उत्तर प्रदेश में भूख से मर गया किसान कमलेश बघेल, प्रशासन साजिश और लीपापोती में जुटा

अन्नदाता की बेहाली का आलम देखना हो तो एटा जिले में आवागढ़ थाना क्षेत्र के नगला गलुआ आइए जहां चालीस वर्षीय किसान कमलेश बघेल ने भूख के चलते अपने प्राण त्याग दिए. परिजनों के मुताबिक पिछले सात आठ दिनों से अन्न के लिए वह तरस रहा था और भूख के चलते उसकी मौत हो गयी. परिवार में पत्नी शारदा, चार बेटे और एक बेटी की जिम्मेदारी से कमलेश टूट गया था. बैंक का कर्ज और पांच बीघा खेत में दो बीघा खेत भट्टे को दे देने के बाद कमलेश के पास तीन बीघा जमीन बची थी जिस पर दस कुंतल गेंहू हुआ था.

उस पर पहले से ही पन्द्रह कुंतल गेंहू उधार था जिसे उधार देने वाले लोगों ने उसके घर से दस कुंतल गेंहू उठा लिया. इसका गम उसे परेशान कर रहा था कि वो अपने परिवार का कैसे भरण पोषण कर सकेगा. परिजनों की मानें तो घर में अन्न का एक दाना न होने से वो परेशान था. इस बार की फसल से उसे उम्मीद जगी थी कि शायद वो अपने परिवार का भरण पोषण ठीक से कर सकेगा लेकिन बैंक का कर्ज, साहूकारों का करीब साढ़े चार लाख कर्ज था. बड़े बेटे के विकलांग होने से उसकी रही सही उम्मीदें भी टूट गयी थी. कमलेश की मौत ने परिवार को झकझोर कर रख दिया है कि पत्नी और पांच बच्चों का क्या होगा. ग्रामीण भी कमलेश की मौत से गमगीन हैं.

एटा का नाकारा जिला प्रशासन भुखमरी के चलते कमलेश की मौत को शराब के सेवन से मौत बता कर पल्ला झाड़ रहा है. जब घर में अन्न का एक दाना भी ना हो तो वो शराब कहां से पीता. हद तो तब हो गयी जब प्रशासन ने मृतक किसान की मौत का भद्दा मजाक उड़ाते हुए साजिश रची. डीएसओ संजीव कुमार ने राशन डीलर को उसके घर बीस किलो गेंहू, बीस किलो चावल और दस किलो चीनी भेजने के निर्देश दिए. राशन डीलर मृतक किसान के घर 13 किलो चावल, साढ़े चार किलो गेंहू और 9 किलो चीनी छोड़ कर भाग गया. ये पूरा वाक्या कैमरे में कैद हो गया. एक तरफ प्रदेश के मुख्यमंत्री भूख से होने वाली मौत के लिए सीधे जिलाधिकारी जिम्मेदार होने की बात कह रहे हैं वहीं एटा में भूख से मौत के बाद नाकारा प्रशासन पूरे मामले पर लीपापोती करने पर लगा है और डीएम अजय यादव जांच रिपोर्ट का इंतजार कर रहे हैं. यही अन्न का दाना प्रशासन ने पहले भेज दिया होता तो शायद कमलेश की मौत ना होती.

कमलेश की बहन सत्यवती ने कहा कि कमलेश की मौत उसे ४-५ दिन से खाना न मिलने के कारण हुई है. उसे खाना नहीं मिला था और उसके ऊपर बहुत ज्यादा कर्ज भी था. उसके खेत में जो अनाज हुआ था उसको कर्जे वाले ले गए. इसलिए उसके पास खाने के लिए कुछ नहीं था. कमलेश के भाई राम सनेही का कहना है कि मेरे भाई की मौत भूख से हुई है और जिला प्रशासन इसे नशे में आत्महत्या दिखा रहा है. कमलेश के पास खाने के लिए कुछ भी नहीं था. जिला प्रशासन झूठी रिपोर्ट दर्शाकर यह साबित करने की कोशिश कर रहा है कि यह मौत भूख से नहीं हुई है. ग्रामीण चन्द्र प्रकाश का कहना है कि कमलेश की मौत उसकी गरीबी और मुफलिसी की वजह से हुई है. उसके पास आमदनी का कोई भी साधन नहीं था और उसके घर की हालत ठीक नहीं थी.



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