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बांका के ऐसे मीडिया कर्मियों के तो दोनो हाथ में लड्डू

बांका (बिहार) : अखबार में एक नए अवैध परंपरा की यहां शुरूआत हो गयी है। सरकार में बहाल लोग मजे से अखबारों व चैनलों में संवाददाता की नौकरी कर रहे हैं। यह परंपरा मुख्यतः जिला और प्रखंड स्तर पर देखी जा रही है। हैरानी की बात है कि दैनिक जागरण, प्रभात खबर, हिन्दुस्तान जैसे बड़े अखबार यह जानते हुए भी कि उनके संवाददाता सरकारी नौकरी में हैं, उनको पाल रहे हैं। ऐसा करें भी क्यों नहीं। तकरीबन मुफ्त में या कम पैसे में इन्हें संवाददाता जो मिल रहे हैं। इस तरह के शिक्षक, कंम्प्यूटर ऑपरेटर अपने सरकारी कार्यालय से फरार होकर पूरे दिन समाचार संकलन में लगे रहते हैं। मुद्दा ये है कि अगर यह परंपरा चल निकली तो इसके परिणाम कितने भयावह हो सकते हैं इसका सहज हीं आकलन किया जा सकता है। 

बांका (बिहार) : अखबार में एक नए अवैध परंपरा की यहां शुरूआत हो गयी है। सरकार में बहाल लोग मजे से अखबारों व चैनलों में संवाददाता की नौकरी कर रहे हैं। यह परंपरा मुख्यतः जिला और प्रखंड स्तर पर देखी जा रही है। हैरानी की बात है कि दैनिक जागरण, प्रभात खबर, हिन्दुस्तान जैसे बड़े अखबार यह जानते हुए भी कि उनके संवाददाता सरकारी नौकरी में हैं, उनको पाल रहे हैं। ऐसा करें भी क्यों नहीं। तकरीबन मुफ्त में या कम पैसे में इन्हें संवाददाता जो मिल रहे हैं। इस तरह के शिक्षक, कंम्प्यूटर ऑपरेटर अपने सरकारी कार्यालय से फरार होकर पूरे दिन समाचार संकलन में लगे रहते हैं। मुद्दा ये है कि अगर यह परंपरा चल निकली तो इसके परिणाम कितने भयावह हो सकते हैं इसका सहज हीं आकलन किया जा सकता है। 

बिहार के बांका जिला में एमआरडी हाई स्कूल में कार्यरत सरकारी शिक्षक राहुल कुमार दैनिक जागरण के मुख्य संवाददाता बने हुए हैं। उनका बायलाइन समाचार लगातार दैनिक जागरण में प्रमुखता से प्रकाशित होता है। अधिवक्ता दीवाकर झा ने सूचना के अधिकार के तहत जब इसकी शिकायत बांका के जिला पदाधिकारी के जनता दरबार में की। तब यह मामला उजागर हुआ। दैनिक जागरण ने अपने जवाब में कहा कि राहुल कुमार हमारे अखबार में डेढ़ वर्ष पूर्व तक कार्यरत थे। वर्तमान में उनका दैनिक जागरण से कोई लेना देना नहीं है। आश्चर्यजनक तथ्य यह है कि इन सारे इनक्वायरी के बावजूद राहुल कुमार दैनिक जागरण कार्यालय बांका में वर्तमान में कार्य कर रहे हैं। उनकी लगातार बायलाइन खबरें प्रकाशित हो रही है। मैनेजमेन्ट को मुफ्त में चाकरी करने वाला एक व्यक्ति मिल गया है।  सरकारी विद्यालय छोड़कर समाचार संकलन में दिन भर व्यस्त रहता है। पदाधिकारी उसके रौब के आगे नतमस्तक हो जाते हैं। शिक्षा विभाग का स्पष्ट निर्देश है कि कोई भी शिक्षक और पत्रकार नहीं हो सकता है।  

प्रभात खबर अखबार के बांका कार्यालय का ब्यूरो चीफ प्रियरंजन उर्फ शशि वर्तमान में राज्य खाद्य निगम के बांका कार्यालय में कम्प्यूटर ऑपरेटर के पद पर कार्यरत है। कोई भी सरकारी विभाग में कार्यरत कम्प्यूटर ऑपरेटर कार्यालय का प्रमुख हिस्सा होता है। वह सरकार फाइलों से रोज खेलता रहता है। ऐसी स्थिति में सरकार की गोपनीयता भंग होने और मीडिया में प्रचारित होने का खतरा अकसर बना रहता है। नियमानुसार वह किसी अखबार में काम नहीं कर सकता है। सरकारी नियमों की खुलेआम यहां धज्जियां उड़ रही है। किसी भी अखबार के आउट स्टेशन का ब्यूरो चीफ के अंदर में दस संवाददाता, दो तीन छायाकारों और डाटा ऑपरेटरों की टीम होती है।  बांका जिला में ऐसे दर्जनों उदाहरण है। अखबार और पत्रकारिता का यह स्वरूप हास्यासपद होता जा रहा है।

प्रदीप चक्रवर्ती, अध्यक्ष, मीडिया मिशन, बांका से संपर्क : 9431463088 

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