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मोदी के साथ विदेश दौरे पर गए एक टीवी संपादक की पीएम को नजदीक से प्रणाम न कर पाने की अपार पीड़ा!

Facebook post by Atul Kumar Agrawal about Modi media; includes Hindi text and blue hashtags, with a video thumbnail below showing a man taking a selfie outdoors and a bold Hindi banner.

नई दिल्ली/बिश्केक। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार और भाजपा के पक्ष में खड़े रहने वाले मीडिया के एक हिस्से को अक्सर ‘गोदी मीडिया’ कहकर निशाना बनाया जाता रहा है। लेकिन किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक से सामने आई एक रिपोर्ट ने इसी मीडिया के सामने एक अलग सवाल खड़ा कर दिया है—जिस मीडिया ने मोदी सरकार के समर्थन में अपनी पूरी ताकत लगा दी, क्या उसी मीडिया को प्रधानमंत्री के करीब तक पहुंचने का अधिकार भी नहीं मिला?

‘हिन्दी ख़बर’ के प्रधान संपादक अतुल अग्रवाल की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि बिश्केक में भारतीय पत्रकारों के साथ जिस तरह का व्यवहार हुआ, उसने मीडिया और सत्ता के रिश्ते पर सवाल खड़े कर दिए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और विदेश मंत्री एस. जयशंकर की मौजूदगी में भी कथित तौर पर भारतीय पत्रकारों को परेशानियों का सामना करना पड़ा।

मुद्दा सिर्फ यह नहीं है कि पत्रकारों को प्रधानमंत्री से मिलने या सवाल पूछने का कितना मौका मिला। बड़ा सवाल यह है कि क्या विदेश में भारत का प्रतिनिधित्व करने पहुंचे भारतीय पत्रकारों के साथ सम्मानजनक व्यवहार सुनिश्चित करना सरकार और भारतीय मिशन की जिम्मेदारी नहीं थी?

सवाल सीधा है—अगर सरकार समर्थक माने जाने वाले पत्रकारों को भी सत्ता के गलियारों में सहज प्रवेश नहीं मिलता, तो फिर ‘गोदी मीडिया’ की पूरी बहस आखिर किसके लिए है?


मोदी के साथ विदेश गई गोदी मीडिया को पीएम का दर्शन अभिवादन तक नहीं करने दिया गया। साथ गए अतुल अग्रवाल ने गोदी मीडिया की भरपूर बेइज्जती का साहस के साथ भंडाफोड़ किया है। उन्हें साहस दिखाने के लिए बधाई…
-यशवंत सिंह, भड़ास एडिटर

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