CEO को सुसाइड के लिए मजबूर करने वाले अखबार मालिक को पुलिस पकड़ क्यों नहीं रही?

जयपुर के सांयकाल बुलेटिन टुडे के दिवालियेपन ने आलोक शर्मा की जान ली! जयपुर के सांयकालीन पत्र “बुलेटिन टूडे” के दिवालियेपन से तंग आ कर उसके ceo आलोक शर्मा (पत्रिका में मार्केटिंग हेड रह चुके) आत्महत्या करने को मजबूर हुआ? इसकी चर्चा समाचार पत्रों से लेकर विधानसभा तक में हो चुकी है। इस सांध्यकालीन अखबार प्रबंधन की घोर आलोचना भी हो चुकी है। मगर पर्याप्त सबूत होने के बाद भी पुलिस के हाथ जिम्मेवार बिल्डरों तक नहीं पहुंच पा रहे हैं। कारण है पुलिस के हाथों को मजबूती से सत्ता बल और धन बल ने बांधा हुआ है। राज्य की राजधानी में घटित इस दिल दहलाने वाली घटना की अनदेखी करना सरकार पर भी सवालिया निशान लगा रही है कि वह सब सबूत एकत्रित होने के बाद चुप क्यों है, जबकि गृह मंत्रालय मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के अधीन ही है।

उक्त सायंकाल पत्र के मालिक हैं “गर्विता मल्टी मीडिया” के प्रकाशक मुद्रक सत्य नारायण खण्डेलवाल. सूत्रों का कहना है कि आलोक द्वारा आत्माहत्या से पहले लिखे गए पत्र में इन्हें ही नामजद किया गया था। पर ये पुलिस की गिरफ्त से दूर हैं। इन्होंने पत्र के जरिये जवाब दिया है, जिसे पुलिस छिपा रही है। मगर सूत्र बताते हैं कि पत्र में स्वीकार किया गया है कि आलोक शर्मा को साल भर से वेतन नहीं दिया जा रहा था। ज्ञात हो कि पत्रिका से मजीठिया वेज बोर्ड के कारण आलोक छंटनी के शिकार हुए थे।

आलोक शर्मा

आलोक की आत्महत्या को लेकर कई तथ्य सबकी जुबान पर हैं जो इस प्रकार हैं- आलोक शर्मा का आत्महत्या करने से पहले लिखा गया पत्र. साल भर से शर्मा को वेतन नहीं दिया जा रहा था जिसकी आरोपी ने अपने जवाब से पुष्टि की. शर्मा की माताजी कैंसर की मरीज हैं. शर्मा को दिये गए तीन चेक बैंक से बाउंस हुए. आत्महत्या से पहले लिखे गये शर्मा के पत्र में चालीस व्यक्तियों का जिक्र किया गया है जिनके चलते उन्हें सुसाइड के लिए मजबूर होना पड़ा. इन सभी व्यक्तियों को शर्मा की आत्महत्या के बाद वेतन दिया वो भी चेक से. इन सब कारणों से स्पष्ट है कि शर्मा को किसी साजिश के तहत ही वेतन के चेक देकर बाउंस कराये गये जिसका सबूत बैंक अकाउंट है.

लेखक एस. पारीक जयपुर के वरिष्ठ पत्रकार हैं.

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सीईओ ने सुसाइड किया



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