‘भूत विद्या’ के नाम पर नहीं खुद के अज्ञान पर हंसिए

Sandhya Dwivedi : ‘भूत विद्या’ के नाम पर नहीं खुद के अज्ञान पर हंसिए.. बीएचयू में छह महीने का सर्टिफिकेट कोर्स शुरू हुआ. कोर्स का नाम है भूत विद्या. तो मेरे एक मित्र ने पूछा क्या इसमें भूत भगाने के बारे में कुछ चर्चा होगी. तो क्या अब बीएचयू जैसी यूनिवर्सिटी में भूत बाधा या प्रेत बाधा से निपटने के तरीके भी बताए जाएंगे?

वे बेहद परेशान थे. मैंने उन्हें बताया ऐसा नहीं है. मनोवैज्ञानिक विकारों खासतौर पर मनोदैहिक विकारों की चिकित्सा आयुर्वेदिक तरीके से करने को ही भूत विद्या कहते हैं. इस भूत शब्द का प्रेत से कुछ लेना देना नहीं है. आयुर्वेद में त्रिदोष (कफ- वात-पित्त) की मात्रा के आधार पर ही बीमारियों का पता लगाया जाता है.

ऐसे में कई बार चिकित्सक लाख कोशिश के बाद भी जब इनके जरिए विकार का ठीक-ठीक कारण नहीं पता लगा पाता तो वह भूत विद्या का सहारा लेता है. मतलब कई बार मानसिक कारणों की वजह शारीरिक बीमारी पैदा हो जाती है. मतलब बीमारी शारीरिक है लेकिन उसका कारण मानसिक है. जैसे कई लोग कई तरह के दर्द से पीड़ित रहते हैं.

इलाज के लिए दर-ब-दर भटकते रहते हैं लेकिन कोई उनका इलाज कर नहीं पाता. क्योंकि जड़ तक कोई पहुंचता ही नहीं. संक्षेप में इसे यूं समझो की मानसिक इलाज कर शरीर के विकार को ठीक करने की विद्या को भूत विद्या कहते हैं. आयुर्वेद के आठ अंगों में बकायदा इस विद्या का विस्तार से उल्लेख है. अरे पंचभूत तत्व तो जानते ही हैं न..कुछ उन्हीं में समझिए वायु तत्व के असंतुलन से मानसिक विकार माने जाते हैं.

प्राचीन ही नहीं बल्कि आधुनिक मनोविज्ञान भी इसे ही मेंटल डिसआर्डर का कारण मानता है. लेकिन ज्ञानीजन इस पंचभूत तत्वों को भी भूत-प्रेत (ghost) कह सकते हैं. खैर, पेशे से अध्यापक मेरे उन मित्र को यह बात समझ आ गई. लेकिन पत्रकार मित्रों ने तो हद ही कर दी. आव देखा ना ताव….शीर्षक ठेल दिए….

हिंदी बीबीसी-“भूत विद्या: बीएचयू में पढ़ाया जाएगा ‘भूत बाधा‘ से निपटने का तरीका ”

वहीं इंग्लिश, “Bhoot Vidya: India university to teach doctors Ghost Studies

वहीं न्यूज़ 18 ने तो इस कोर्स की तुलना हैरी पॉटर की काल्पनिक कहानी से कर दी और लिखा, “Desi Hogwarts? BHU to Start an Actual Course on ‘Bhoot Vidya’ or Paranormal Sciences”

बीबीसी….ज्ञानीजनों का गढ़, अरे हिंदी तो हिंदी…अंग्रेजी में भी…वैसे अंग्रेजी में भी कुपढ़ पत्रकारों की लंबी कतार है…लेकिन हिंदी कॉम्पलेक्स से ग्रसित पत्रकार अंग्रेजी की जुहार करते नहीं थकते…खैर यह कहानी फिर कभी…तो मुश्किल यह है कि तथाकथित पढ़े लिखे तबके ने ‘भूत विद्या’ को अनपढ़ों का टर्म समझकर खूब कोसा….यह वही लोग हैं चर्च के भीतर चलने वाले अंधविश्वास वैज्ञानिक लगते हैं….जिन्हें पादरियों के गुनाह दिखाई नहीं पड़ते लेकिन पंडितों और पंडे इन्हें जाहिल लगते हैं. पादरी या पंडित बुरी प्रवृत्तियां किसी के भी भीतर पनप सकती हैं. लेकिन पादरी अंग्रेज जो ठहरा…खैर छोड़िए….

कहना बस इतना है कि दुनिया की हर चीज सबको पता नहीं होती, लेकिन पत्रकार तो सेक्रेड गेम्स का नायक बन गया है….उसे कभी-कभी नहीं बल्कि हमेशा लगता है कि ‘वहीच्च सर्वज्ञानी है. कम से कम इसकी खोजबीन करने के बाद और पूछताछ के बाद लिखते तो यूं भद्द तो नहीं पिटती…खैर आयुर्वेद विभाग के डीन यामिनी भूषण ने बताया कि बीबीसी ने माफी मांग ली है….लेकिन अफसोस कि पत्रकारों ने ऐसी गलत जानकारी लोगों को दी. सबकुछ जानने के एहसास (यह भी एक तरह का पैरानोइया ही है) से बाहर आइये…

वरिष्ठ पत्रकार संध्या द्विवेदी की एफबी वॉल से.


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