पत्रकार की गृहस्थी बर्बाद करने वाला कोतवाल फिर निलंबित, हाईकोर्ट के लगा रहा चक्कर

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पूर्वांचल सहित यूपी के ईनामी माफियाओं व शूटरों से संबंध रखने वाले कोतवाल संजयनाथ तिवारी को एक बार फिर निलंबित किया गया है। उसके उपर लूट, हत्या, डकैती, अवैध वसूली सहित दर्जनों आरोप है। वर्तमान में वह रायबरेली कोतवाली में तैनात था। रायबरेली में भी उसके उपर दहशत फैलाकर अवैध वसूली, संभ्रात लोगों को मारना-पीटना, रुपये लेकर जमीन कब्जा करवाने आदि का आरोप है। रायबरेली कोतवाली का कार्यभार अब ओपी यादव ने संभाल लिया है।

आरोपी कोतवाल संजयनाथ तिवारी इसके पहले भदोही कोतवाली में तैनात था। भदोही में भी उसका आतंक, लूटपाट, रुपये लेकर लोगों का जमीन कब्जा करवाना, दंगे का मुख्य अभियुक्त पन्नालाल यादव से रुपये लेकर बचाने, कालीन निर्यातकों, बायर एजेंटों, संभ्रात नागरिकों सहित पत्रकारों को सरेराह मारना-पीटकर इलाके में दहशत फैलाने का सिलसिला जारी रहा। उसके काले कारनामों को उजागर करने पर ही कोतवाल संजयनाथ तिवारी संतरविदास नगर भदोही के वरिष्ठ पत्रकार सुरेश गांधी के उपर झूठ की बुनियाद पर पहले गुंडा एक्ट, फिर जिलाबदर और जब माननीय उच्च न्यायालय ने उसकी कार्यवाही पर रोक लगा दी तो कमरे का ताला तुड़वाकर गांधी की 16 साल से तिनका-तिनका जुटाई गई 25 लाख से भी अधिक की गृहस्थी माफियाओं से मिलकर लूटवा दी। उसके इस घिनौने कार्य के लिए गांधी ने जब सूबे के वरिष्ठ अधिकारियों सहित विभन्न आयोगों को पत्र भेजकर जानकारी दी तो खीझकर न सिर्फ पत्रकार गांधी को सरेराह मारा-पीटा बल्कि एक और फर्जी मुकदमा दर्ज करा दिया।

बता दें जिस दौरान सुरेश गांधी को कोतवाल संजयनाथ तिवारी ने पकड़ा था उस वक्त पुलिस से मुठभेड, विदेशी पिस्तौल आदि आरोपों में जेल भेजने की तैयारी में था, लेकिन उनकी पत्नी रश्मि गांधी द्वारा विभिन्न संस्थानों व स्वयंसेवी संगठनों सहित सूबे के डीजीपी से बात करने पर डीजीपी के निर्देश पर छोड़ दिया गया। इस उत्पीड़नात्मक कार्रवाई की जब गांधी ने जांच की मांग की तो आईजी जोन वाराणसी की तरफ से कराई जांच में सीओ सदर वाराणसी ने आरोपी कोतवाल संजयनाथ तिवारी से लाखों रुपये लेकर उसके मनमाफिक रिपोर्ट तैयार कर दी। जांच करने गए सीओं राहुल भदोही कोतवाली पहुंचे और वहां आरोपी कोतवाल द्वारा अपने पक्ष के लोगों सहित कुछ लोगों को धौंस से कोतवाली बुला लिया और भदोही में हुए दंगे के मुख्य अभियुक्त पन्नालाल यादव, विकास यादव, शोभनाथ यादव, सफीक, जाकिर व दलाल पत्रकार साजिद अली अंसारी सहित कई लोगों के बयान दिलवाकर अपनी बचत कर ली।
 
जांचकर्ता सीओ राहुल पूरे घटनाक्रम व आरोपों की जांच करने के बजाए आरोपी कोतवाल के मनचाहे बयान की रिपोर्ट अधिकारियों को सौंप दी। जानकारी होने पर पीड़ित पत्रकार गांधी एकबार फिर डीजीपी से मिले और उन्हीं के निर्देश पर आईजी जोन वाराणसी ने सीओं चंदौली सुधाकर यादव को जांच सौंपी। इसके अलावा माननीय उच्च न्यायालय की सक्रियता को देखते हुए डीजीपी ने आरोपी कोतवाल को निलंबित कर लखनऊ जोन में डाल दिया। तत्कालीन डीजीपी के सेवा निवृत होते ही अपनी जुगाड़ से रायबरेली कोतवाली में पोस्टिंग करा ली और फिर से लूटपाट व दहशत फैलाकर अवैध वसूली में जुट गया। गांधी के शिकायती पत्र पर एनएचआरसी द्वारा डीजीपी से जवाब मांगे जाने पर कार्रवाई के अंतर्गत ही डीजीपी ने उसे फिर से निलंबित कर लखनऊ पुलिस लाइन से संबंद्ध कर दिया। अब आरोपी कोतवाल हाईकोर्ट का चक्कर लगा रहा है। गांधी ने सूबे के वरिष्ठ अधिकारियों सहित जांच एजेंसियों को पत्र भेजकर आरोपित कोतवाल संजयनाथ तिवारी की कार्यप्रणाली व अवैध वसूली से एकत्र करोड़ों की संपत्ति की सीबीआई जांच कराने की मांग की है।

गौरतलब है कि कोतवाल संजयनाथ तिवारी भदोही में चार्ज संभालने के बाद माफिया विधायक विजय मिश्रा से संबंध बना लिये और उसके एवं उसके गुर्गो के निर्देश पर काम करने लगा। माफिया विधायक के कहने पर ही उसने गुंडई व दहशत के बल पर जीते हुए प्रत्याशी को हराकर विकास यादव की पत्नी सुनिता यादव को ब्लाक प्रमुख बनवा दिया। इसके बाद विकास यादव, साजिद अली, शोभनाथ यादव आदि उसके लिए काम करने लगे। चोरी के मामले में कालीन निर्यातक संजय मौर्या को रात 12 बजे कोतवाली उठा लाया और विकास यादव द्वारा 4 लाख रुपये दिलवाने पर छोड़ दिया। इसी तरह दर्जनों कालीन निर्यातकों से फर्जी मुकदमें का धौंस देकर लाखों वसूला। दंगे का मुख्य अभियुक्त पन्नालाल यादव के उपर दर्ज धाराओं को कम करने के लिए दबाव बनाकर अपनी बचत में मनचाहा बयान लिया। जौनपुर कोतवाली में भी दहशत फैलाकर काफी रुपया वसूला। इसका विरोध करने पर कांग्रेसी विधायक नदीम जावेद से कोतवाल संजयनाथ तिवारी से हाथापाई भी हो गयी। जौनपुर के लोगों द्वारा धरना-प्रदर्शन के बाद वहां से उसे हटा दिया गया। भदोही में हुए दंगे व महाशिवरात्रि के दिन हुए विस्फोट के मामले में भी मुख्य अभियुक्तों से पैसा लेकर निर्दोषों को जेल भेजा।

भड़ास को भेजे गए पत्र पर आधारित।

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