दिग्गजों द्वारा पर्चा भरने के बाद अवध और पूर्वांचल की राजनीति गरमाई

लखनऊ में कांग्रेस से आचार्य, सपा से पूनम सिन्हा का नामांकन, अखिलेश ने आजमगढ़, सुल्तानपुर से मेनका ने भरा पर्चा

अजय कुमार, लखनऊ

उत्तर प्रदेश में पांचवें चरण के चुनाव के लिए आज प्रमुख रूप से समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने आजमगढ़ से तो पूनम सिन्हा ने लखनऊ से नामांकन किया। वहीं,लखनऊ से ही कांगे्रस के आचार्य प्रमोद कष्णन ने भी अपना नामांकन कर दिया है। आजमगढ़ में अखिलेश का मुकाबला भाजपा के नेता और भोजुपरी स्टार दिनेश लाय यादव उर्फ निरहुआ से होगा। 2014 के लोकसभा चुनाव में आजमगढ़ से मुलायम सिंह यादव जीते थे, अबकी से वह अपनी पुरानी संसदीय सीट मैनपुरी से चुनाव लड़ रहे हैं।

नामांकन के समय सपा के कई नेताओं के अलावा बसपा के सतीश मिश्रा भी मौजूद थे। यहां अखिलेश के खिलाफ कांगे्रस ने अपना कोई प्रत्याशी नहीं उतारा है,जबकि लखनऊ में अब बीजेपी के राजनाथ सिंह और सपा की पूनम सिन्हा तथा कांगे्रस के आचार्य के बीच त्रिकोणीय मुकाबले की संभावना जताई जा रही है। वहीं सुल्तानपुर से भाजपा प्रत्याशी मेनका गांधी ने भी नामांकन कर दिया है।

पहली बार मेनका 1984 में अमेठी लोकसभा सीट से अपने जेठ राजीव गांधी के खिलाफ निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर चुनाव मैदान में उतरी थीं। उस दौरान अमेठी अलग जिला नहीं था। लिहाजा उन्होंने सुलतानपुर कलेक्ट्रेट में ही नामांकन किया था। उस दौरान पूरे देश की नजर अमेठी लोकसभा सीट के परिणाम पर थीं। अब 35 वर्षों के बाद आज दूसरी बार फिर उन्होंने इसी कलेक्ट्रेट में अपना नामांकन दाखिल किया, पर भाजपा प्रत्याशी के तौर पर। इस बार भी देश की निगाहें सुलतानपुर सीट पर रिजल्ट आने तक टिकी रहेंगी।

बात लखनऊ से सपा के टिकट से चुनाव लड़ रही पूनम सिन्हा की कि जाए तो उनके पति शत्रुघ्न सिन्हा भारतीय जनता पार्टी से बगावत करके कांगे्रस के टिकट पर पटना साहिब से चुनाव लड़ रहे हैंै, लेकिन लखनऊ में पूनम सिन्हा के लिए जीत के हालात वैसे नहीं बन पाए हैं जैसे उनके पति और गुजरे जमाने के नायक और खलनायक शत्रुघ्न सिन्हा सोचते थे। बॉलीवुड में शॉटगन के नाम से मशहूर शत्रुघ्न सिन्हा ने पटना साहिब में अपना टिकट पक्का होने के बाद लखनऊ में अपनी पत्नी पूनम सिन्हा के लिए सियासी गोटियां बेहद खूबसूरती से बिछाई थी, अगर उनकी गोटी पिटती नहीं तो सिन्हा परिवार में एक नहीं, दो-दो सांसद हो जातें। मगर कांग्रेस ने शत्रुघ्न पर इतनी मेहरबानी करना उचित नहीं समझा और उसने शाटगन को ठेंगा दिखाते हुए लम्बे समय से लखनऊ से चुनाव लड़ने की की चर्चा में छाए रहे आचार्य प्रमोद कृष्णन का टिकट तुरंत घोषित कर दिया। पूनम सिन्हा के चुनाव लड़ने की खबर आने के बाद कांग्रेस को आर्चाय का नाम फाइनल करने में 24 घंटे भी नहीं लगे।

बताते चलें शत्रुघ्न सिन्हा की पत्नी पूनम सिन्हा ने 16 अप्रैल को लखनऊ में समाजवादी पार्टी की सांसद डिम्पल यादव की उपस्थिति में समाजवादी पार्टी की सदस्यता ली थी। उनको लखनऊ से गठबंधन का उम्मीदवार घोषित किया जाएगा। लखनऊ में पांचवें चरण के दौरान 6 मई को मतदान होना है। नामांकन की आखिरी तारीख आज(18 अप्रैल) है। लखनऊ में राजनाथ सिंह के कल नामांकन के बाद गठबंधन ने पूनम सिन्हा के रूप में अपना दांव खेला है। पूनम सिन्हा को टिकट मिलना कोई संयोग नहीं है। शत्रुघ्न सिन्हा ने समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव से मुलाकात के दौरान उन्होंने पूनम के लिए लोकसभा सीट का टिकट मांगा था। समाजवादी पार्टी चाहती थी कि पहले शत्रुघ्न सिन्हा कांग्रेस में शामिल हो जाएं, ताकि लखनऊ सीट से विपक्ष का एक साझा उम्मीदवार मैदान में हो, लेकिन यह हो नहीं सका।

कांग्रेस ने समाजवादी पार्टी और शत्रुघ्न सिन्हा की उम्मीदों को ठेंगा दिखाते हुए लखनऊ से आचार्य प्रमोद कृष्णन को टिकट दे दिया। आचार्य प्रमोद कृष्णन कल्कि पीठाधीश्वर हैं और 2014 में कांग्रेस के टिकट पर संभल से चुनाव लड़ चुके हैं। हालांकि उन्हें मात्र 16 हजार वोट मिले थे और वह पांचवे स्थान पर रहे थे। आचार्य प्रमोद कृष्णन को कांग्रेस ने छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश और राजस्थान में स्टार प्रचारक की तरह उतारा था। सॉफ्ट हिन्दुत्व के मुद्दे को धार देने और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की काट के लिए इन तीनों प्रदेशों में प्रमोद कृष्णन की खूब सभाएं करवाई गई थीं। वह अपने भाषणों में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर खुलकर हमले बोलते हैं। आचार्य प्रमोद कृष्णन ट्विटर पर भी काफी सक्रिय रहते हैं।

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