आल इंडिया जजेस एसोसिएशन को सुप्रीम कोर्ट में मिली बड़ी सफलता

जजों के वेतन, भत्तों और पेंशन में वृद्धि का रास्ता साफ, सुप्रीम कोर्ट ने दिया महत्वपूर्ण निर्णय…

बहुत कम लोगों को पता होगा कि इस देश में जजों का भी एक संगठन-यूनियन है. आल इंडिया जजेस एसोसिएशन नामक संगठन ने जजों के हित के लिए एक लड़ाई सुप्रीम कोर्ट में छेड़ रखी है जिसमें कुछ रोज पहले एक महत्वपूर्ण पड़ाव आया है.

न्यायिक सेवा के जज तथा अन्य अधिकारियों के लिये सुप्रीम कोर्ट ने दूसरे राष्ट्रीय न्यायिक वेतन आयोग की संस्तुतियों पर विचार करने के बाद देश भर के राज्यों से संस्तुतियों पर अपनी प्रतिक्रिया देने को कहा है. प्रतिक्रिया लेने के लिये सभी राज्यों के महाधिवक्ता और न्याय मित्र एमिकस क्यूरी के रूप में पीएस नरसिम्हन और परमेश्वर को नियुक्त किया गया है.

ये संस्तुतियां जज और अन्य न्यायिक सेवा के अधिकारियों के वेतन, भत्तों और पेंशन से सम्बंधित हैं. दूसरे राष्ट्रीय न्यायिक वेतन आयोग का गठन सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज जस्टिस पीवी रेड्डी की अध्यक्षता में किया गया था. कमेटी में बतौर सदस्य केरला हाईकोर्ट के पूर्व जज जस्टिस आर. बसंत शामिल थे. आयोग के सचिव व दूसरे सदस्य दिल्ली हायर जूडिशियल सर्विस के जिला जज विनय कुमार गुप्ता थे.

दूरसे राष्ट्रीय न्यायिक वेतन आयोग ने सुप्रीम कोर्ट में 29 जनवरी 2020 को अपनी मुख्य रिपोर्ट को चार खंडों में पेश किया. इस रिपोर्ट में जजों के वेतन, पेंशन, भत्तों आदि के मुद्दे पर विस्तार से तथ्यों के समेत बताया गया है. सुनवाई के बाद सुप्रीम कोर्ट ने आयोग की संस्तुतियों को लागू करने के लिए निर्देश जारी किए.

सुप्रीम कोर्ट में इसी मामले की सुनवाई फिर हुई, 28 फरवरी 2020 को. कोर्ट ने सुनवाई के बाद इस मामले में एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया. इस फैसले से जजों के वेतन, भत्तों और पेंशन में बढ़ोत्तरी का रास्ता साफ हो गया है.

सुप्रीम कोर्ट में ऑल इंडिया जजेस एसोसिएशन की तरफ से मयूरी रघुवंशी (एडवोकेट ऑन रिकॉर्ड) और गौरब बनर्जी (सीनियर एडवोकेट) ने एसोसिएशन का पक्ष रखा.

”ऑल इंडिया जजेस एशोसिएशन की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट का 29 फरवरी को आया निर्णय, जिला जज और अधीनस्थ न्यायपालिका के लिये एक बेहद महत्वपूर्ण निर्णय है। यह याचिका जजों के वेतन, भत्ते और पेंशन के पुनरीक्षण के लिये थी। मुझे पूरी उम्मीद है कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुसार सभी राज्य सरकारें, जजों के लिये दी गयी यह सारी सिफारिशें मान लेंगी और इन सिफारिशों के अनुकूल अपना जवाब दाखिल करेंगी।”

-यह कहना है इस याचिका के द्वारा जजेस एसोशिएशन का, सुप्रीम कोर्ट में पक्ष रखने वाली एडवोकेट ऑन रिकॉर्ड मयुरी रघुवंशी का।

देखें आर्डर की कापी-

भड़ास संपादक यशवंत सिंह की रिपोर्ट.

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