जिम कॉर्बेट जंगल में उग्र हाथियों के पैरों तले कुचले जाने से बाल-बाल बचे पत्रकार संजय शर्मा और उनके परिजन

Sanjay Sharma : रामनगर के खूबसूरत रिजोर्ट में बैठ कर जब हमने जिम कॉर्बेट जंगल की सफारी करने की सोची तब हमे सपने में भी अंदाजा नहीं था कि यह सफारी जिंदगी के सबसे रोमांच का हिस्सा बन जाएगी. रिजोर्ट के मैनेजर ने बताया कि जंगल के मुख्य चार रास्तों की बुकिंग ऑनलाइन होती है जिसकी कीमत दो हजार रुपया होती है मगर अगले दस दिन की बुकिंग पूरी हो चुकी है. रामनगर के सहारा समय टीवी चैनल के मित्र ने भी कोशिश की मगर कामयाबी नहीं मिली. फिर थोड़ी कोशिशें और की गईं और एक ट्रेवल एजेंट 6 हजार में राजी हो गया. हम झिरना गेट से जंगल में घुसे. उससे पहले झमाझम बारिश से मौसम सुहाना हो गया था. जंगल का रास्ता पतला और काफी टूटा फूटा है.

हमारे साथ दो तीन सफारी और भी थी. जंगल में घुसे अभी दस मिनट भी नहीं हुए थे कि सबकी जान सुखा देने वाला मंजर सामने था. सामने हाथियों का एक झुंड जा रहा था. पता नहीं उसमे से कुछ हाथियों को क्यों लगा कि हम उन पर हमला करने वाले हैं. वह पलटे और उसमें से एक हाथी ने हमारी तरफ दौड़ लगा दी. हड़बड़ा कर सभी जिप्सी ड्राइवर बैक गियर में अपनी जिप्सी लेकर भागे. हम पीछे भाग रहे थे और सामने से गुस्से में हाथी हमारी तरफ भागता हुआ आ रहा था. सभी जान रहे थे कि यदि यह जिप्सी तक पहुंच गया तो सबका अंत निश्चित है. बच्चे भी घबरा गए. तभी मुझे लगा कि इस अंत की भी फोटो होनी चाहिये. मैं जिप्सी का डंडा पकड़ कर खड़ा हुआ और लगातार अपनी तरफ भागते हुए हाथी की फोटो खींचने लगा. लगा कि अगर अंत हो गया तो यह फोटो धमाल मचा देगी. मगर फिर हाथी को हम पर दया आई और वो रास्ता बदल कर चला गया.

हमारे ड्राईवर ने मुझसे कहा कि वह 9 साल से जिप्सी चला रहा है मगर उसने मेरी तरह हिम्मत वाला आदमी नहीं देखा. मुझसे पूछा कि मुझे डर नहीं लगा. मैं बिना बोले मुस्कुरा दिया- जिंदगी में इतनी बार मौत पास से देखी है कि शायद उसका डर खत्म हो गया है. मगर उससे यह कहने का कोई अर्थ न था इसलिए सिर्फ एक मुस्कान ने काम पूरा कर दिया. आगे मचान के पास हमारे बेहद शरीफ गाइड ने कहा कि कल इस इलाके में टाइगर पानी पीने आया था. कुछ देर रुक कर उसका इन्तजार करते हैं. मगर जब आधा घंटा बीतने पर भी नहीं आया तो हम चलने को हुए. तभी पहाड़ के एक कोने से टाइगर निकला और नदी क्रॉस करते हुए दूसरी तरफ चला गया. हालांकि इस दौर में फोकस सेट न होने पर उसका फोटो बहुत अच्छी नहीं आ पाई. जैसे ही उधर से निकल रहे लोगों ने सुना कि हमने टाइगर देखा है तो वह सब भी इकट्ठा हो गए मगर उन्हें कामयाबी नहीं मिली.

आगे चल कर फिर हाथियों का झुण्ड फिर मिला. बेहद छोटा हाथी का बच्चा भी इस झुण्ड में था. इस बार भी उनके नेता हाथी ने कई बार आगे आकर हमे धमकाना चाहा मगर तब तक कई जिप्सी देख कर उनकी आगे आने की हिम्मत नहीं हुई. मैंने कहा वह रास्ता पार करके पानी पीना चाहते हैं इसलिए हमे रास्ता छोड़ देना चाहिए और हम आगे आ गए. रास्ते में ढेर सारे हिरन, मोर और सुन्दर चिड़िया भी मिली. यहाँ सबसे अच्छी जगह ढिकाला है मगर उसकी बुकिंग कराकर एक रात वहीं जंगल में रुकना होता है. अगली बार एक रात वहीं गुजारेंगे. फिलहाल जो कुछ जिया देखा वह सब जिंदगी में कभी न भूलने वाला हिस्सा बन गया.

लखनऊ से प्रकाशित 4पीएम और वीकएंड टाइम्स के संस्थापक व संपादक संजय शर्मा के एफबी वॉल से.

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