भास्कर के ब्यूरो चीफ को ऑफिस में घुस कर पीटा और थाने ले जाकर भी मारा

बोकारो से ब्रेकिंग न्यूज़ है… दैनिक भास्कर के ब्यूरो चीफ संतोष कुमार सिंह के साथ कार्यालय में घुसकर आधा दर्जन पुलिस कर्मियों ने की मारपीट। मारते हुए ले आया गया थाना। पत्रकारो में रोष। सेक्टर 4 थाना इलाके की घटना। बोकारो के इतिहास में पहली बार किसी ब्यूरो चीफ के साथ घटी है ऐसी घटना।

दैनिक भास्कर के बोकारो ब्यूरो चीफ संतोष सिंह की सेक्टर चार थाने के 2 एएसआई एक हवलदार व अन्य पुलिस कर्मियो ने की पिटाई। 3 दिन पहले भास्कर कार्यालय से जेनरेटर की बैटरी चोरी हो गयी थी। संपादक ने थाने में प्राथमिकी दर्ज करायी। केस के अनुसंधानकर्ता asi भास्कर दफ्तर पहुँचे और ऑफिस के प्यून से चोरी की जानकारी लेने के क्रम में बकझक करने लगे।

सम्पादक ने विरोध दर्ज किया। इसी बात को लेकर asi थाने लौटा और वहां से आधा दर्जन से अधिक पुलिस वालों के साथ आया। संतोष सिंह का कॉलर पकड़ लिया और तीसरे तल्ले पर स्थित उनके कार्यालय से पीटते हुवे नीचे उतारा। पुलिस वाहन में बैठाकर थाने ले गया। आरोप है कि थाने में भी पिटाई की गयी। ब्यूरो चीफ ने ASI सुनीलाल मरांडी, ASI दिनेश पाण्डेय और अवधेश कुमार झा को मारपीट का आरोपी बताते हुए बोकारो के SP को शिकायत दी है। एसपी ने जांच कर कार्रवाई करने का आश्वासन दिया है।

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Comments on “भास्कर के ब्यूरो चीफ को ऑफिस में घुस कर पीटा और थाने ले जाकर भी मारा

  • sanjay kashyap says:

    बहुत अच्छा हुआ जो निलंबित किया इनको तो बर्खास्त कर देना चाहिये

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  • Mukesh Soni says:

    इसे ही तो कहते हैं वर्दी वाला गुंडा। क्राइम पर कण्ट्रोल नहीं होता तो इसी तरह पत्रकारों पर अपनी खीज उतारते हैं ये पुलिसिये। सही है की इनकी ना दोस्ती अच्छी, ना दुश्मनी, क्योंकि खाकी के रूप में किसी का भी एनकाउंटर करने का हथियार है इनके पास। लेकिन पत्रकार वही, जो बिना डरे इनकी असलियत जनता के सामने लाता रहे। सच तो ये है की मीडिया ना हो तो पुलिस से बड़ा गुंडा तंत्र कोई नहीं। अदालत की आँखों में तो धूल झोंक देना इनके बाएं हाथ का खेल है। डरते केवल मीडिया से हैं कि कहीं पोल ना खुल जाए। दबकर रहते हैं। इसीलिए तो मौका मिलते ही पत्रकारों के दमन से नहीं चूकते। लेकिन “कलम” को ये दमन कभी झुका नहीं पायेगा।

    -मुकेश सोनी, पत्रकार, श्रीगंगानगर, राजस्थान

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  • Bhaskar ko Hindustan ks sampadak se sikhna hoga ki apne logo ki ladai kaise ladi jati hai. Rajdeo ka mamle par Hindustan ne akhabar se sath diya. Bhaskar ne apne sampadak ki pitay ki khabar na chapkar durvahar par polic walo ks nilamban ki khabar chapi hai. wah v page 2 par. Isase acha to Hindustan ne pure Jharkhand me page ek par khabar li hai. Bihar me v chapa hai. Bhaskar apne hi patrakar ki pitai ki khabar Bokaro se bahar ke edition me nahi liya hai.
    Aise akhbaro ka patrakaro ko bahiskar karna chahiye. Thanks to Hindustan.

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