ओम थानवी जी से कहूंगा कि आपका लंबा दौर चला, अब दूसरे लोगों को आने दीजिए : अवधेश कुमार

Awadhesh Kumar : ओम थानवी जी का दर्द… मैं ओम थानवी जी की पोस्ट पढ़ता हूं, पर उस पर टिप्पणियां कभी-कभार करता हूं। जब वे साहित्य, कला, संस्कृति, सिनेमा, समाज आदि पर लिखते हैं तो उसमें अंतःशक्ति होती है- शब्द, सोच, प्रस्तुति सभी स्तरों पर। राजनीति पर खासकर भाजपा, संघ, नरेन्द्र मोदी पर जब वे लिखते हैं तो भी पढ़ता हूं, पर जो भाव आता है उसे कभी व्यक्त नहीं करता। न करना चाहूंगा। लेकिन आज उन्होंने जो पोस्ट लिखा, उस पर टिप्पणी के रुप में अलग से लंबा पोस्ट लिखने से नहीं रोक पा रहा हूं। अगर उनको कष्ट हो तो मैं पहले ही क्षमा मांग लेता हूं। मैं उनसे छोटा हूं, इसलिए वे अवश्य क्षमा कर देंगे।

#AwadheshKumar

उन्होंने लिखा है कि दूरदर्शन वाले दो ढाई महीने से मुझे अब नहीं बुलाते। पहले भी बुलाते थे तो उन्हीं की गरज पूरी करता था। उनके अनुसार दूसरे कई लोगों को भी आजकल नहीं बुलाया जाता। पता नहीं कौन किसकी गरज पूरी करता था। चाहे ओम थानवी जी हों या अवधेश कुमार….हम सब अपनी भूमिका निभाते हैं लेकिन हम कहें कि हमारी कोई गरज ही नहीं दूसरे की गरज है तो इसमें अहंमन्यता का बोध होता है। बहरहाल, यह कहने की आवश्यकता नहीं कि वे क्या बताना चाह रहे हैं। यानी जबसे केन्द्र की सत्ता बदली है तबसे उनको बुलाया जाना बंद कर दिया गया है। मैं कह रहा हूं कि मुझे दूरदर्शन ने पिछले 10 वर्षों में एक बार भी नहीं बुलाया। क्यों? क्या मुझे विषयों की समझ नहीं? क्या मैं अपनी बात ठीक से नहीं रख पाता? क्या मेरी पत्रकारिता में खोट थी? क्या देश में मेरा नाम नहीं है? मेरे सुनने वाले, चाहने वाले किसी से कम हैं? यह मेरा दंभ नहीं है लेकिन किसी को संदेह हो तो सर्वेक्षण करा ले।

मेरे अंदर भी सवाल उठते थे, पर मैंने कभी नहीं लिखा। दूरदर्शन को संप्रग सरकार के दौरान जिस तरह से चलाया गया, वह कोई छिपा तथ्य नहीं है। वहां पैनल में नाम तक मंत्रालय से तय होने लगा था। मुझे पता है वहां के अधिकारियों ने मेरा नाम कई बार भेजा लेकिन स्वीकृत नहीं हुआ। फिर कुछ लोग घर पर ही आकर समय-समय पर किसी कार्यक्रम के लिए या किसी विषय पर बात करके ले जाते थे और दिखाते थे। उसका तो मुझे पारिश्रमिक भी नहीं मिलता था। देश के कुछ ऐसे पत्रकार, जिनका नाम नहीं लेना चाहूंगा यह प्रमाण पत्र देते थे कि किस पत्रकार को बराबर आना चाहिए और किसे नहीं।

दूरदर्शन तो छोड़िए, ओम थानवी जी के नेतृत्व में निकलने वाला अखबार जनसत्ता न जाने कितने वर्षों से मेरा कोई लेख नहीं छापता। क्यों? मैंने बीच-बीच में उनके मेल पर और संपादकीय पृष्ठ के मेल पर लेख भेजे। छपा नहीं। क्या मुझे लिखना नहीं आता? अगर अखबार में लेखों के चयन में निष्पक्षता और ईमानदारी हो तो अवधेश कुमार का लेख छपना चाहिए। जाहिर है, यह मनमर्जी है जिसे मैं गैर ईमानदारी और अलोकतांत्रिक व्यवहार ही कहूंगा। जब वे छापते नहीं तो मैंने वहां भेजना लगभग बंद कर दिया। मैंने कभी फोन करके पूछा भी नहीं कि आप मुझे क्यों नहीं छापते।

हालांकि एक समय देश के सक्रिय लोगों के लिए सबसे प्यारा अखबार जनसत्ता इस समय कराह रहा है। उसके पाठकों की संख्या देख लीजिए। फिर भी उस अखबार के पूर्वज पत्रकारों के कारण उसके प्रति थोड़ा सम्मान लोगों के मन में बचा हुआ है। क्या मैं इसे मुद्दा बनाउं कि आम थानवी जी मुझे नहीं छापते हैं? मेरे मित्र अक्सर पूछते हैं कि आप जनसत्ता में नहीं लिखते क्या? इसके जवाब में मैं या तो चुप रह जाता हूं या बोलता हूं जनसत्ता मुझे नहीं छापता। बस।

मैं सबसे ज्यादा इंडिया न्यूज पर जाता रहा हूं। इस कारण कई बार लोगों ने अफवाह भी फैलाई कि अवधेश कुमार को वहां से मोटा रकम दे दिया गया है, जबकि मुझे प्रति बहस उतना ही निर्धारित धन मिलता है जितना अन्य अतिथियों को मिलता है। संयोग देखिए कि नरेन्द्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद यानी 26 मई के बाद मेरे पास इंडिया न्यूज से फोन आना लगभग बंद हो गया। जून जुलाई में तो लगभग फोन आया ही नहीं। तो क्या मैं ये मानूं कि यहां भी मोदी का प्रभाव हो गया? मैं जानता हूं कि ऐसा नहीं है।

फिर हर व्यक्ति का दौर होता है। मैं ओम थानवी जी से कहूंगा कि दूरदर्शन, राज्य सभा टीवी आदि पर आपका लंबा दौर चला, अब दूसरे लोगों को आने दीजिए। उनका कुछ दिन दौर चलेगा। मैं यह तब लिख रहा हूं जब मुझे दूरदर्शन नहीं बुलाता है। राज्य सभा भी जबसे आरंभ हुआ मुझे तीन या चार बार बुलाया है। मैं मानता हूं कि यह ठीक नहीं है। वहां मेरे मित्र चाहते हैं कि मैं नियमित आउं लेकिन व्यवस्था तंत्र की अपनी सोच है। तो क्या मैं शिकायत करने लग जाउं? मुझे शिकायत करने या इस व्यवस्था के खिलाफ आवाज उठाना चाहिए, पर मैंने आज तक नहीं उठाया, क्योंकि मेरे पास काम की कभी कमी रहती ही नहीं। पत्रकारिता के अलावा अपना सार्वजनिक जीवन भी है और उसमें भी व्यस्तता इतनी रहती है कि इन सब विषयों पर लड़ने या प्रतिक्रिया देने का समय ही नहीं रहता।

मैं अगर कभी शिकायत करुंगा तो व्यवस्था तंत्र में सुधार के लिए ताकि वहां निष्पक्षता, ईमानदारी और पारदर्शिता से अतिथियों का चयन हो। जो योग्यतम हो ज्ञान में और उस ज्ञान को ठीक प्रकार से अभिव्यक्त करने में भी सक्षम हो…… विषय और बहस के अनुरूप उसमें आवश्यक गतिशीलता और रोचकता लाने में माहिर है उन्हें ही ज्यादा अवसर मिलना चाहिए। जाहिर है, फिर किसी को शिकायत नहीं रह जाएगी।

दोस्तों मैं आगे राज्य सभा टीवी को लेकर एक पूरा पोस्ट लिखूंगा।

वरिष्ठ पत्रकार अवधेश कुमार के फेसबुक वॉल से.

मूल पोस्ट….

मोदी राज आने के बाद ओम थानवी को परिचर्चा के लिए नहीं बुलाता दूरदर्शन

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‘इंडिया न्यूज’ ने अवधेश को इतना धन दे दिया है कि उनसे अपने अनुसार बातें बुलवाता है!

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Comments on “ओम थानवी जी से कहूंगा कि आपका लंबा दौर चला, अब दूसरे लोगों को आने दीजिए : अवधेश कुमार

  • rakesh upadhyay says:

    चूँकि देश कांग्रेस से ऊब चूका है और एक ही पैनल में दो दो कोंग्रेसी प्रवक्ताओ की क्या जरुरत …. दूरदर्शन को बधाई जिसने इतना उपकार किया है हम पर थानवी को ब्लैक लिस्टेड करके …. अवधेश जी को इस लेख के लिए बधाई और साधुवाद….

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  • lanka mein shri ram ke aane ke baad satta parivartan per ravan samarathkon mein machi bhagdad !!!!!

    RAVAN KA BAHUT PRACHALILT VAAKY “SHRI MAT KHO” KEE TARAH THAANWI JAISE LOGON DWARA AJ KE SARVSHRESHTHA PATRKARON MEIN SE EK AWADHESH KUMAR JI KO BULAAYE JAANE PER SIRF HANSA JAA SAKTA HAI !! HAHAHAHAHAHAHAHA!!!

    VAISE AWADHESH JI APKA YE LEKH KATU SATYA KO UJAAGAR KARTA HAI, PEEDA TO HOGI HI !!

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  • AB RASHTRAVADIYON KE KHILAAF BOLNE WALON KA JAMAANA CHALA GAYA HAI TO LAMBE SAMAY SE DESHDROH KEE MALAAAI CHAATNE WALON KA AGYAATWAAS AANA SWABHAWIK HI HAI AUR ROJI ROTI CHHINNE SE AB NAMAK MIRCHI LAGI ROTI KHAANE KE DIN AANE PAR MIRCHI LAGNA TO SWABHAVIK HAI, HAAN UNKO KUCHH JYAADA LAGTI HAI JINHONE NE NAMAK MIRCHI KO BHULAAKAR PATA NAHIN KAUN KAUN SE RUS PEENE SHURU KAR DIYE THE ??

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  • ओम जी उम्र की ढलान पर मानसिक रूप से कमजोर होगाए…cong+ आप के समर्थन मे लिखते लिखते वो आम cong कार्यकर्ता से भी कमजोर हो गए इनकी बुराई पसंद नहीं है …जब तक जी हजूरी करो ठीक सवाल पूछो तो दुश्मन……

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  • It is better not to talk to foolish people or involve in any serious discussion as they will always talk wayward. My point was not ignoring of Om Thanvi by DD or any other news agency.but on the claims of so-called senior journalist Mr Awadhesh Kumar that he is a well known journalist and he is a revered soul for some people and youngsters in vernacular media.

    There is no point where Awadhesh can compare himself with Om Thanvi or Rajendra Mathur or Prabhash Joshi or Surendra Kishore.
    He is in fact living in a fools’s paradise and must come out of ” aatma -mugdhata” and move around his own Muzaffarpur city where he may gauge his popularity , name and fame.
    I will advise him to go in for an introspection and should select a man or journalist of his own stature to comment on discuss upon in such a prestigious and relaibale portal like Bhadas.

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  • danish shahbaz pasha says:

    Avdesh ji duniya aapke baare men jaanti hai ki aap patrakaar kam or b.j.p. ke pirvakta zyada ho…to bhala bataaiye ki ek hi debate men 2 2 b.j.p. ke pirvaktaaon ki kya zaroorat hai…..apni maansikta badalye sab news channels aapko bulaayenge

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