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जब भी जीवन में संकट आया, अमर उजाला ने मेरा साथ दिया!

शैलेश अवस्थी-

सत्य का प्रहरी “अमर उजाला”… अपने 75 साल के सफर में “अमर उजाला” ने कई उतार-चढ़ाव देखे और प्रतिमान गढ़े। आज़ादी के बाद देशहित, विकास और सामाजिक सरोकारों को सदैव आगे रखा। पाठकों की रुचि, प्राथमिकता और उनके मतलब की सूचनाएं उन तक समय पर पहुंचाना अपना धर्म समझा। अपने मजबूत इरादों और उद्देश्यों से कभी कोई समझौता नहीं।

चाहे हल्ला बोल का दौर हो, या फिर कोई चुनौती, कितना भी नुकसान हुआ हो, डटकर सामना किया और किंचित न डिगा। सत्य की रक्षा के लिए मोमबत्ती सा जला, ज्वाला बना और फिर सूर्य की भांति उजाला करता रहा, बिना किसी भेदभाव और लागलपेट के…सीधी बात..कोई मिर्च मसाला नहीं। अपने कर्मचारियों का परिवार की तरह ख्याल और संपादकों को “फ्री हैंड”..। कानपुर में अच्युतानंद मिश्र, वीरेन डंगवाल, शशि शेखर, शम्भूनाथ शुक्ल, हरीशजी, प्रताप सोमवंसी, प्रदीप श्रीवास्तव, दिनेश जुयाल, निशीथ जोशी जैसे दिग्गज पत्रकार संपादक रहे तो व्यासजी, इंदुशेखर पंचोली और विजय त्रिपाठी जैसे धुरंधर इस यात्रा को तेजी से आगे बढ़ा रहे हैं।

75 साल पहले स्व.डोरीलाल अग्रवाल और स्व. मुरारीलाल माहेश्वरी ने जिस “अमर उजाला” की नींव रक्खी, उस पर स्व. अतुल माहेश्वरी ने बुलंद इमारत खड़ी कर दी। आदरणीय राजुल माहेश्वरी ने इस पर कई और मंजिलें बढ़ा दीं। अब तीसरी पीढ़ी इसमें नित नए आयाम जोड़कर इसे और गति दे रही है। अब इसका विस्तार 6 राज्यों और दो केंद्र शासित प्रदेशों में पहुंच चुका है। हर तरफ सत्य, उम्मीद, हौसले और सकारात्मक सोच का उजाला फैला रहा है।

मेरा सौभाग्य है कि मैं इस अखबार से 27 साल जुड़ा रहा। प्रबंध निदेशक से लेकर निदेशकों और नामीगिरामी संपादकों को काम करते करीब से देखा। जब भी जीवन में संकट आया, अमर उजाला ने साथ दिया। यह मेरा अन्नदाता भी है और मार्गदर्शक भी। ईश्वर से प्रार्थना है कि यह खूब फूले-फले, आगे बढ़े और नित नए प्रतिमान गढ़े। 75 साल पूरे करने पर “अमर उजाला” को बधाई…शुभकामनाएं।

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