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पीपली लाइव : मीडिया ने घेर रखा है अरुणा शानबाग के गुनहगार सोहन को, जीना हराम हुआ

चार दशक से ज्यादा समय तक कोमा में रहकर गत 18 मई को अपनी जान गंवाने वाली नर्स अरुणा शानबाग का गुनहगार सोहनलाल सिंह आखिरकार अब सबके सामने आ चुका है. सोहनलाल इन दिनों गाजियाबाद के पार्पा गांव में मजदूरी कर रहा है. मीडिया ने उसका जीना दुश्वार कर रखा है।

चार दशक से ज्यादा समय तक कोमा में रहकर गत 18 मई को अपनी जान गंवाने वाली नर्स अरुणा शानबाग का गुनहगार सोहनलाल सिंह आखिरकार अब सबके सामने आ चुका है. सोहनलाल इन दिनों गाजियाबाद के पार्पा गांव में मजदूरी कर रहा है. मीडिया ने उसका जीना दुश्वार कर रखा है।

सबके सामने आने के बाद सोहनलाल को एक अजीब तरह की परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. उस परेशानी का नाम है मीडिया. जी हाँ जब से मीडिया को सोहनलाल के बारे में पता चला है, मीडिया ने उन्हें घेर रखा है. चार दिन से मीडिया के लोग उसे और उसके परिवारवालों को घेरे हुए हैं.

फिल्म ‘पीपली लाइव’ की तरह सोहनलाल के घर के बाहर भी मीडिया का जमावड़ा लगा रहता है. सोहनलाल मीडिया का सवालो का जवाब देते-देते परेशान हो चूका है. मीडिया के लोग कभी भी उसके घर पर आ जाते है. सोहनलाल के अनुसार मीडिया वाले न उन्हें सोने दे रहे है और न ही कोई काम करने दे रहे है. 

गांव में इधर-उधर जाने पर भी मीडिया वाले पीछे-पीछे दौड़ने लगते हैं. सोहनलाल ने बताया कि मीडिया वालों की वजह से उसकी जिंदगी नरक बन गई है. गौरतलब है कि सोहनलाल को एक टीवी चैनल के मीडिया वाले रात को तीन बजे उसे घर से उठकर ले गए.

इस बारे में सोहनलाल के बड़े बेटे किशन का कहना है कि मीडिया को किसी की जिंदगी में इस तरह दखल देने का कोई अधिकार नहीं है. किशन के अनुसार उन्हें नहीं पता कि 42 साल पहले क्या हुआ था, लेकिन उनके पिता 10 साल की सजा काट चुके है. किशन ने बताया कि मीडिया वालों की वजह से उसका परिवार बेहद तनाव में है. उनके बच्ची ठीक से खाना भी नहीं खा रहे है.

बता दे की सोहनलाल मुंबई के केईएम हॉस्पिटल में सफाईकर्मी था. उसने 27 नवंबर 1973 को नर्स अरुणा के साथ ज्यादती की कोशिश की. सोहनलाल को इस मामले में सात साल की सजा सुनाई गई थी. अपनी सजा काटने के बाद से वह लापता हो गया था.

न्यूज ट्रैक से साभार

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