छत्तीसगढ़ में अधिकारी काम से नहीं, कामसूत्र से खुश होते हैं! पढ़िए इस महिला सिपाही की दास्तान

आधी रात को फोन करके महिला पुलिसकर्मी को अपने घर बुलाने की तमन्ना रखने वाले बिलासपुर पुलिस के तत्कालीन आईजी पवन देव के खिलाफ पीड़िता ने पुनः शिकायत ही है। इस बार पीड़िता ने खुद को देव का परिचित बताते कुछ लोगों द्वारा डराने/धमकाने की बात कही है। इतना ही नहीं आईजी महोदय के खिलाफ वैधानिक कार्रवाई करने की भी मांग की है। खैर कार्रवाई चाहे जितने घुमावदार रास्तों से होकर अपने अंजाम तक पहुंचे।

हम तो बेबाकी से यही पूछेंगे की वर्दी वालों की तमन्नायें ऐसे हिलोरे मारेंगी तो क्या अपराधियों की हिम्मत नहीं बढ़ेगी? और जब ऐसे पुलिस अधिकारी अपना पूरा ध्यान और प्रयास अपनी तमन्नाओं की पूर्ति में लगायेंगे तो नौकरी क्या करेंगे? शहर को सुरक्षित क्या रखेंगे? और क्या यह काम की बजाय कामसूत्र से खुश होते हैं?

आपको बता दें कि कुछ समय पहले सोशल मीडिया में ऑडियो क्लिप वायरल हुई थी जिसमें मेल और फीमेल वॉइस थी। मेल आधी रात को फीमेल को अपने पास बुला रहा था और असुविधा होने पर “मैं लेने आता हूं न” जैसी बात भी कही। बाद में इस कनवरजेशन को आईजी महोदय और एक महिला पुलिसकर्मी (पीड़िता) का बताया गया। साथ ही इसके विरुद्ध FIR भी दर्ज की गई तथा मामले की जांच आंतरिक शिकायत समिति को सौंपी गई।

मीडिया में भी मामले ने तूल पकड़ा और फिर शुरु हुआ आरोप-प्रत्यारोपण का सिलसिला। मुझे फंसाया जा रहा है। मेरे खिलाफ साजिश है। जैसे बचकाना बयान भी दिए गये। लेकिन यह नहीं बताया गया कि ऐसी बातें महोदय किन जज्बातों के वशीभूत होकर कर रहे थे? क्योंकि शिकायत पत्र में लिखी बातों के मुताबिक आंतरिक शिकायत समिति ने आरोप को सही पाया है।

पढ़ें महिला सिपाही का पत्र….

आशीष चौकसे
पत्रकार, राजनीतिक विश्लेषक और ब्लॉगर

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Comments on “छत्तीसगढ़ में अधिकारी काम से नहीं, कामसूत्र से खुश होते हैं! पढ़िए इस महिला सिपाही की दास्तान

  • सुभाष सिंह यादव says:

    बड़ा ही गंभीर मसला है और ये चर्चा में नहीं आता तो निश्चित ही इसे दबा दिया जाता। इसकी निष्पक्ष और सख्ती से जाँच हो और इसपर कार्रवाई हो।
    http://www.jaynagarcity.com

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