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वनस्थली विद्यापीठ में चल रहा फर्जी नियुक्तियों का गोरखधंधा, शिकायतकर्ता प्रोफेसर को अहित की आशंका

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श्रीमान् न्यायप्रिय सुधीजनों,

विषय: ‘वनस्थली विद्यापीठ में फर्जी नियुक्तियों के सन्दर्भ में पत्राचार’

विनम्रतापूर्वक निवेदन है कि 48 केन्द्रीय, 322 राज्य, 128 डीम्ड, 192 प्राइवेट, राष्टपति भवन, प्रधानमन्त्री कार्यालय, मानव संसाधन मंत्रालय, श्रीमती स्मृति जुबी इरानी, सुप्रीम कोर्ट ऑफ़ इण्डिया, राजस्थान उच्च न्यायालय, राजस्थान सरकार (श्रीमती वसुंधरा राजे एवं महामिहम श्री कल्याण सिंह), UGC, NAAC, जमशेदपुर सिविल कोर्ट एवं थाना, जयपुर सिटी पुलिस कमिशनर सहित देश के कई नामी न्यूज चैनलों एवं नेशनल मीडिया तक बात मेरी बात पहुंचे इसीलिए पत्राचार कर रहा हूँ.

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श्रीमान् न्यायप्रिय सुधीजनों,

विषय: ‘वनस्थली विद्यापीठ में फर्जी नियुक्तियों के सन्दर्भ में पत्राचार’

विनम्रतापूर्वक निवेदन है कि 48 केन्द्रीय, 322 राज्य, 128 डीम्ड, 192 प्राइवेट, राष्टपति भवन, प्रधानमन्त्री कार्यालय, मानव संसाधन मंत्रालय, श्रीमती स्मृति जुबी इरानी, सुप्रीम कोर्ट ऑफ़ इण्डिया, राजस्थान उच्च न्यायालय, राजस्थान सरकार (श्रीमती वसुंधरा राजे एवं महामिहम श्री कल्याण सिंह), UGC, NAAC, जमशेदपुर सिविल कोर्ट एवं थाना, जयपुर सिटी पुलिस कमिशनर सहित देश के कई नामी न्यूज चैनलों एवं नेशनल मीडिया तक बात मेरी बात पहुंचे इसीलिए पत्राचार कर रहा हूँ.

वनस्थली विद्यापीठ में फर्जी नियुक्तियों का गोरखधंधा चल रहा है. जिसका मैंने मुखर विरोध किया है. जिसका सबसे बड़ा प्रमाण इसका पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग है. जिसमें एक ऐसे व्यक्ति को जो विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के अनुसार असिस्टेंट प्रोफ़ेसर के लिए न्यूनतम अभियोग्यता NET भी नहीं रखता उसे बिना पीएचडी डीग्री के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के विभागाध्यक्ष के पद पर नियुक्त किया गया है. डीम्ड यूनिवर्सिटीज़ के आड़ में फर्जी नियुक्तियों, कम वेतनमान एवं सेवा शर्तों के उल्लंघन के मामले यहाँ आम हैं. ऐसे कई अन्य विभागों में भी इस तरह के गोरखधंधे चल रहे हैं.

National Assessment and Accreditation Council (NAAC) के वेबसाइट में स्पष्ट उल्लेख है कि यदि कोई भी विश्वविद्यालय नियमों एवं सेवा शर्तों के उल्लंघन का दोषी पाया जाता है तो उसकी पुनः assessment and accreditation की संभावना हो सकती है एवं संबध विश्वविद्यालय को प्रदत्त ‘A’ ग्रैड वापस भी लिया जा सकता है. अतः NAAC द्वारा प्रदत्त ‘A’ ग्रेड का भी पुनर्मूल्यांकन होना चाहिए.

मानव संसाधन मंत्री श्रीमती स्मृति जुबी इरानी जी एवं विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के वर्तमान चयरमैन प्रो. वेद प्रकाश जी से मेरा ख़ास आग्रह है की मामले की गंभीरता को देखते हुए अविलंब एक जांच कमिटी गठित कर डीम्ड यूनिवर्सिटीज़ के नाम पर हो रहे फर्जीवाड़े में संलिप्त विश्वविद्यालय के कुलपति, इसके ऑडिट एवं इसके अन्य पदाधिकारियों के फर्जीवाड़े की जांच की जाय.

चूँकि वनस्थली विद्यापीठ महिलाओं का विश्वविद्यालय है अतएव पूरे घटनाक्रम को उजागर करने के बदले में वनस्थली विद्यापीठ प्रशासन (कुलपति सहित एक ही परिवार द्वारा संचालित) द्वारा भविष्य के किसी भी घिनौने अन्याय, षड्यंत्र एवं दुर्घटना हेतु पूर्व सूचना दे रहा हूँ.

इसके अलावा यदि भविष्य में मुझे विश्वविद्यालय परिसर या परिसर के बाहर किसी भी प्रकार का शारीरिक, मानसिक एवं अकादमिक क्षति पहुंचे या पूर्व नियोजित षड्यंत्र के तहत किसी भी मामले में फंसाया जाय तो सीधे-सीधे विश्वविद्यालय के कुलपति को दोषी माना जाय.

आपसे न्याय की उम्मीद में,     

भवदीय,

Dr. Ramesh Chandra Pathak

Assistant Professor
Department of Journalism & Mass communication
Banasthali University(NAAC ‘A’ Grade University)
Banasthali Vidyapith-304022
Tonk-Rajasthan INDIA
Phone:7073252751         
e-mail : [email protected]

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