रकारिता रो रही है….इस शहर में बड़े-बड़े संपादक हुए देश दुनिया में नाम कमाया….बीबीसी से लेकर रायटर्स और कई चैनलों में बड़े ओहदों पर पहुंचे पत्रकार इसी शहर की देन हैं….इतना ही नहीं वालस्ट्रीट जर्नल और गल्फ टुडे जैसे बड़े समूहों में अच्छे पदों पर पहुंचे कई नामचीन पत्रकार लखनऊ के पत्रकारिता से ही ककहरा सीखकर आगे बढ़े हैं..लेकिन अब जो यहां देखने को मिल रहा है उससे लग रहा है ज़हर खाकर जान दे दूं या पत्रकारिता को अलविदा कह दूं…..

लखनऊ में पत्रकारों की राजनीति पर सवाल उठाओ तो पूछा जाता है- ‘किस गुट की तरफ से बोल रहे हो?’

हुई मुद्दत कि ‘ग़ालिब’ मर गया पर याद आता है
वो हर एक बात पर कहना के यूँ होता तो क्या होता.

इन दो व्यक्तियों की तस्वीरों को देखिये और पहचानने की कोशिश कीजिये… जितने अति वरिष्ठ हैं और जितने भी बड़े पत्रकारों के नेता हैं, उनमें से शायद बहुत कम ही इनको पहचानते होंगे… जो नहीं पहचानते, उन्हें मैं बता देता हूं- इसमें बायीं तरफ हैं Neeraj Mishra और दाहिनी तरह है Mukesh Verma. दोनों टीवी के बहुत कनिष्ठ पत्रकार हैं लेकिन दिल के बहुत बड़े हैं और साथियों के लिए जीना-मरना जानते हैं… इनका पत्रकार दोस्त था… नाम था Santosh Kumar Gwala…

प्रेस क्लब सारे पत्रकारों के लिए खोलने के प्रस्ताव का दीपक गिडवानी ने स्वागत किया

That’s a good initiative, something i have been fighting for, for a long time. After a sustained effort and a major struggle, we had managed to get temporary membership for 18 journalists. But even these members have not been made permanent members. The fear of those wielding power at UP Press Club (for indefinite terms) is that news members might tip the balance against the ‘thekedaars’ in the next Club election (whenever that happens!)

OPEN PRESS CLUB FOR ALL JOURNALISTS

Lucknow, 11 February 2016 : The UP State Accredited correspondent committee has passed a resolution demanding Opening of doors of the UP Press Club, for all accredited and other working journalists. In the meeting of the Correspondent committee held at Press room of Vidhan Bhawan and presided by its President Pranshu Mishra, a resolution to this regard was moved by Senior journalist and member of the executive committee Mr Kazim Raza.

Upwju में अंधेरगर्दी : मुतावल्ली बन कर फ्री की बिरयानी खाने वाले नमाज ही नहीं पढते

मुतावल्ली बन कर फ्री की बिरयानी खाने वाले नमाज ही नहीं पढते. इसका आशय ये है कि पुजारी दक्षिणा तो खूब ले और पूजा ही नहीं करे. श्रमजीवी पत्रकार यूनियन आखिर है क्या? इसको समझो-जानो। इसके बाद इसकी लोकल इकाइ से जुड़ो। upwju (उत्तर प्रदेश वर्किंग जर्नलिस्ट यूनियन) के प्रदेश अध्यक्ष हसीब सिद्दीकी ने किसी से ये नसीहत की और बस सिद्दीकी साहब की इस सलाह पर वो शख्स upwju को जानने समझने मे जुट गया। उस शख्स को इससे पहले तो बस ये पता था कि रोज दस्तरखान की मुफ्त में बिरयानी खाने का मतलब है upwju। इतनी सी जानकारी को मैंने आगे बढ़ाते हुए बताया- upwju का मतलब ऐसी elected body जिसमें चुनाव के अजब-गजब करिश्मे हैं। मसलन जो जीत गया वो फिर कभी हार नहीं सकता। अपनी कुर्सी के साथ वो अजेय हो जाता है और उसका ओहदा अमर।

हिंदुस्तान अखबार के दफ्तर पर हमला करने वाले चार गिरफ्तार, पार्षद फरार

लखनऊ : दैनिक हिंदुस्तान के कार्यालय पर धावा बोलने वाले पार्षद और उसके गुंडे हमालवारों में से पुलिस ने चार को गिरफ्तार कर लिया है। हमले का मुख्य आरोपी पार्षद भी अभी तक गिरफ्त में नहीं आया है। मुख्यमंत्री के सूचना सलाहकार एमए खान ने इस हमले की निंदा करते हुए कहा है कि जिन लोगों ने अखबार के दफ्तर पर हमला किया है उनके खिलाफ कठोरतम कार्यवाही की जाएगी।

हिन्दुस्तान के पत्रकारों पर हमला करने वालो पर गैंगेस्टर एक्ट लगाया जाय : हेमंत तिवारी

लखनऊ : हिंदुस्तान अखबार के कार्यालय पर अराजक तत्वों द्वारा हमले की उत्तर प्रदेश मान्यता प्राप्त संवाददाता समिति ने कड़ी निंदा करते हुए दोषियों के लिए कड़ी सजा की मांग की है. समिति के अध्यक्ष हेमंत तिवारी ने घटना की जानकारी होते ही डीजीपी से बात की और कड़ी कार्यवाई की मांग की.    

हेमंत तिवारी का भंडाफोड़ करने पर सतीत्व का पाठ पढ़ा रही पत्रकारिता की वेश्याएं : अनूप गुप्ता

”लखनऊ की पत्रकारिता के बड़े पत्रकार हेमंत तिवारी का खुलासा करने के बाद कुछ वेश्याएं सतीत्व का पाठ पढ़ा रही हैं…”, ये कहना है कि ‘दृष्टांत’ पत्रिका के जुझारू संपादक अनूप गुप्ता का। गौरतलब है कि ‘दृष्टांत’ के ताजा अंक की कवर स्टोरी हेमंत तिवारी पर ही फोकस है। ‘दृष्टांत’ से यहां साभार प्रस्तुत है लखनऊ के पत्रकारों के भ्रष्टाचार पर केंद्रित संपादक अनूप गुप्ता की स्टोरी – 

लखनऊ में दैनिक हिंदुस्तान के दफ्तर पर भीड़ के साथ सभासद का हमला, कई घायल, फोर्स तैनात

लखनऊ : दबंग सत्ताधारियों के हौसले इतने बुलंद हो चुके हैं कि अब पत्रकार ही नहीं, प्रतिष्ठित मीडिया संस्थान भी उनके निशाने पर आ गए हैं। लखनऊ में गोमतीनगर स्थित दैनिक हिन्दुस्तान के कार्यालय पर सभासद के भाई ने अपने समर्थकों के साथ हमला कर दिया। हमले में एचआर हेड आशीष मित्तल का सिर फट गया। कई अन्य कर्मियों को भी चोटें आई हैं। 

जागरण संवाददाता को पितृ-शोक

लखनऊ : दैनिक जागरण उत्तर प्रदेश व्यूरों के विशेष संवाददाता अवनीश त्यागी के छियासी वर्षीय पिता रामेश्वर प्रसाद त्यागी के निधन पर भारतीय जनता पार्टी ने दुखः व्यक्त किया है। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष डा0 लक्ष्मीकांत बाजपेयी ने दिवगंत आत्मा को अपनी भावभीनी श्रद्घांजलि देते हुए कहा कि समाज की अपूरणीय क्षति हुई है। दुख की इस घड़ी में भाजपा परिवार उनके साथ है।

यूपी : डॉ.नूतन ठाकुर की जमीन पर सहकारिता मंत्री शिवपाल सिंह यादव की कुदृष्टि

उत्पीड़न और दमन के सारे संभव तरीके हम पर अपनाए जा रहे हैं. मेरे निलंबन, विभागीय जांच, सतर्कता जाँच के बाद नूतन द्वारा विधिवत खरीदी गयी और 11 साल से शांतिपूर्ण कब्जे की जमीन पर सहकारिता मंत्री शिवपाल सिंह यादव व्यक्तिगत रुचि लेकर सम्बंधित सहकारी समिति द्वारा कई प्रकार के विवाद खड़े करने के प्रयास कर रहे हैं. 

यूपी : सरकार और शासन की ज्यादती के खिलाफ IPS अमिताभ फिर सड़क पर उतरे

 ”लखनऊ पुलिस द्वारा श्री गायत्री प्रजापति एवं अन्य द्वारा हमें फर्जी फंसाने के प्रयास के सम्बन्ध में हम थाना गोमतीनगर में दर्ज नूतन की एफआईआर में राजनैतिक दवाब में आनन-फानन में लगाई गयी अंतिम रिपोर्ट के सम्बन्ध में गाँधी प्रतिमा, हजरतगंज पर अपनी पीड़ा व्यक्त करने जा रहे हैं.” ये शब्द हैं निलंबित वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी अमिताभ ठाकुर के। वह एक बार फिर सरकार की ज्यादतियों के खिलाफ सड़क पर उतर पड़े।

जब पत्रकार नौकरशाह-मंत्रियों को लड़कियां पहुंचाने लगें तो पत्रकारिता की गरिमा तार-तार होगी ही

गणेश शंकर विद्यार्थी जो अतीत से आज तक और आगे भी मिशन पत्रकारिता के पितामह जाने जाते रहेंगे, गांधी जी भी पत्रकार थे, अटल बिहारी वाजपेयी ने भी पत्रकारिता के गौरव पूर्ण काल के इतिहास को जिया है। लाल कृष्णा आडवाणी भी पत्रकार थे, बाला साहेब ठाकरे भी कार्टूनिस्ट पत्रकार थे लेकिन इन सभी ने कभी भी मिशन पत्रकारिता और उसकी गरिमा पर आंच नहीं आने दी. 

आडियो टेप से खुला प्रभु झिंगरन की भर्ती का राज, बैकडेट में दिया इस्तीफा

भोपाल/लखनऊ : अपराध करने के बाद सरकारी अफसर किस तरह से अपनी पीठ थप-थपाते हैं, यदि यह जानना है तो केंद्रीय व्यावसायिक शिक्षा संस्थान के संयुक्त निदेशक आरबी शिवगुड़े की बातचीत का आडियो टेप सुनना होगा। इस आडियो टेप से पता चलता है कि डेढ़ साल पहले उन्होंने किस तरह से रिश्वत लेने के मामले में आरोपी को संस्थान में नियुक्त कर दिया था। जब इस बात की पोल खुली तो उन्होंने बैकडेट में इस्तीफा लेकर मामले को दबा दिया। डेढ़ साल बाद अपनी पीठ थप-थपा रहे अधिकारी का आडियो टेप हाथ लगा है।

यूपी में लोकायुक्त नियुक्ति पर फिर झटका, राज्यपाल ने सीएम को फाइल बैरंग लौटाई

लखनऊ : लोकायुक्त नियुक्ति पर उत्तर प्रदेश सरकार को एक बार फिर मुंह की खानी पड़ी है। सुप्रीम कोर्ट की फटकार सुनने के बाद मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने लोकायुक्त नियुक्ति के लिए कैबिनेट से जो प्रस्ताव पारित करा लिया था, गवर्नर राम नाईक ने उसे मंजूरी देने से इनकार करते हुए फाइल सीएम को वापस कर दी है, जबकि सरकार किसी भी कीमत पर जस्टिस रवींद्र सिंह को ही लोकायुक्त नियुक्त कराने पर आमादा है।

लखनऊ सहारा के पत्रकार ने वेतन न मिलने पर पांच माह का अवकाश मांगा

राष्ट्रीय सहारा लखनऊ के वरिष्ठ उप संपादक रवि कुमार ने शीर्ष प्रबंधन को प्रेषित एक पत्र में बताया है कि नियमित वेतन न मिलने से उनके परिवार को आर्थिक दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। इससे वह भारी मानसिक कष्ट से गुजर रहे हैं। हर महीने किसी तरह से सिर्फ आधा वेतन दिया जा रहा है और काम पूरा लिया जा रहा है। वह चाहते हैं कि 6 अगस्त 2015 से दिसंबर 2015 तक उन्हें अवैतनिक अवकाश दे दिया जाए ताकि वह जीविकोपार्जन का कोई और रास्ता ढूंढ सकें।

सूचना सचिव से लड़ाई भारी पड़ी, ‘दृष्टांत’ के संपादक अनूप गुप्ता का मकान आवंटन निरस्त

लखनऊ : हिंदी पत्रिका ‘दृष्टांत’ के संपादक अनूप गुप्ता और उत्तर प्रदेश के प्रमुख सचिव सूचना नवनीत सहगल की आपसी खींचतान चरम पर पहुंच चुकी है। बताया जाता है कि एक खबर को लेकर दोनो के बीच पैदा हुई रंजिश के चलते सहगल के इशारे पर अनूप गुप्ता का मकान आवंटन निरस्त कर दिया गया है। इस समय अनूप गुप्ता उसी मकान में रह रहे हैं। संभावना जताई जा रही है कि शासन की इस मनमानी को गुप्ता कोर्ट में चुनौती दे सकते हैं। 

यूपी में आपात काल : धमकी मिलीं, प्रतीक्षा सूची में डाला, लो मैं सड़क पर आ गया, प्रदेश छोड़ना पड़ेगा

अखबारों से ज्ञात हुआ कि आज मेरा स्थानांतरण कर ‘प्रतीक्षा’ में रख दिया गया। किसी विभाग से किसी प्रमुख सचिव स्तर के अधिकारी को हटाकर ‘प्रतीक्षा’ में तभी डाला जाना चाहिए, जब उस विभाग में कोई ‘घोटाला’ या कदाचार किया गया हो, तथा उस अधिकारी को निष्पक्ष जांच हेतु हटाना जरूरी हो। आज कई चेतावनी, धमकियां मिलीं। लगता है कि अब प्रदेश ही छोड़ना पड़ जायेगा या फिर छिपे-छिपे फिरना पड़ेगा। अंग्रेजी उपनिवेशवाद की याद आती है। आपातकाल जैसा लगता है।

लखनऊ के डीएम की चमचागिरी में खबर चुराने की खुल गई पोल

कभी-कभी अफसरों की चमचागिरी भी भारी पड़ जाती है. ऐसा तब देखने को मिला, जब ‘समाचार प्लस’ के पत्रकार आलोक पाण्डेय ने लखनऊ के डीएम की चमचागिरी में अपने अखबार ‘द मिड डे एक्टिविस्ट’ में  एक खबर लिखी और ग्रुप में डाल दी. पलक झपकते ही एक अन्य पत्रकार ने अपनी खबर लगाते हुए कहा कि यह खबर तो उसकी है. आलोक ने चमचागिरी के लिए उसकी खबर हूबहू कॉपी करके छाप दी है. इस पोस्ट के बाद तो आलोक को साप सूंघ गया.

जान लेने के इरादे से जनसंदेश टाइम्स के रिपोर्टर पर हमला

लखनऊ : जनसंदेश टाइम्स के रिपोर्टर सलाहउद्दीन शेख पर पिछले दिनो जान लेने की नीयत से हमला किया गया। स्थानीय लोगों के जमा हो जाने से उनकी जान बच गई। उन्होंने घटना के संबंध में हजरतगंज कोतवाली पुलिस को लिखित रूप से अवगत करा दिया है।

क्या राजनीति का अर्थ केवल भूमाफिया, चोर- उच्चकों और फर्जी डिग्री धारकों से है!

आज जब मैं अपनी स्वैच्छिक सेवा निवृत्ति पर आये मित्रों के मत पर अपनी सफाई पेश कर रहा हूँ, तो कबीर की याद आ रही है और ” झीनी चादर ” अपने जीवन में ओढ़ने वाले सभी मित्रों को नमन कर सफाई देने का मन है। मैंने ३४ साल की नौकरी की है तथा इस का मतलब यह नहीं कि मैंने इतनी लम्बी सेवा घुटन या विवशता के साथ की। यथा शक्ति, मनोयोग से जिन पदों पर रहा, काम किया। 

अमिताभ को घेरने में डीजीपी, डीआईजी, एसएसपी का हाथ

लखनऊ : सामाजिक कार्यकर्ता डॉ. नूतन ठाकुर ने अपने पति आईपीएस अफसर अमिताभ ठाकुर के खिलाफ गाजियाबाद की एक महिला द्वारा बलात्कार का एफआईआर लिखवाने में बड़े पुलिस अफसरों की साफ़ मिलीभगत का आरोप लगाया है। कहा है कि डीजीपी, डीआईजी और एसएसपी की यह असामान्य तत्परता और पुलिस द्वारा इस तरह फूहड़ तरीके से धारा 420 लगाना इस मामले में भारी ऊपरी दवाब को पूरी तरह स्थापित करता है।