भ्रष्ट मंत्रियों के खिलाफ मुक़दमे की मंजूरी दे अखिलेश सरकारः राज्यपाल राम नाईक

उत्तर प्रदेश के राज्यपाल राम नाईक भ्रष्टाचार को लेकर सख्त रूख अपनाये हुए हैं। भले ही उनके(राज्यपाल) हाथ में करने के लिये बहुत कुछ न हो, लेकिन वह ऐसे हालात में भी समझौता करने की बजाये नई राह तलाश लेते हैं। यही वजह है जब राज्य के लोकायुक्त एके मेहरोत्रा के माध्यम से राम नाइक को यह पता चला कि अखिलेश सरकार पांच पूर्व मंत्रियों और आठ अधिकारियों से जुड़े भ्रष्टाचार के कुल 13 मामलों में मुकदमा चलाये जाने की मंजूरी लोकायुक्त को नहीं दे रही है तो वह अपने आप को रोक नहीं पाये और उन्होंने मुख्यमंत्री से जल्द इस पर फैसला लेने के लिये दबाव बनाना शुरू कर दिया। राज्यपाल का नजरिया बिल्कुल साफ है कि भ्रष्टाचार और भ्रष्टाचारी चाहें छोटा हो या बड़ा सबके लिये एक जैसा नजरिया और कानून होना चाहिए।

राज्यपाल ने यह उद्गार आज राजभवन आये उत्तर प्रदेश जर्नलिस्ट एसोसियेशन (उपजा) के एक प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात में सवाल-जवाब के दौरान व्यक्त किये। मुलाकात के दौरान राम नाइक ने लोकायुक्त के दर्द को तो पत्रकारों के बीच बांटा ही इसके अलावा भी तमाम सवालों का बेबाकी से जबाव दिया। प्रदेश की बिगड़ी कानून व्यवस्था, पूर्ववर्ती राज्यपाल कुरैशी द्वारा जौहर विवि को अल्पसंख्यक संस्थान की मान्यता दिये जाने संबंधी आदेश, अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष को राज्य मंत्री से बढ़ाकर कैबिनेट मंत्री का दर्जा दिये जाने की अखिलेश सरकार की सिफारिश सहित तमाम मसले चर्चा के दौरान उठे।

राज्यपाल इस बात से बेहद दुखी नजर आये कि प्रदेश में एक मजबूत लोकायुक्त होने के बाद भी राज्य सरकार भ्रष्टाचार को रोकने के लिये उसका भरपूर फायदा नहीं उठा पा रही है। राज्यपाल ने बताया कि उन्होंने सीएम अखिलेश से कहा कि वह जल्द से जल्द संवैधानिक प्रक्रिया अपनाते हुए सभी भ्रष्टाचारियों के खिलाफ जांच का आदेश दें। गौरतलब है, किसी मंत्री-पूर्व मंत्री और सरकारी अधिकारियों के खिलाफ जांच बैठाने के लिये सरकार की सहमति जरूरी होती है। बात जब जौहर विवि की चली तो इस पर उनका यही कहना था कि पूर्ववर्ती राज्यपाल कुरैशी के किसी आदेश को वह न तो पलट सकते हैं और न ही उसकी समीक्षा कर सकते हैं, लेकिन उन्होंने अपनी बात पूरी करते हुए यह जरूर जोड़ दिया कि किसी को एतराज है तो वह अदालत का दरवाजा खटखटा सकता है, इसके अलावा जौहर विवि से अल्पसंख्यक संस्थान का दर्जा छीनने का अधिकार सिर्फ राज्य सरकार के हाथों में है, यह काम अखिलेश सरकार भी कर सकती है और भविष्य में उसकी जगह कोई दूसरी सरकार बैठती है तो उसके पास भी संवैधानिक रूप से इस बात का अधिकार होगा।

चर्चा इस पर भी छिड़ी कि राजभवन ने राज्य सरकार की सिफारिश पर अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष को राज्य की बजाये कैबिनेट मंत्री का दर्जा दिये जाने वाली फाइल पर राजनैतिक कारणों से हस्ताक्षर नहीं किया। इस पर राज्यपाल ने कहा कि उन्होंने इससे असहमत होते हुए भी यूपी सरकार की सिफारिश का विधिक परीक्षण कराया था, जिसका लब्बोलुआब यह था यह कोई ऐसा मसला नहीं है जिसपर तत्काल अध्यादेश लाया जाये। इसको सदन से भी पास कराया जा सकता है। उन्होंने यह भी बताया कि राज्य ही नहीं तमाम केन्द्रीय अल्पसंख्यक आयोगों में भी किसी अध्यक्ष को कैबिनेट मंत्री का दर्जा हासिल नहीं है।

बात कानून व्यवस्था की कि जाये तो इसको लेकर राज्यपाल राम नाइक शुरू से ही काफी चिंतित नजर आ रहे थे। प्रदेश की कानून व्यवस्था कैसे सुधरे इसको लेकर वह समय-समय पर मुख्यमंत्री को बताते और सुझाव देते रहते हैं। इस संद्रर्भ में उनका यही कहना था कि सीएम से उनके संबंध अच्छे हैं और वह संविधान के दायरे में रहकर ही किसी विषय पर मुख्यमंत्री अखिलेश यादव से कुछ कह सकते हैं। राज्यपाल ने लखनऊ के मोहनलाल गंज में एक महिला की हत्या और कथित बलात्कार की घटना का विशेष रूप से जिक्र करते हुए कहा कि भुक्तभोगी के परिवार वाले उससे मिले थे, इसी के बाद मोहनलाल गंज घटना की सीबीआई जांच का फैसला लिया गया और पीड़ित परिवार को आर्थिक मदद भी मिल पाई।

बात जनता दरबार की भी चली। उनसे जब पूछा गया कि आपसे पूर्व के राज्यपाल कुरैशी जनता दरबार लगाकर जनता की समस्याएं सुनते थे तो राम नाइक ने कहा कि जनता दरबार लगाना जनप्रतिनिधियों का काम है। राजभवन में कोई शिकायत लेकर आता है तो उसका निपटारा करने का उनके द्वारा भरसक प्रयास किया जाता है। इस मौके पर उत्तर प्रदेश जर्नलिस्ट एसोसियेशन(उपजा) के संरक्षक एवं वरिष्ठ पत्रकार अजय कुमार, प्रदेश महामंत्री रमेश चन्द्र जैन, कोषाध्यक्ष प्रदीप शर्मा, लखनऊ इकाई के अध्यक्ष अरविंद शुक्ला, उपाध्यक्ष सुशील सहाय और मंगल सिंह आदि ने पत्रकारों से जुड़ी समस्याओं का एक ज्ञापन भी राज्यपाल को सौंपा। राज्यपाल ने मुख्यमंत्री से मिलकर पत्रकारों की समस्याओं का जल्द से जल्द निराकरण करने का आश्वासन दिया।

 

लेखक अजय कुमार लखनऊ में पदस्थ हैं और यूपी के वरिष्ठ पत्रकार हैं। कई अखबारों और पत्रिकाओं में वरिष्ठ पदों पर रह चुके हैं। अजय कुमार वर्तमान में ‘चौथी दुनिया’ और ‘प्रभा साक्षी’ से संबद्ध हैं।



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