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हृदयाघात के कारण चला गया एक शानदार संपादक, वे चलती-फिरती लाइब्रेरी से कम न थे!

हरीश पाठक-

बहुत अखरेगा अजय उपाध्याय का जाना

हिंदी पत्रकारिता में अजय उपाध्याय का मतलब गहन अध्ययन, बेहतरीन संपादकीय समझ के सँग-साथ रिपोर्टिंग से ले कर संपादन और खेल से ले कर विज्ञान तक कि नवीनतम जानकारी से लैस एक दक्ष संपादक।

वे मेरे दैनिक ‘हिंदुस्तान’ में समूह संपादक थे । तब मैं ‘हिंदुस्तान’ के भागलपुर संस्करण का समन्वय संपादक था। जब भी उनसे बात हुई, मुलाकात हुई वे अकसर खबर की व्यापकता और उसके प्रभाव पर अपना दृष्टिकोण जरूर बताते जो सबसे अलग और प्रभावी होता।

दैनिक ‘जागरण’ व दैनिक ‘अमर उजाला’ में वरिष्ठ पदों पर रहे इस वरिष्ठ संपादक ने आज वाराणसी में अंतिम सांस ली । वे 66 वर्ष के थे और डायबिटीज़ से पीड़ित थे। मौत का कारण ह्रदयघात बताया जा रहा है।

अजय उपाध्याय के निधन से हिंदी पत्रकारिता में उस पीढ़ी के एक स्तंभ का ढह जाना है जो हिंदी की शुद्धता और शुचिता के पैरोकार रहे हैं। अरसे तक अखरेगा उनका न होना।


ओम थानवी-

दुखद। दिल्ली में अक्सर मिलना हुआ। बहुत संजीदा इंसान थे। कभी उत्तेजित होते नहीं देखा। गिल्ड की बैठकों में आते थे। एक बार ब्रिटेन की यात्रा पर हम साथ थे। हिंदी तो उनकी भाषा थी, मैंने देखा कि अंगरेज़ी में भी उनका हाथ तंग न था। स्मृतिनमन।


सिद्धार्थ रंगनाथ-

अजय उपाध्याय सर के निधन का दुःखद समाचार मिला। अजय सर पत्रकारिता जगत के सबसे कम उम्र में संपादक बनने वालों में से एक रहे। वे अपने आप में एक चलती फिरती लाइब्रेरी से कम नहीं थे।

गिरीश निकम सर की ही तरह अजय सर अब हमेशा हमारी स्मृतियों में रहेंगे। उनसे मेरी आखिरी मुलाकात मित्र राहुल राव के घर पर हुई थी। उसके बाद उनको मैंने घर छोड़ा था।

मैंने कहा था कि अपनी बेटी को अपने गुरु का आशीष दिलवाने आऊंगा, लेकिन अब शायद वे दूसरे लोक से हम सब को आशीष दे रहे होंगे। आखिरी समय में भी वे मोक्षदायिनी काशी में रहे, शायद इसी प्रकार उनकी आत्मा को सद्गति मिलनी थी। ईश्वर उनके परिवार को भी इस घोर दुःख के समय संबल प्रदान करें। नमन।


सुनील नेगी-

Veteran journalist – 66 year old who had been in senior positions in Dainik Jagran, Amar Ujala, Dainik Hindustan, Aaj Tak, Jagran Institute of Management and Mass Communication , Media Guru etc n finally editor of Patriot Memory Ajay Upadhyay has passed away after suffering from Cardiac arrest.

The news of his sad demise was revealed by his brother Abhay Upadhyay.

The last rites will be performed at Harish Chandra Ghat, Varanasi on Sunday.

Ajay Upadhyay left behind his wife , son Vartika and daughter Shayanika.

Born, educated and brought up in Varanasi Ajay Upadhyay was associated with Dainik Jagran, Amarujala, Dainik Hindustan , Aaj Tak , Media Guru and finally Patriot Memory as its Editor. He served in Dainik Hindustan as its chief editor. Ajay Upadhyay had been on important positions during his journalistic career and carried a good reputation in media circles as a senior journalist. The writer of this sad news used to meet him very often in 1986-87 onwards when he was in Dainik Jagran stationed at its Delhi bureau office at INS building. He was a gem of a person, serious in nature but a smiling face and of affable nature. God accord peace to the departed noble soul.

Journalists across the country and his old colleagues and social and political friends who worked with him have expressed deep grief over his shocking demise.

OM Shanti.


उपेन्द्र सिंह-

एक बेहद विनम्र और बेहद सलीक़े से अपनी बात रखने वाले अजय जी! उनका जाना अत्यंत दुखद है। ब्रिटिश उच्चायोग में मेरे कार्यकाल के दौरान प्रेस आमंत्रण में उनका नाम सदैव वरीयता नंबर पर रहता था। वे देश विदेश की राजनीति का सरल विश्लेषण करने वाले चुनिंदा हिन्दी पत्रकारों में से एक थे। उनकी स्मृति को सादर नमन।


कृष्णदेव नारायण-

अजय जी के साथ मेरी ढेर सारी यादें जुड़ी हुई हैं, दिल्ली जाने से पहले हम आज अखबार में सहकर्मी थे, उनका स्वभाव बहुत ही मधुर रहा. उनका किसी कर्मचारी से कभी कोई विवाद नही हुआ. उम्र तो जाने की न थी, अजय जी थोड़ा जल्दबाजी कर दी. ईश्वर उनकी आत्मा को शांति प्रदान करें। विनम्र श्रद्वांजलि।

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