Connect with us

Hi, what are you looking for?

Local News Community

टीवी

इस शानदार रिपोर्टिंग के लिए अजीत अंजुम बधाई के पात्र हैं!

Sanjay Kumar Singh : मुजफ्फरपुर के एसकेएमसीएच अस्पताल से Ajit Anjum ने अच्छी लाइव रिपोर्टिंग की। आईसीयू में डॉक्टर नहीं थे। सिस्टर गोल-मोल जवाब दे रही थी। उसे ड्यूटी पर तैनात डॉक्टर का नाम नहीं पता था और अस्पताल सुपरिंटेंडेट बगलें झांक रहे थे। संबंधित डॉक्टर को फोन करने के लिए कहने पर टालते रहे और सीधे डॉक्टर को फोन नहीं ही किया।

बताया गया कि मरीज की मौत हो जाती है तो सिस्टर डॉक्टर को बुला लाती है (कोई समस्या नहीं है)। आयुष्मान भारत। मुझे लगता है कि यह बिहार के अच्छे और बेहतर सरकारी अस्पतालों में होगा।

Shishir Soni : अजीत अंजुम ने आज ऐसे सभी पत्रकारों के लिए एक नजीर पेश की जो अपनी जन्मभूमि से दूर पत्रकारिता में नाम-दाम सब कमा चुके हैं। उन्हे अब अपनी इल्म के सहारे किसी भी मुश्किल घड़ी में अपनी मातृभूमि की सेवा करनी चाहिए। कर्ज़ अदा करना चाहिए।

बिहार के अजीत जी आज शनिवार को मुजफ्फरपुर के उस अस्पताल पहुंचे जहाँ हर दिन बच्चे बीमारी से मर रहे हैं। वहां डॉक्टर्स नदारद मिले। आखिर बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की नींद अब तक क्यों नही खुली? राज्य के स्वास्थ्य मंत्री मंगल पाण्डेय आये और गए। अस्पताल की बदहाली खत्म नही हुई।

अजीत जी के सामने दो बच्चों ने दम तोड़ा। उस पर ये एक गुंडा टाइप का अस्पतालकर्मी बच्चों की माँ को रोने से मना कर रहा था। डांट रहा था। ये सब लाइव हो रहा था। अजीत लम्बे समय बाद आन-सपॉट रिपोर्टिंग कर रहे थे। टीवी9भारतवर्ष के लिए।

कल केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉक्टर हर्षवर्धन मौक़े पर पहुँच रहे हैं। देखते हैं वो क्या कदम उठाते हैं ? वैसे सत्तर बच्चों की मौत के बाद केन्द्र के स्वास्थ्य राज्यमंत्री अश्वनी चौबे को शनिवार को पहले मुजफ्फरपुर के अस्पताल का दौरा करना चाहिए था, लेकिन पता चला कि वे चुनाव में जीत का जश्न मनाने भागलपुर पहुंचे।

इस खबर को पढ़ने के बाद देवघर के पत्रकार मित्रों ने फोन कर बताया अश्वनी चौबे रविवार को भागलपुर मे नही, देवघर में थे। भारी गुस्से में पत्रकार बता रहे थे कि बच्चे मर रहे हैं और वे देवघर के एक ब्राहमण सम्मेलन में भाग लेने उन्हे आए, उन्होंने दावा किया कि दौरे को सरकारी बनाने के लिए अश्वनी चौबे ने देवघर में एम्स को लेकर बैठक बुला ली। मुज़फ़रपुर में बच्चों को बचाने का जतन करते, तो शायद अश्वनी चौबे ज्यादा बड़े ब्राहमण कहलाते!

वरिष्ठ पत्रकार संजय कुमार सिंह और शिशिर सोनी की फेसबुक वॉल से.

Local News Community
Click to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

भड़ास लीगल टीम : Bhadas Legal Team

भड़ास मेल: [email protected]

Latest 100 भड़ास

विज्ञापन